एफएसयूआई ने लिखा पीएम मोदी को पत्र, गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय नाविकों को शामिल करने की मांग

खबर सार :-

एफएसयूआई ने भारतीय नाविकों को रिपब्लिक डे परेड में शामिल करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले नाविकों के परिवारों को सम्मान देने की भी मांग की है। दुनिया के 90 प्रतिशत से अधिक व्यापार का परिवहन समुद्री मार्गों से होता है।
एफएसयूआई की भारतीय नाविकों को रिपब्लिक डे परेड में शामिल करने की मांग

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: भारतीय नाविकों को रिपब्लिकन डे परेड में शामिल करने को लेकर एफएसयूआई ने पीएम मोदी को पत्र लिखा है। फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया (एफएसयूआई) के महासचिव मनोज यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। पीएम को संबोधित पत्र में एफएसयूआई ने गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय नाविकों (सीफेरर्स) के एक विशेष दल को शामिल करने की मांग की है। साथ ही उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले नाविकों के परिवारों को सम्मान देने की भी मांग की है।

देश की दूसरी रक्षा पंक्ति हैं नाविक  

एफएसयूआई के अनुसार, यह नवीन पहल कैप्टन विजय राज पाठक के खास प्रयासों और देशभर के नाविकों की मांग पर की गई है। संगठन के मुताबिक, भारतीय नाविक लंबे समय से वैश्विक समुद्री व्यापार को ठीक बनाए रखने में अहम भूमिका अदा कर रहे हैं। नाविकों को देश की "दूसरी रक्षा पंक्ति" के रूप में मान्यता भी दी गई है। पीएम मोदी को संबोधित पत्र में कहा गया है कि दुनिया के 90 प्रतिशत से अधिक व्यापार का परिवहन समुद्री मार्गों से होता है। दुनिया भर में चलने वाले जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक सेवाएं दे रहे हैं। नाविकों ने देश के आजाद होने से पहले और आजादी मिलने के बाद देश की आर्थिक और सामरिक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। 

कोराना महामारी के दौरान नाविकों ने निभायी खास भूमिका 

पत्र में एफएसयूआई ने कोराना महामारी के समय भारतीय नाविकों की खास भूमिका का भी जिक्र किया गया है। एफएसयूआई के मुताबिक, पूरी दुनिया जब कोरोना जैसी गंभीर बीमारी के संकट का सामना कर रही थी, उस दौरान भी भारतीय नाविकों ने मुश्किल हालात में काम को अंजाम देते हुए दवाइयां, जरूरी सामान और अन्य जरूरत की वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित बनाए रखी थी। पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि बीते कुछ माह में कई सारे भारतीय नाविक फारस की खाड़ी, लाल सागर और काला सागर जैसे संवेदनशील और जोखिम वाले क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इस व्यापारिक मार्ग को चालू रखने के दौरान कई नाविकों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। एफएसयूआई पदाधिकारियों की मांग है कि ड्यूटी के दौरान असमय जान गंवाने वाले नाविकों के परिवारों को बहदुरी का ईनाम या अन्य उपयुक्त सम्मान प्रदान किया जाए। जिससे ऐसे नाविकों के बलिदान को आधिकारिक मान्यता मिल सके।

एफएसयूआई की दो मुख्य मांगे पूरी करने की अपील  

एफएसयूआई के अनुसार, भारतीय नाविक प्रशिक्षित, अनुशासित और संगठित कार्यबल हैं। नाविकों को गणतंत्र दिवस परेड में मार्च करने का मौका मिलता है तो नाविकों के योगदान को नेशनल लेबल पर सम्मान मिल सकेगा। इसके अलावा देश भर से आभार जताने का संदेश भी पहुंचेगा। संगठन ने पीएम मोदी से दो मुख्य मांगे पूरी करने की अपील की है। पहली मांग, रिपब्लिक डे परेड में भारतीय नाविकों के एक दल को शामिल किया जाए। वहीं दूसरी मांग, उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में कार्य के दौरान जान गंवाने वाले नाविकों के परिवारों को बहादुरी या वीरता सम्मान देने पर विचार किया जाए। एफएसयूआई का कहना है कि इस बाबत सरकार को किसी अतिरिक्त जानकारी या सहयोग की जरूरत होगी तो संगठन उपलब्ध कराने के लिए सहर्ष तैयार है।

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