पटना में चुनाव आयोग कार्यालय के घेराव की खबरों के बाद सुरक्षा कड़ी, रोके गए प्रदर्शनकारी

खबर सार :-

पटना में CPI(M), DYFI और SFI कार्यकर्ताओं के चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च के मद्देनजर सुरक्षा बढ़ाई गई। पुलिस ने आर-ब्लॉक पर प्रदर्शनकारियों को रोका और वॉटर कैनन तैनात किए। विरोध SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है।
पटना: चुनाव आयोग कार्यालय की बढ़ाई गई सुरक्षा, प्रदर्शनकारी रोके गए

खबर विस्तार : -

पटना: बिहार की राजधानी पटना में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) से जुड़े कार्यकर्ताओं के राज्य चुनाव आयोग कार्यालय का घेराव करने के प्रस्ताव के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। प्रशासन ने शहर के कई प्रमुख इलाकों में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी है। इनमें आर-ब्लॉक, जीपीओ गोलंबर, चुनाव आयोग कार्यालय और मुख्यमंत्री आवास के आसपास के क्षेत्र शामिल हैं। प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए हैं। प्रस्तावित मार्च के मार्ग पर अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है, जबकि प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए आर-ब्लॉक पर बैरिकेडिंग की गई। मौके पर वॉटर कैनन वाहन भी तैनात किए गए हैं। पुलिस और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।

जीपीओ गोलंबर से चुनाव आयोग ऑफिस तक मार्च 

जानकारी के अनुसार, CPI(M), DYFI और SFI से जुड़े कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर जीपीओ गोलंबर से राज्य चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च निकालने की योजना बनाई थी। हालांकि, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आर-ब्लॉक पर ही रोक दिया। यहां लगाए गए बैरिकेड के कारण उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं के हाथों में संगठनों के झंडे और विभिन्न मांगों से संबंधित प्लेकार्ड दिखाई दिए। इन पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लिखे थे। प्रदर्शनकारी चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर अपना विरोध दर्ज करा रहे थे। पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित मार्च के रास्ते पर निगरानी बढ़ाई गई। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो और किसी प्रकार की अव्यवस्था पैदा न हो।

मतदाता सूची और SIR प्रक्रिया को लेकर विरोध

यह प्रस्तावित प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है, जब देश के विभिन्न हिस्सों में मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग पर 'वोट चोरी' के आरोप लगाए हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। प्रदर्शन से जुड़ी मांगों में बिहार, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों को दोबारा शामिल करने की मांग भी प्रमुख है। हालांकि, मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और कथित अनियमितताओं से जुड़े आरोपों को राजनीतिक दलों तथा संबंधित संगठनों के दावों के रूप में देखा जाना चाहिए। इन आरोपों और मांगों पर संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया तथा उपलब्ध आधिकारिक तथ्यों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

पुलिस की तैनाती बढ़ी, प्रशासन की स्थिति पर नजर

पटना में सुरक्षा व्यवस्था के तहत आर-ब्लॉक और जीपीओ गोलंबर जैसे प्रमुख स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। चुनाव आयोग कार्यालय और मुख्यमंत्री आवास के आसपास भी निगरानी बढ़ाई गई है। वॉटर कैनन वाहनों की तैनाती को भी सुरक्षा इंतजामों का हिस्सा बताया गया है। प्रदर्शनकारियों को आर-ब्लॉक पर रोके जाने के बाद वे आगे क्या रणनीति अपनाएंगे, इस बारे में फिलहाल स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, किसी गिरफ्तारी, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प या यातायात बाधित होने की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता राजधानी में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। वहीं, प्रदर्शनकारी संगठनों की मांगें मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े व्यापक राजनीतिक विवाद की ओर ध्यान आकर्षित करती हैं। आगे की स्थिति प्रदर्शनकारियों के फैसले और प्रशासन की कार्रवाई पर निर्भर करेगी।

यह भी पढ़ेंः-इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका, नहीं दी आगे जाने की इजाजत

अन्य प्रमुख खबरें