दवाओं की मनमानी कीमतों पर लगेगी लगाम, सुप्रीमकोर्ट में केंद्र सरकार ने दााखिल किया हलफनामा

खबर सार :-

केंद्र सरकार ने कैंसर दवाओं की कीमतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दााखिल किया है। इसके तहत केंद्र सरकार ने कैंसर दवाओं की कीमतों को 30 प्रतिशत तक सीमित करने का फैसला लिया है।
कैंसर दवाओं की मनमानी कीमतों पर अंकुश लगाएगी केंद्र सरकार

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने दवाओं की कीमतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया है। हलफनामे में केंद्र सरकार ने बताया कि उसने गैर-अनुसूचित कैंसर दवाइयों पर ट्रेड मार्जिन को MRP (अधिकतम खुदरा मूल्य) के 30 प्रतिशत तक सीमित करने का फैसला किया है। सरकार ने कैंसर के इलाज की उन दवाओं की लिस्ट तैयार करने के लिए एक विशेषज्ञ कमेटी बनाई है जिन पर यह नियम लागू किया जा सकता है। 9 अक्टूबर, 2026 को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ कमेटी बनाई थी। कमेटी को 10 से 15 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है।

जरूरी निर्देश जारी करेगी एनपीपीए

हलफनामे में कहा गया है कि एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) इस मामले पर विचार करेगी और जरूरी निर्देश जारी करेगी। सरकार का कहना है कि इससे बेवजह की मुनाफाखोरी रुकेगी। सरकार का अनुमान है कि इस नियम से कैंसर की दवाओं की MRP में लगभग 20 से 70 प्रतिशत की कमी आ सकती है। इससे मरीजों को सालाना लगभग 2,500 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।

कीमतों को नियंत्रित करने के लिए पहले ही उठाए कदम  

केंद्र सरकार ने कहा है कि उसने कई दवाओं और मेडिकल प्रोडक्ट्स की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए पहले ही कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में माना कि उसे अस्पतालों में दवाओं और मेडिकल सप्लाई के लिए ज़्यादा पैसे लेने की समस्या के बारे में पता है और वह इस समस्या के समाधान का रास्ता तलाश रही है। केंद्र सरकार के मुताबिक, देश में कई ऐसी कंपनियां हैं जो सस्ते रेट पर दवाएं बनाती हैं। बावजूद इसके मरीजों को दवा खरीदने के लिए अधिक पैसे खर्च करने पड़ते हैं। मरीज़ों के पास अस्पतालों में मोलभाव करने की बहुत कम ताकत होती है। मरीज़ों को अक्सर दवाओं की असली कीमत और सस्ते विकल्पों के बारे में जानकारी नहीं होती है। 

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700 प्रतिशत तक ज़्यादा वसूल रहे अस्पताल 

सरकार ने अपने हलफ़नामे में कहा कि मरीज़ों की अस्पतालों के साथ मोलभाव करने की "बहुत कमज़ोर" स्थिति होती है, और उन्हें दवाओं, उनके विकल्पों और उनकी कीमतों के बारे में बहुत कम जानकारी होती है। अस्पताल कैंसर की दवाओं के लिए 700 प्रतिशत तक ज़्यादा पैसे लेते हैं। सरकार के अनुसार, मोलभाव में यह असमानता और जानकारी की कमी, दवा बनाने वालों के बीच ज़बरदस्त मुक़ाबले के बावजूद, सिस्टम में कई कमियों को जन्म देती है।

अधिकतम और खुदरा कीमतों की जानकारी देती है सरकार 

इसलिए, इन्हें रेगुलेट करने की ज़रूरत है। दवाओं की कीमतों को कंट्रोल करने के लिए उठाए गए कदमों का ज़िक्र करते हुए, सरकार ने कहा कि 935 शेड्यूल्ड फ़ॉर्मूलेशन (दवाओं) के लिए अधिकतम मूल्य और 3,881 नई दवाओं के लिए खुदरा मूल्य तय किए गए हैं। सरकार ने यह हलफ़नामा डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ की एक याचिका के जवाब में फ़ाइल किया। डॉ. कुलश्रेष्ठ ने नीति आयोग की एक रिपोर्ट और उस समय के स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के 2020 के एक बयान का ज़िक्र किया, जिसमें कहा गया था कि स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च हर साल लगभग 60 मिलियन परिवारों को गरीबी रेखा से नीचे धकेल देता है।

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