पश्चिम बंगाल: पुरुलिया में 256 एकड़ में बनेगा बंगाल का पहला बड़ा रक्षा विनिर्माण केंद्र

खबर सार :-

खाली पड़ी जमीन पर रक्षा उपकरण बनाने की दिशा में पहल की जा रही है। इससे युवकों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा। शिक्षा के क्षेत्र में विकास भी रेखांकित किया गया है।
जुपिटर डिफेंस बनाएगी रोजगार कॉरिडोर, रक्षा क्षेत्र में उतर रहीं कंपनियों की सार्थक पहल

खबर विस्तार : -

कोलकाता, पश्चिम बंगाल के औद्योगिक परिदृश्य में एक बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। पुरुलिया का रघुनाथपुर क्षेत्र रक्षा विनिर्माण के एक नए केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाने जा रहा है। यह प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई गति प्रदान करेगा। राज्य सरकार ने रघुनाथपुर के जंगल सुंदरी कर्मनगरी फेज-2 औद्योगिक पार्क में जुपिटर डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड को इसके लिए जिम्मेदारी भी दे दी है।

256 एकड़ जमीन आवंटित की गई

इसके लिए लगभग 256 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। अभी तक यह राज्य का ऐसा पहला बड़ा एकीकृत रक्षा विनिर्माण परिसर होगा। सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जुपिटर डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा स्थापित निजी क्षेत्र की पहल है। इसमें भारत सरकार का सरकारी आयुध कारखाना नहीं है। सरकार की ओर से 23 सितंबर को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की उपस्थिति में दस्तावेजों का लेनदेन भी किया जा चुका है। 

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मिलन मेला प्रांगण में एक भूमि आवंटन समारोह भी आयोजित किया जा चुका है। जुपिटर वैगन्स के चेयरमैन एमेरिटस मुरारी लाल लोहिया ने जमीन के दस्तावेज लिए। यहां जानकारियां साझा की गई। देश का रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच चुका है। अभी जुपिटर डिफेंस जैसी कंपनियों के रक्षा क्षेत्र में उतरने से भविष्य में भारत और मजबूत होगा। हालांकि रक्षा निर्यात को और बढ़ावा मिलने लगा है। 

कारखाने में सीधे नौकरियां दी जाएंगी

जंगल सुंदरी इंडस्ट्रियल पार्क-2 में ही इंटीग्रेटेड एम्युनिशन मैन्युफैक्चरिंग एंड फिलिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जाना है। इसके संबंध में करार तो पहले किए जा चुके। इसमें गोला-बारूद का निर्माण किया जाएगा। कई अन्य चीजों का निर्माण किया जाएगा, जो इससे संबंधित हैं। सरकार इसको बंगाल के गैर-जहाज निर्माण क्षेत्र का बता रही है। इसमें पहला निजी रक्षा विनिर्माण प्रोजेक्ट से संबंधित काम किए जाएंगे। प्रोजेेक्ट को तीन साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह एक रक्षा कारखाना है। राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि इसके स्थापित होने से पुरुलिया, बंगाल सहित पूरे देश को लाभ मिलने की उम्मीद है। कारखाने में सीधे नौकरियां दी जाएंगी। 

वाम शासन ने उद्योग के लिए जमीन दी थी

परिवहन, सुरक्षा, रखरखाव और सेवा क्षेत्रों में अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की भारी संभावना है। इसका सीधा संबंध अन्य क्षेत्रों से होगा। रक्षा उपकरणों के पुर्जे, पैकेजिंग, मशीनिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी स्थानीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम वस्तुओं का निर्माण व व्यापार यहां से जोड़ा जाएगा। उद्यम इकाइयों के लिए व्यापार के नए दरवाजे खोलने के लिए सरकार प्रतिवद्ध है। स्थानीय युवाओं के लिए भी तकनीकी प्रशिक्षण के बंदोबस्त किए जाएंगे।

आईटीआई एवं पॉलिटेक्निक जैसी संस्थाओं का उद्योग के साथ सीधा जुड़ाव बढ़ेगा। यह युवाओं के लिए दूरगामी लाभदायक होगा। रघुनाथपुर-2 ब्लॉक के रुकनी इलाके में वाम शासन के दौरान इस्पात उद्योग के लिए जमीन दी गई थी। यह जमीन लंबे समय से खाली पड़ी थी। इस पर काम नहीं किया गया था। इससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी थी। अब उसी जमीन पर रक्षा उद्योग लगने की खबर फैल चुकी है। इससे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। 

इस परियोजना का है सामरिक और राष्ट्रीय महत्व 

पूर्वी भारत में बंगाल रेल-आधारित उद्योग से आगे बढ़कर रक्षा विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बन सकेगा। यह परियोजना राष्ट्रीय स्तर पर भी काम आएगी। देश की रक्षा जरूरतों को घरेलू स्तर पर पूरा करने में इसका अहम रोल होगा।  इस परियोजना का सामरिक और राष्ट्रीय महत्व भी है। रक्षा विशेषज्ञ सत्यम सिंह ने कारखाना को लेकर अपनी राय दी है। इसे केवल एक निर्माण इकाई नहीं है, बल्कि पूर्वी भारत में रक्षा उत्पादन मजबूत होगा।

उनका कहना है कि इस समय अपनी रक्षा जरूरतों के लिए पूर्ण स्वदेशीकरण पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में जुपिटर डिफेंस का यह एकीकृत परिसर सैन्य आयात पर हमारी निर्भरता कम करेगा। इसमें किसी प्रकार का संदेह नहीं है। जब गोला-बारूद के निर्माण और उसकी फिलिंग का काम एक ही परिसर में होता है, तो इससे आपूर्ति श्रृंखला बेहद सुचारू हो जाती है।

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