लखनऊ कतकी मेले के टेंडर में 66.43 फीसदी बढ़ोतरी, 1.84 करोड़ रुपये अधिक मिलने का अनुमान

खबर सार :-

लखनऊ नगर निगम को लगभग 1.84 करोड़ रुपये अधिक मिलने का अनुमान जताया गया है। इस बार पहले जैसी अव्यवस्थ नहीं रहेगी। सभी जरूरी दिशा निर्देश पहले से ही पूरे कराए जाएंगे।
LUCKNOW : पिछले साल 2.77 करोड़ रुपये में हुआ था टेंडर, 4.61 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी

खबर विस्तार : -

लखनऊ, शहर के झूलेलाल वाटिका में गोमती नदी के किनारे हर साल आयोजित होने वाले 45 दिवसीय कतकी मेले की कागजी तैयारी शुरू कर दी गई हैं। इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी की जा रही हैं। माना जा रहा है कि इस बार उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2025-26 में जहां मेले का टेंडर 2 करोड़ 77 लाख रुपये में हुआ था, वहीं वर्ष 2026-27 के लिए 4 करोड़ 61 लाख 786 रुपये की बोली को स्वीकृति प्रदान की गई है।

नगर निगम के राजस्व में होगी ज्यादा वृद्धि 

मेला की पूरी व्यवस्था में मैसर्स खुशी ट्रेडर्स की वित्तीय बोली को निविदा समिति के सदस्यों की संस्तुति पर नगर आयुक्त गौरव कुमार ने मंजूरी दे दी है। आंकड़े बता रहे हैं, पिछले वर्ष की तुलना में टेंडर राशि में लगभग 1 करोड़ 84 लाख रुपये यानी 66.43 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। नगर निगम इस रकम को लेकर गदगद है। अधिकारियों की निगरानी के चलते निविदा प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है। बताया जा रहा है कि प्रक्रिया में निर्धारित नियमों एवं मानकों का पालन किया गया है। बोली के माध्यम से नगर निगम के राजस्व में वृद्धि संभव हो सकी है। 

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400 वर्षों से अधिक पुरानी परंपरा का निर्वहन हो रहा

संबंधित फर्म को निर्धारित नियमों के अनुसार निविदा स्वीकृति के बाद स्वीकृत धनराशि का 50 प्रतिशत हिस्सा 24 घंटे के भीतर जमा करने को कहा गया है। नगर निगम के खाते में कतकी मेले की निविदा प्रक्रिया के तहत यह रकम जमा करने के लिए कहा गया था। अधिकारियों का कहना है कि निविदा प्रक्रिया को पूर्ण पारदर्शिता के साथ संपादित किया गया है। निगम इसलिए खुश है, क्योंकि टेंडर राशि में बढ़ोतरी पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है।

यह राजस्व में वृद्धि के लिहाज से काफी है। लखनऊ के लोगों को खुशी है कि 400 वर्षों से अधिक पुरानी परंपरा के रूप में कतकी मेला का उत्साह मनाया जाता है। कतकी मेला, बुड़क्की का मेला या गंगा स्नान मेला के नाम से भी चर्चित है। परंपरागत रूप से कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गोमती नदी में स्नान के साथ मेले की शुरुआत होती है। इस मेले की परंपरा अवध के नवाबी दौर से जुड़ी है। मेले का संचालन और व्यवस्था लखनऊ नगर निगम के पास रहती है।

समय-समय पर बदला करता था मेले का स्थान

यह मेला कई बार यहां से वहां किया गया। पहले डालीगंज पुल और सूरज कुंड के आसपास आयोजित होता था। अब गोमती तट स्थित झूलेलाल वाटिका में इसका आयोजन किया जाता है।  कतकी मेले की खासियत यहां मिलने वाला पारंपरिक घरेलू सामान और हस्तशिल्प है। इसमें मिट्टी के बर्तन, सिलबट्टे, सूप, डलिया, लोहे के घरेलू उपकरण, क्रॉकरी, चूड़ियां, फर्नीचर, कालीन और कंबल की खूब विक्री होती है।

इसके साथ ही खानपान की पारंपरिक दुकाने व झूले मेले की रौनक बढ़ाते हैं। आधुनिक मॉल और ऑनलाइन खरीदारी के दौर में भी कतकी मेला अपनी पारंपरिक पहचान और किफायती बाजार के कारण लखनऊवासियों के बीच लोकप्रिय बना हुआ है। यह गोमती के किनारे होने से और रौनक देने लगा है। कतकी मेला में सबसे ज्यादा जरूरी है, अनुशासन व्यवस्था बनाए रखना। पिछली बार यहां पर स्टैंड वालों के द्वारा अभद्रता की शिकायतें बार-बार मिलती रही हैं। स्टैंड पर मनमानी दाम वसूलने की शिकायतें नगर निगम अधिकारियों व महापौर तक भी की गई, लेकिन उसका कोई समाधान नहीं निकाला जा सका। स्टैंड वालों ने लोगों के साथ जबरन पैसे वसूलने शुरू कर दिए। कई बार तो मारपीट की नौबत आई।

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