लखनऊ में 200 से ज्यादा वकीलों के चैंबर तोड़ने पर बवाल, सड़क पर उतरे अधिवक्ता

खबर सार :-

लखनऊ में नगर निगम द्वारा 200 से ज्यादा वकीलों के चैंबर तोड़ने की कार्रवाई के विरोध में अधिवक्ताओं ने धरना-प्रदर्शन किया। वकीलों ने पहले वैकल्पिक व्यवस्था देने की मांग की है।
लखनऊ में वकीलों का विरोध प्रदर्शन, चैंबर तोड़ने की कार्रवाई से नाराज

खबर विस्तार : -

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वकीलों के चैंबर तोड़ने की कार्रवाई को लेकर विवाद गहरा गया है। नगर निगम की ओर से 200 से ज्यादा चैंबरों को ध्वस्त किए जाने के विरोध में रविवार को बड़ी संख्या में अधिवक्ता सड़क पर उतर आए। प्रदर्शनकारी वकीलों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए धरना शुरू कर दिया। उनकी प्रमुख मांग है कि चैंबरों को तोड़ने से पहले प्रैक्टिस जारी रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

जानकारी के मुताबिक, हाईकोर्ट के आदेश के बाद चैंबरों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है। रविवार को पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर तोड़फोड़ की कार्रवाई के लिए पहुंचे तो वकीलों ने इसका विरोध किया। इसके बाद अधिवक्ता सड़क पर बैठ गए और धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बिना उचित वैकल्पिक व्यवस्था के चैंबर हटाए जाने से उनकी रोजमर्रा की वकालत और आजीविका प्रभावित होगी।

‘पहले वैकल्पिक व्यवस्था दें, फिर चैंबर तोड़ें’

प्रदर्शन के दौरान एडवोकेट बलराम जाखड़ ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को पहले वकीलों के लिए वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था करनी चाहिए और उसके बाद ही चैंबर हटाने की कार्रवाई करनी चाहिए। बलराम जाखड़ के मुताबिक, इस कार्रवाई से कम से कम 2,000 वकील प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि दिवाली जैसे बड़े त्योहार के समय भी अधिवक्ताओं को उनकी समस्याओं का समाधान नहीं मिल रहा है। उन्होंने प्रशासन के रवैये को मनमाना बताते हुए आरोप लगाया कि वकीलों की बात सुनने के बजाय उनके चैंबर तोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि वकीलों के चैंबर उनकी आंखों के सामने छीने जा रहे हैं। उनका सवाल है कि जब अधिवक्ताओं को अपनी प्रैक्टिस जारी रखनी है, तो उनके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना ऐसी कार्रवाई कैसे की जा सकती है।

वैकल्पिक व्यवस्था नहीं मिलने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी

बलराम जाखड़ ने आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से वकीलों को कोई ठोस विकल्प देने की कोशिश नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता अपने चैंबर बचाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे और कार्रवाई का विरोध जारी रखेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वकील ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को रोकने के लिए जो भी जरूरी होगा, वह करेंगे। उनके मुताबिक, यदि चैंबर तोड़ दिए गए तो अधिवक्ताओं को सड़क पर बैठकर प्रैक्टिस करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इसी आशंका के चलते वे पहले ही सड़क पर उतरकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।

हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान, लेकिन समाधान की मांग

वकीलों ने यह स्वीकार किया कि चैंबरों को हटाने की कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश के तहत की जा रही है। हालांकि, उनका कहना है कि अदालत के आदेश का पालन करते हुए भी ऐसा रास्ता निकाला जा सकता था, जिससे अधिवक्ताओं की प्रैक्टिस बाधित न हो। बलराम जाखड़ ने कहा कि वकील अदालत के आदेशों का सम्मान करते हैं, लेकिन प्रभावित लोगों की समस्याओं का समाधान निकालना भी जरूरी है। उन्होंने अधिवक्ताओं को समाज का महत्वपूर्ण वर्ग बताते हुए कहा कि वे लोगों को न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए, जिससे उन्हें अपमानित और परेशान महसूस हो। उन्होंने कहा कि वकील न तो गुंडे हैं और न ही माफिया, जिन्हें इस तरह प्रताड़ित किया जाए। उनके अनुसार, प्रशासन को अधिवक्ताओं की बात सुननी चाहिए और विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालना चाहिए।

सहारनपुर में अवैध मस्जिद तोड़ने पर भी हुआ था विवाद

उत्तर प्रदेश में इससे पहले सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर स्थित एक अवैध मस्जिद को ध्वस्त किए जाने को लेकर भी विवाद सामने आया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत द्वारा मुस्लिम पक्ष की अपील खारिज किए जाने के बाद वहां तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई थी। लखनऊ में वकीलों के चैंबरों को हटाने का मामला भी अदालत के आदेश और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ा है। हालांकि, दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग हैं और उनका आकलन संबंधित तथ्यों तथा न्यायिक आदेशों के आधार पर किया जाना चाहिए।

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