यूपी में चकबंदी व्यवस्था में बड़ा सुधार, 3,192 गांवों में प्रक्रिया पूरी, 21 लाख से अधिक वादों का निस्तारण
खबर सार :-
उत्तर प्रदेश में चकबंदी व्यवस्था को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में प्रगति हुई है। वर्ष 2025 तक 3,192 गांवों में चकबंदी पूरी हुई और 21.12 लाख से अधिक वादों का निस्तारण किया गया।
खबर विस्तार : -
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में किसानों की भूमि से जुड़े मामलों को व्यवस्थित करने और राजस्व अभिलेखों के रखरखाव को बेहतर बनाने के लिए चकबंदी व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर जोर दिया जा रहा है। चकबंदी निदेशालय के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2017 की तुलना में वर्ष 2025 तक चकबंदी प्रक्रिया पूरी करने वाले गांवों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही चकबंदी न्यायालयों में लंबित मामलों के निस्तारण और न्यायालयों के कंप्यूटरीकरण की दिशा में भी प्रगति हुई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, इन प्रयासों का उद्देश्य किसानों को भूमि संबंधी मामलों में बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना, राजस्व अभिलेखों को व्यवस्थित करना और चकबंदी प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित तहसीलों तक अभिलेख समय से पहुंचाना है।
1,925 से बढ़कर 3,192 हुई चकबंदी पूरी करने वाले गांवों की संख्या
चकबंदी निदेशालय के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2017 में प्रदेश के 1,925 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी हुई थी। वर्ष 2025 तक यह संख्या बढ़कर 3,192 गांव हो गई। इस अवधि में चकबंदी पूरी करने वाले गांवों की संख्या में 1,267 की वृद्धि दर्ज की गई। चकबंदी प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित गांवों के अभिलेख तहसीलों को वापस किए गए। इससे भूमि से संबंधित रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और राजस्व प्रशासन के कामकाज को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। चकबंदी का उद्देश्य कृषि भूमि के बिखरे हुए टुकड़ों को व्यवस्थित करके किसानों को भूमि प्रबंधन में सुविधा देना है। इसके अलावा, भूमि से संबंधित अभिलेखों को अद्यतन और व्यवस्थित रखने से राजस्व संबंधी कार्यों को सुचारु बनाने में भी सहायता मिल सकती है।
21.12 लाख से अधिक वादों का निस्तारण
भूमि विवादों से जुड़े मामलों के निस्तारण में भी विभाग ने प्रगति दर्ज की है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 में चकबंदी न्यायालयों में 12.55 लाख से अधिक वादों के निस्तारण की स्थिति थी, जबकि वर्ष 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर 21.12 लाख से अधिक हो गया। चकबंदी निदेशालय के मुताबिक, विगत आठ वर्षों में कुल 21 लाख 12 हजार 784 वादों का निस्तारण किया गया। भूमि से जुड़े विवाद किसानों के लिए लंबे समय तक परेशानी का कारण बन सकते हैं। ऐसे में मामलों का समयबद्ध निस्तारण भूमि अधिकारों से संबंधित प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
531 चकबंदी न्यायालयों का हुआ कंप्यूटरीकरण
चकबंदी व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए न्यायालयों के कंप्यूटरीकरण पर भी ध्यान दिया गया है। निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 में इस मद में स्थिति शून्य थी, जबकि वर्ष 2025 तक 531 चकबंदी न्यायालयों का कंप्यूटरीकरण किया गया। इसमें उप संचालक चकबंदी, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी और चकबंदी अधिकारी के न्यायालयों के साथ 180 सहायक चकबंदी अधिकारी न्यायालय भी शामिल हैं। न्यायालयों के कंप्यूटरीकरण से कामकाज को अधिक व्यवस्थित करने, रिकॉर्ड के प्रबंधन को बेहतर बनाने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। इससे चकबंदी से संबंधित कार्यों में पारदर्शिता और समयबद्धता बढ़ाने की दिशा में भी सहायता मिलने की संभावना है।
आठ वर्षों में 1,302 गांव चकबंदी के नवप्रसार में शामिल
चकबंदी निदेशालय के आंकड़ों में चकबंदी प्रक्रिया के नवप्रसार से संबंधित जानकारी भी दर्ज है। विभाग के मुताबिक, विगत आठ वर्षों में कुल 1,302 गांवों को इस श्रेणी के अंतर्गत शामिल किया गया। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 में इस श्रेणी में 2,468 गांवों की स्थिति दर्ज थी, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या 1,302 रही। विभागीय विवरण में इन गांवों को आठ वर्षों के दौरान चकबंदी क्रियाओं में शामिल किए गए गांवों के रूप में दर्शाया गया है। इस आंकड़े को चकबंदी प्रक्रिया पूरी करने वाले गांवों की संख्या से अलग समझना जरूरी है, क्योंकि दोनों श्रेणियां अलग-अलग चरणों या गतिविधियों को दर्शाती हैं।
किसानों को बेहतर सुविधा देने पर रहेगा जोर
उत्तर प्रदेश में चकबंदी व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए गांवों में प्रक्रिया पूरी करने, भूमि विवादों का निस्तारण करने और न्यायालयों को तकनीक से जोड़ने जैसे कदम उठाए गए हैं। विभागीय आंकड़े इन क्षेत्रों में हुई प्रगति को दर्शाते हैं।
यह भी पढ़ेंः-लखनऊ में 200 से ज्यादा वकीलों के चैंबर तोड़ने पर बवाल, सड़क पर उतरे अधिवक्ता
अन्य प्रमुख खबरें
-
हमीरपुर में जलविहार महोत्सव आज, पानी के बीच रामलीला का होगा सजीव मंचन
2026-10-25
-
हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के बाद बढ़ी ठंड
2026-10-25
-
लखनऊ में वकीलों का विरोध प्रदर्शन, चैंबर तोड़ने की कार्रवाई से नाराज
2026-10-25
-
Sharad Purnima 2026: शरद-पूर्णिमा पर प्रयागराज में उमड़ा जनसैलाब
2026-10-25
-
सीवान विस्फोट मामले में पांचवी मौत की गुत्थी उलझी, युवती की तलाश जारी
2026-10-24
-
झांसी में सुरक्षा जवानों की भर्ती, 22 हजार तक वेतन
2026-10-24
-
UPMRC को UMI 2026 में मिला बेस्ट स्टॉल अवार्ड
2026-10-24
-
बल्दीराय में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन मार्गों का निरीक्षण, सुरक्षा के निर्देश
2026-10-24
-
झांसी में डॉक्टर के घर चोरी, नौकर का बेटा गिरफ्तार
2026-10-24
-
उत्तर प्रदेश में ऑनलाइन फूड स्टोर्स पर FSDA की बड़ी कार्रवाई, 4 लाइसेंस निलंबित
2026-10-24
-
कैनवस पर उतारें या रील बनाकर दुनिया को दिखाएं अयोध्या, ऐसे करें आवेदन
2026-10-24
-
बिहार में खाद्य सुरक्षा अभियान तेज, 531 प्रतिष्ठानों की जांच
2026-10-24
-
दीपोत्सव से पहले अयोध्या में चला सफाई अभियान, मेयर ने उठाई झाड़ू
2026-10-24
-
सीवान के गांव में 40 सालों से चल रहा था अवैध पटाखा कारोबार, उठे सवाल
2026-10-24
-
बंगाल में पुरानी परंपरा खत्म, दुर्गा पूजा पर नहीं मिलेगी लंबी छुट्टी
2026-10-24