हमीरपुर में पानी के बीच सजीव होगी रामलीला व कृष्ण लीला, 400 साल पुराने जलविहार महोत्सव को देखने उमड़ेगी भीड़

खबर सार :-

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में रविवार को ‘जलविहार महोत्सव’ का आयोजन किया जाएगा। बड़े तालाब पर रामलीला और श्रीकृष्ण लीला का मंचन होगा। इसे देखने दूर-दूर से लोग आएंगे।
हमीरपुर में जलविहार महोत्सव आज, पानी के बीच रामलीला का होगा सजीव मंचन

खबर विस्तार : -

हमीरपुर: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में 'जलविहार महोत्सव' के हिस्से के रूप में रविवार रात एक बड़े तालाब पर 'रामलीला' और 'श्री कृष्ण लीला' का जीवंत मंचन किया जाएगा। सदियों पुरानी इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए तालाब के किनारे हजारों लोगों के जुटने की उम्मीद है। ग्राम पंचायत स्तर पर इस आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

जिले की सरीला तहसील में स्थित पवाई गांव में चार सौ साल से भी पुरानी एक परंपरा के तहत स्थानीय पुरुष और महिलाएं खुद ही रामलीला और श्री कृष्ण लीला का मंचन करते हैं। शरद पूर्णिमा के अवसर पर इस गांव में ऐतिहासिक 'जलविहार महोत्सव' बहुत धूमधाम से मनाया जाएगा। तालाब में रामलीला और श्री कृष्ण लीला के मंचन से पहले, भगवान शिव की बारात गांव की गलियों से निकाली जाएगी, जो ऐतिहासिक तालाब के पास जाकर समाप्त होगी। दिन के समय पानी में रामलीला का मंचन होगा, जिसके बाद श्री कृष्ण लीला का जीवंत प्रदर्शन किया जाएगा, जो पूरी रात तालाब के भीतर ही चलता रहेगा। पानी पर इन अनोखे प्रदर्शनों के लिए कई बड़ी नावों की व्यवस्था की गई है।

पानी पर जीवंत होंगी कृष्ण लीलाएं व रामलीला

यह अद्भुत नजारा पूरी रात पानी पर देखने को मिलेगा, जिसमें कंस, पूतना और बकासुर जैसे कई राक्षसों का वध दिखाया जाएगा। तालाब में होने वाला यह प्रदर्शन वाकई बहुत खास होता है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण आते हैं और पूरी रात वहीं रुकते हैं। पवाई के ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि रामगोपाल ने बताया कि रामलीला और श्री कृष्ण लीला का इस तरह का जीवंत मंचन, जो पूरी तरह से पानी के बीच किया जाता है, हमीरपुर के अलावा और कहीं देखने को नहीं मिलता। इसी तरह, जिले के कुरारा क्षेत्र में स्थित भैसापाली गांव में भी पूरी रात 'जलविहार महोत्सव' मनाया जाता है, जहां 'लाला हरदौल' के चरित्र का मंचन किया जाता है। इसके अलावा, 'तेशु', 'झिंजिया' और 'सुअटा' की परंपराएं कार्तिक महीने तक जारी रहेंगी। इस कथा के अनुसार, 'तेशु' राक्षस 'सुअटा' को हराएगा और फिर 'झिंजिया' से विवाह करेगा। विवाह समारोह संपन्न होने के साथ ही यह उत्सव भी समाप्त हो जाएगा।

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400 से अधिक वर्षों से हो रहा है महोत्सव

बुंदेलखंड क्षेत्र में 'जलविहार महोत्सव' एक अनोखी परंपरा है। पवाई गांव की सरपंच आशा देवी के पति रामगोपाल ने बताया कि बुंदेलखंड के हमीरपुर जिले में एक तालाब के बीच यह आयोजन 400 से अधिक वर्षों से होता आ रहा है। उन्होंने बताया कि यहां पानी के बीच 'रामलीला' (भगवान राम के जीवन की कथा) और 'श्री कृष्ण लीला' (भगवान कृष्ण के जीवन की कथा) करने की एक पुरानी परंपरा है, जिसमें गांव के लोग ही विभिन्न पात्रों की भूमिका निभाते हैं। ये प्रस्तुतियां पूरी रात चलती हैं, जिन्हें देखने के लिए आसपास के दर्जनों गांवों से भारी भीड़ उमड़ती है। इस ऐतिहासिक परंपरा की सुरक्षा के लिए जरिया थाने के पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया जाता है।

दो लाख रुपये से होगा ऐतिहासिक आयोजन

गांव की सरपंच का प्रतिनिधित्व करते हुए रामगोपाल ने बताया कि इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए दो लाख रुपये का बजट रखा गया है। उन्होंने बताया कि गांव के डॉ. मंगल सिंह कंस की भूमिका निभाएंगे, खेमचंद राजपूत कालिया नाग बनेंगे, शिवप्रसाद पूतना का किरदार निभाएंगे और अमरचंद राजपूत राक्षस बकासुर की भूमिका में होंगे। इसके अलावा, इंद्रेश सिंह भगवान कृष्ण की भूमिका निभाएंगे और सूरज प्रसाद को भगवान शिव (शंकर जी) का पात्र निभाने की जिम्मेदारी दी गई है। सभी कलाकार अपने-अपने किरदारों की तैयारी में जुट गए हैं।

गुब्बारों के जरिए आसमान में छोड़े जाएंगे कूपन

गुब्बारों के जरिए इनाम वाले कूपन आसमान में छोड़े जाएंगे। गांव की सरपंच श्रीमती आशा देवी और उनके पति रामगोपाल ने बताया कि इस पुरानी परंपरा की शुरुआत एक गुब्बारे को आसमान में छोड़कर होगी, जिसमें इनाम का कूपन लगा होगा। इस गुब्बारे में दो हजार रुपये के इनाम वाला कूपन होगा। उन्होंने बताया कि जिसे भी यह कूपन मिलेगा, उसे इनाम दिया जाएगा और उसके यात्रा का खर्च भी उठाया जाएगा। सरपंच ने बताया कि इनाम वाला कूपन लेकर उड़ने वाला गुब्बारा आमतौर पर लगभग तीन किलोमीटर दूर जाकर गिरता है। जिसे भी यह कूपन मिलेगा, उसे रामलीला और जलविहार उत्सव खत्म होने के अगले दिन सम्मानित किया जाएगा और इनाम दिया जाएगा।

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