6 जिलों में क्षतिपूर्ति के लिए ज्यादा आवेदन, खेतों में बिना सर्वे नहीं होगा भुगतान
खबर सार :-
छह जनपदों में क्षतिपूर्ति के अधिक दावे किए गए हैं, इनमें अधिकारी पहले खेतों में सर्वे करेंगे और नुकसान की भरपाई की सीमा तय करेंगे। उसके बाद ही भुगतान किया जाएगा। इन जिलों में मुख्य रूप से महोबा, जालौन, ललितपुर, झांसी, चित्रकूट, मिर्जापुर आदि जनपद शामिल हैं।
खबर विस्तार : -
लखनऊ, आपदा प्रभावित जिलों में क्षतिपूर्ति की मांग कर रहे किसानों ने अपनी समस्याएं कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही को बताई तो उन्होंने सर्वे की गति को तेज करने के निर्देश दिए। कहां की जितना जल्दी हो उतनी जल्दी यह काम पूरा करें। सर्वे काम पूरा करने के बाद अधिकारियों को रवी की खेती के लिए जुट जाना है। कृषि विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतर्गत विभागीय योजनाओं की वित्तीय प्रगति का विवरण प्रस्तुत किया गया।
कृषि विभाग के लिए कुल 10,017.45 करोड़ रुपये का बजट प्राविधान किया गया है। इसमें 5,085.51 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति जारी हो चुकी है। अधिकारियों ने बताया कि 2,946.84 करोड़ रुपये का व्यय किया जा चुका है। योजनाओं के स्तर पर 8,386.94 करोड़ रुपये का प्राविधान किया गया था। इसमें 3,455.61 करोड़ रुपये की स्वीकृति की गई थी। जिसमें 2,393.66 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। इस दौरान अधिकारियों की उपस्थिति में विभाग की समीक्षा भी की गई।
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जरूरत के बीजों की मिल रही है मिनी किट
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा है कि वह समय से सारा काम निपटा दें। बारिश और आपदा से प्रभावित लाभार्थी को सरकार की ओर से मुहैया कराई जा रही रकम पहुंचने के साथ ही रवी की फसलों पर ध्यान दें। आगामी रबी अभियान 2026-27 की तैयारियों के संबंध में शाही ने बताया कि प्रदेश में रबी फसलों के लिए कुल 12 लाख कुंतल बीज वितरित करने का लक्ष्य है। इसमें 10.45 लाख कुंतल गेहूं, 69.96 हजार कुंतल चना, 41.76 हजार कुंतल मसूर और 17.89 हजार कुंतल मटर शामिल हैं।
योजना में दलहन एवं तिलहन के 7.65 लाख से अधिक निःशुल्क मिनीकिट वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बीज वितरण को लेकर सूर्य प्रताप शाही ने कहा है कि किसानों को समय पर बीज पहुंच जाएं ताकि फसल में किसी प्रकार की लेट लतीफी ना हो।
आवश्यकता से ज्यादा न करें खाद की डिमांड
बैठक में रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए फसलों की प्रजातियों के अनुसार अधिकतम अनुदान की व्यवस्था में मसूर की 8 वर्ष से कम अवधि की समस्त प्रजातियों पर सर्वाधिक 100 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है, जबकि चना (8 वर्ष से कम अवधि), मटर (8 वर्ष से कम अवधि) तथा मसूर (10 वर्ष से कम अवधि) की प्रजातियों पर 75 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है। इसके अलावा गेहूँ (10 वर्ष से कम व अधिक दोनों), जौ (10 वर्ष से कम व अधिक दोनों), चना (10 वर्ष से कम अवधि), मटर (10 वर्ष से कम अवधि), तोरिया (15 वर्ष से कम अवधि) तथा राई/सरसों (15 वर्ष से कम अवधि) की समस्त प्रजातियों पर अधिकतम 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है।
कृषि विभाग की ओर से खाद की कालाबाजारी को लेकर निगरानी बढ़ती जा रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से लेकर प्रदेश कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही तक ने कहा है की जरूरत के अनुसार ही किसान खाद लें। खाद की डिमांड से पहले उनको कृषि का डिटेल भी देना होगा। रबी 2026-27 के लिए उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण पर कृषि मंत्री ने कहा है कि प्रदेश में खाद का पर्याप्त भंडार है।
धरातल पर जाकर स्थलीय निरीक्षण करना होगा
राज्य में कुल 68.50 लाख मीट्रिक टन उर्वरक के वार्षिक लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 34.19 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराया जा चुका है। इसमें 16.12 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 6.76 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 5.58 लाख मीट्रिक टन एनपीके शामिल है। कृषि विभाग की ओर से अधिकारियों से जोर देकर कहा जा रहा है कि जो भी कृषि संबंधित कार्य हैं, वह समय पर ही निपटाएं। योजना अधिकारियों को भी कहा कि निर्धारित बजट का समय से सदुपयोग सुनिश्चित किया जाए।
इस बार कृषि क्षेत्र में अधिकारियों के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी कि वह धरातल पर जाकर काम करेंगे। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा है की धरातल पर जाकर स्थलीय निरीक्षण करें और विभिन्न कृषि विकास कार्यों की गुणवत्ता को शत-प्रतिशत सुनिश्चित करें। उर्वरक में किसी प्रकार का भ्रष्टाचार या कालाबाजारी नहीं होने दी जाएगी। सहकारिता एवं निजी दोनों क्षेत्रों में उर्वरकों की निरंतर निगरानी रखी जाएगी। इसका पालन करने से रबी की बुवाई के समय किसानों को उर्वरक प्राप्त करने में किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़ेगा।
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