गोष्ठी में रबी उत्पादन बढ़ाने पर जोर, आधुनिक तकनीक और किसान कल्याण पर हुआ मंथन

खबर सार :-

राजधानी लखनऊ के इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान के जुपिटर ऑडिटोरियम में बुधवार को राज्य स्तरीय रबी उत्पादकता गोष्ठी-2026 का आयोजन किया गया। इसमें किसानों, फसलों, बीजों एवं तकनीकी पर चर्चा की गई।
रबी उत्पादन में 30 लाख मीट्रिक टन वृद्धि का लक्ष्य, दलहन-तिलहन के बीजों पर अनुदान

खबर विस्तार : -

लखनऊ, राजधानी लखनऊ के इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान के जुपिटर ऑडिटोरियम में बुधवार को राज्य स्तरीय रबी उत्पादकता गोष्ठी-2026 का आयोजन किया गया। इसमें किसानों, फसलों, बीजों एवं तकनीकी पर चर्चा की गई। 

कार्यक्रम में प्रदेश से प्रगतिशील किसानों को बुलाया गया था। उनको प्रोत्साहन स्वरूप उन्नतिशील बीजों के मिनीकिट वितरित किए गए। कृषि यंत्रों के स्वीकृति पत्र तथा विषमुक्त खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से फेरोमोन ट्रैप का सांकेतिक वितरण किया गया। गोष्ठी में किसानों की तमाम परेशानियों पर चर्चा की गई। उनके सभी मुद्दों पर लगाए गए सवालों के उत्तर दिए गए। किसानों में मत्स्य, पशु पालन और खेती से जुड़े विषय पर चर्चा की गई।

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कल्याणकारी योजनाओं पर गहन विचार-विमर्श किया

किस तरह से हर क्षेत्र में वैज्ञानिक मदद कर सकते हैं या उनका दायित्व क्या है? इस बारे में भी वक्ताओं ने अपनी बात रखी। किसानों ने आगामी रबी अभियान के उत्पादन लक्ष्यों, तकनीकी नवाचारों, जलवायु अनुकूल खेती और किसान कल्याणकारी योजनाओं पर गहन विचार-विमर्श किया। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने भी किसानों के बीच अपनी बात रखी। उन्होंने खाद्यान्न, दूध, गन्ना, चीनी और सब्जी उत्पादकों का आभार जताया।

कृषि विकास दर 8 से बढ़कर 18 प्रतिशत पहुंच चुकी

उन्होंने आंकडे दिए और कहा कि प्रदेश की कृषि विकास दर 8 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। उन्होंने पिछली सरकारों के दौरान के बजट का उल्लेख किया और कहा कि योगी सरकार में किसानों के हित में ₹69,163 करोड़ का ऐतिहासिक बजट व्यय किया है। उन्होंने बताया कि खेतों में उत्पादन बढ़ रहा है। कहा कि पिछले वर्ष के 480 लाख मीट्रिक टन के सापेक्ष इस वर्ष 30 लाख मीट्रिक टन की बढ़ोतरी के साथ कुल 510 लाख मीट्रिक टन रबी खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 

प्रदेश में दलहन-तिलहन में आत्मनिर्भरता प्रदेश बनाने के लिए 50 लाख निशुल्क मिनीकिट वितरित किए जा रहे हैं। बीजों पर ₹600 करोड़ और कृषि यंत्रों पर लगभग ₹350 करोड़ का भारी अनुदान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अनुदानित बीज व उर्वरकों की अंतरराज्यीय तस्करी पर पूर्ण अंकुश लगाया जा रहा है। इसके लिए विभागीय पोर्टल के सर्वर को अधिक तेज किया जा रहा है, सहकारिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जे.पी.एस. राठौर ने सहकारिता आंदोलन का जिक्र किया।

50 जिला सहकारी बैंकों को पुनर्जीवित किया

बताया कि 50 जिला सहकारी बैंकों को पुनर्जीवित किया गया है। इनमें 54 लाख नए किसान जोड़े गए हैं। इनको ₹3 लाख तक का केसीसी ऋण मात्र 3 प्रतिशत ब्याज दर पर तथा महिला किसानों को पशुपालन के लिए ₹2 लाख तक का ऋण न्यूनतम ब्याज पर उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार की ओर से दी गई सुविधा में सहकारी ग्राम विकास बैंक द्वारा खाद, उपकरण, निवेश, परिवहन आदि पर अनुदान दिलाया जा रहा है। इस दौरान गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम गुप्ता ने एक गाय देसी, पांच एकड़ खेतीश् का आह्वान किया।

अनुकूल खेती की तकनीकों की जानकारी दी

अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण बी.एल. मीणा शहद और फिश आदि पर सुविधाओं एवं अनुदान का जिक्र किया। अपर मुख्य सचिव पशुपालन मुकेश मेश्राम ने निराश्रित गोवंश आश्रय स्थलों से 4 गोवंश गोद लेने पर मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत ₹72 हजार की वार्षिक डीबीटी सहायता की जानकारी दी। फार्मर परियोजना के अंतर्गत ग्लोबल वार्मिंग के अनुकूल खेती की तकनीकों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही तकनीकी सत्र में अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान वाराणसी के वरिष्ठ वैज्ञानिक ने फसल अवशेष प्रबंधन व जीरो टिलेज विधि तथा चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय कानपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक ने सरसों व अलसी की नवीनतम उन्नत प्रजातियों पर मार्गदर्शन दिया। 

इन समस्याओं पर ध्यान देने की है जरूरत

सरकार की योजनाओं को अफसरों ने गिनाया, मंत्रियों ने गिनाया, वैज्ञानिकों ने गिनाया, लेकिन जरूरत इस बात की है की खेती में आ रही दिक्कतें दूर की जाएं। सबसे पहले किसानों को उनकी उपज के लिए पर्याप्त सिंचाई के बंदोबस्त किया जाए। इसके लिए हर खेत तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था होनी चाहिए। कागजी आंकड़ों पर नहीं, जमीनी हकीकत से रूबरू कराना जरूरी होगा। इसी तरह गौशालाओं की स्थिति को लेकर भी गंभीर होने की जरूरत है। गौशालाओं में सर्दी आने पर गाय मरती हैं। उन्हें पर्याप्त चारा नहीं उपलब्ध हो पता है। ऐसी ही कई समस्याएं हैं, जिनको लेकर किसान परेशान रहते हैं। छुट्टा गाय अन्य पशु खड़ी फैसलें तबाह करती हैं। इस बारे में भी सरकार को ध्यान देने की जरूरत है।

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