कोरबा में 15 नवंबर से शुरू होगी धान खरीद, 10 नवंबर से कटेंगे टोकन

खबर सार :-

कोराबा में धान खरीद की प्रक्रिया में तेजी से काम शुरू हो गया है। अधिकारियों की आज ऑनलाइन मीटिंग के बाद निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी प्रकार से धान की खरीद प्रक्रिया पूरी करना है। नया बारदाना लगाएं या पुराना, 15 नवंबर से काम शुरू कर दिया जाएगा।
73 उपार्जन केंद्रों में तैयारी पूरी, कोरबा में पहुंचाए नए-पुराने बारदाने

खबर विस्तार : -

कोरबा, छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के तहत धान खरीद की प्रक्रिया को लेकर आज अधिकारियों ने मीटिंग की है। इसमें साफ कहा गया है कि धान की खरीद शुरुआत 15 नवंबर से होगी। इसके लिए किसानों को 10 नवंबर से टोकन मिलना शुरू हो जाएगा। किसी भी प्रकार से काम को करना है। इसमें लापरवाही नहीं चलने की हिदायत दी गई है। किसान ‘तुहर टोकन’ ऐप के माध्यम से 24 घंटे अपनी सुविधानुसार धान विक्रय के लिए टोकन प्राप्त कर सकेंगे। इसके संबंध में कहा गया है कि टोकेन प्रतिदिन जारी किए जाने हैं। कुल टोकन में 70 प्रतिशत टोकन ऐप के माध्यम से दिए जाएंगे।

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30 प्रतिशत टोकन कार्य समिति स्तर पर निपटाया जाएगा

30 प्रतिशत टोकन कार्य समिति स्तर पर निपटाया जाएगा। दूसरे जिलों से अवैध रूप से धान की आवक रोकने के लिए 9 चेकपोस्ट बनाए गए हैं। इन पर तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा एक जिला स्तरीय और 12 तहसील स्तरीय फ्लाइंग स्क्वॉड भी गठित किए गए हैं। कोरबा जिले में धान खरीद के लिए प्रशासन पहले भी बैठक कर चुका है। आज की बैठक में सभी आवश्यक तैयारियों को पूरा किए जाने के सिलसिले में सवाल उठाए गए। आज की खास बैठक कलेक्टर कुणाल दुदावत के साथ खाद्य सचिव रीना कंगाले की अध्यक्षता में हुई है।

खाद्य सचिव रीना कंगाले ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के कलेक्टरों के साथ धान खरीदी की तैयारियों की समीक्षा की। जिले के सभी 73 धान उपार्जन केंद्रों में खरीदी के लिए जरूरी व्यवस्थाओं की जानकारी दी। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने सभी समितियों में मार्कफेड और मिलर्स के माध्यम से पर्याप्त मात्रा में नए और पुराने बारदाने पहुंचाए जाने का जिक्र किया है। इस बार ज्यादा ध्यान धान खरीदी में पारदर्शिता और निगरानी सुनिश्चित करने पर दिया जा रहा है। इसके लिए जिले के 3 उपार्जन केंद्रों को अति संवेदनशील बताया गया।

स्थानीय निगरानी समितियों का गठन कर इनको जिम्मेदारी दी

साथ ही 18 केंद्रों को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि पहले की तरह इनको चिन्हित किया गया है। यहां का इतिहास रहा है कि अनियमितता, एफआईआर तथा धान खरीदी, रकबे और पंजीयन में वृद्धि को लेकर शिकायतें अनगिनत हुआ करती थी। जिले के सभी 73 उपार्जन केंद्रों का जिक्र कर कहा कि नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। यहां पर 60 समितियों में स्थानीय निगरानी समितियों का गठन कर इनको जिम्मेदारी दी गई है। खरीदी व्यवस्था पर नजर रखी जाएगी। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होगी।

इसके लिए जिला कमांड एवं कंट्रोल सेंटर भी स्थापित किया गया है। नोडल अधिकारी अपर कलेक्टर को बनाया गया है। अभी तक यह कहा जा रहा है कि धान नहीं बेचने वाले किसान भी कृषक उन्नति योजना के लिए शर्तें थीं। इसका जिक्र समीक्षा बैठक में किया गया है। खाद्य सचिव ने बताया कि इस वर्ष कृषक उन्नति योजना के तहत पंजीकृत किसानों को आदान सहायता राशि धान विक्रय की मात्रा के बजाय धान के रकबे के आधार पर दी जाएगी। 

निर्धारित पात्रता के अनुसार सहायता राशि प्राप्त कर सकेगा

यह विशेष बात ही तो है कि किसान अपना धान नहीं बेचता है, तब भी वह निर्धारित पात्रता के अनुसार सहायता राशि प्राप्त कर सकेगा। इसको लेकर कुछ आपत्तियां शुरू हो गई हैं। जबकि धान बेचने वाले किसानों को समर्थन मूल्य के साथ अतिरिक्त राशि भी उनके बैंक खाते में अंतरित की जाएगी। अधिकारियों ने मीटिंग कर कहा है कि 15 जनवरी तक धान की विक्री होगी। जिले में धान खरीदी 15 नवंबर को शुरू कर दी जाएगी। यह 15 जनवरी 2027 तक चलेगी। किसानों के लिए 10 नवंबर से ‘तुहर टोकन’ ऐप के माध्यम से टोकन जारी किए जाएंगे।

यद्यपि किसान इस ऐप की सुविधा लेने के लिए जागरूकता बढ़ा रहे हैं। किसान 15 जनवरी तक धान विक्रय के लिए टोकन प्राप्त कर सकेंगे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान अपर कलेक्टर, खाद्य अधिकारी जीएस कंवर, उप पंजीयक, सीसीबी नोडल अधिकारी और जिला विपणन अधिकारी (डीएमओ) उपस्थित रहे।

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