कृषि विवि व IFFCO के बीच समझौता, 100 किसानों के खेत बनेंगे प्रयोगशाला

खबर सार :-

आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय एवं इफको के सहयोग से अब खेतों में उन्नतशील फसल तैयार की जाएंगी। इसमें विज्ञान केंद्रों की भूमिका भी रहेगी।
lucknow : खेती में तलाश रहे अपार संभावनाएं, खेतों में प्रयोग करेंगे वैज्ञानिक

खबर विस्तार : -

अयोध्या, खेती में अपार संभावनाएं हैं। बस यह हमारी पकड़ से दूर हैं। इन संभावनाओं को वैज्ञानिक तकनीकों के जरिए किसानों का भविष्य बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इनको खेतों तक पहुंचाकर खेती को अधिक टिकाऊ, लाभकारी एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए अब खेत को ही प्रयोशाला बना दिया  जाएगा। इसकी पहल शुरू कर दी गई है। शुरूआत में सौ खेतों को प्रयोगशाला बनाकर प्रयोग किया जाएगा। 

खेती सुधार की दिशा में उत्तर प्रदेश में कई प्रयास किए जा रहे हैं। इनमें काफी सफलताएं भी मिली हैं। इसी बीच अयोध्या के आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय एवं इफको ने भी किसान और सरकार की उम्मीदों को प्रबल बनाने के लिए कोशिशें करने की इच्छा जताई है। कृषि के क्षेत्र में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग को चिंताजनक बताया जा रहा है।

वैज्ञानिकों ने इस दिशा में प्रयास कर इसके उपयोग को कम करने के तरीके सुझाए हैं। साथ ही समन्वित एवं वैकल्पिक उर्वरकों के प्रयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंगलवार को एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इसके तहत ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी हुआ। इसके लिए कुलपति डॉ ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह का प्रयास सराहनीय रहा है। समझौते पर इफको, लखनऊ के उपमहाप्रबंधक (विपणन) डॉ. एस.के. सिंह एवं विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार डॉ. आर.बी. सिंह ने हस्ताक्षर किए। 

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दस विज्ञान केंद्र प्रयोग में किसानों को करेंगे पूरा सहयोग 

इस समझौते के अनुसार काम किया गया तो प्रथम चरण में विश्वविद्यालय के 10 चयनित कृषि विज्ञान केंद्रों को इसमें शामिल किया जा रहा है। साथ ही 100 किसानों के प्रक्षेत्रों पर नैनो उर्वरक, जैव उर्वरक एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों सहित अन्य वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग का प्रत्येक फसल सीजन में प्रदर्शन कराया जाएगा। किसानों की फसलों में उपयोग की जाने वाली उर्वरक का महत्व बताया जाएगा। इसका प्रयोग और उसकी मात्रा की भी जानकारी दी जाएगी। इनके उपयोग की विधि को जानने के लिए वैज्ञानिकों से संपर्क भी किया जा सकता है। इसका प्रशिक्षण बराबर मिलता रहेगा। सबसे ज्यादा जरूरत उर्वरक को कम करने की दिशा में प्रयोग करना होगा। नैनो तकनीक और उसके वैकल्पिक उर्वरक की जानकारी भी दी जाएगी। इनके बीच के अंतर और ज्यादा लाभकारी उर्वरक को प्रत्साहित किया जाएगा। 

नुकसानदायक उर्वरक के प्रति किया जाएगा जागरूक

साथ ही नुकसान वाली खाद के प्रति भी जागरूक किया जाएगा। इसके अंतर्गत फसल तैयार होने पर संबंधित प्रक्षेत्रों पर प्रक्षेत्र दिवस (फील्ड डे) का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें किसानों को प्रदर्शन के परिणामों से रूबरू कराया जाएगा। इस प्रयास को काफी महत्व दिया जा रहा है। कुलपति, इस पहल के जरिए किसानों तक आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों को पहुंचाने की दिशा का व्यवहारिक एवं कल्याणकारी प्रयास कर रहे हैं। इसलिए इस प्रयास की सराहना की जा रही है। किसान कल्याण की दिशा में इस समझौते से पूर्वांचल के किसानों को ज्यादा लाभ मिल सकता है। उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी के साथ ही खेती की लागत कम करने के लिए भी महत्वपूर्ण प्रयास किए जाएंगे। 

लाभकारी एवं पर्यावरण की अनुकूल परिस्थितियां तैयार होंगी

यह जानकारी भी काफी महत्व रखती है कि मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने तथा किसानों की आय में वृद्धि करने लिए खेती की लागत को कम करना समझ लिया जाए। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि वैज्ञानिक तकनीकों को खेतों तक पहुंचाकर खेती को अधिक टिकाऊ बनाया जाए। इससे लाभकारी एवं पर्यावरण की अनुकूल परिस्थितियां तैयार होंगी। इस अवसर पर कुलपति के ओ.एस.डी डॉ.जसवंत सिंह, कीट विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रुद्र प्रताप सिंह तथा निदेशक प्रशासन डॉ. सुशांत श्रीवास्तव, प्रशासनिक अधिकारी डॉ भूपेंद्र सिंह की उपस्थिति रही। 

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