14 हेक्टेयर भूमि पर बनेगा ग्वालियर में लैब, किसानों को मिलेगा बीमारी रहित आलू का बीज

खबर सार :-

एक किलो आलू के बीज से 400 किलो आलू की फसल तैयार करने में सफलता मिली है। वैज्ञानिकों के प्रयासों और आधुनिक  तकनीकी सुधार के परिणाम के चलते यह संभव हो सका है। आलू के किसानों के लिए यह बड़ी खुशी साबित हो सकती है।
ग्वालियर में बनेगा आलू टिश्यू कल्चर एवं एरोपोनिक लैब, स्थापना की अड़चनें कर लीं दूर

खबर विस्तार : -

ग्वालियर,  मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में आलू के उत्पादन को लेकर किसान परेशान रहा करते थे, लेकिन आलू टिश्यू कल्चर एवं एरोपोनिक तकनीक में मिली कामयाबी से किसानों की सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी। 
आधुनिक तकनीकी से आलू के उत्पादन में बढ़ोतरी की जा सकती है। यह बढ़ोतरी भी बड़े पैमाने पर होने का अनुमान है। पिछले साल किए गए परीक्षण और शोध का नतीजा भी सामने आ चुका है। इसके परिणाम काफी सफल रह है। इसमें 1 किलो आलू के बीज से ढाई सौ से 400 किलोग्राम तक का उत्पादन करने में सफलता मिली है। इस तकनीकी आलू उत्पादन में किसानों के लिए क्रांतिकारी बदलाव लाने में सफलता मिलेगी।

टिश्यू कल्चर एवं एरोपोनिक तकनीकी से आलू बीज तैयार किया गया था। इसकी उत्पादन क्षमता पारंपरिक बीज की तुलना में काफी ज्यादा है। यह राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर में परीक्षण के आधार पर सफल बनाया जा सका है। इसका परीक्षण पिछले वर्ष किया गया था। 

किसानों को अब दूसरे राज्यों से नहीं मंगाना होगा बीज

अब यह बीज किसानों के लिए उपलब्ध भी हो सका है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में आलू उत्पादन को लेकर काफी अच्छा माहौल तैयार हो रहा है। आधुनिक तकनीकी से जोड़ने और किसानों को बेहतर गुणवत्ता का बीज उपलब्ध कराने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पंजाबीपुरा-बेहटा, मुरार में 17 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित आलू टिश्यू कल्चर एवं एरोपोनिक लैब के निर्माण में आ रही बाधा दूर हो गई है। 17 करोड रुपए की लागत से प्रस्तावित आलू लैब का निर्माण कराया जाएगा। इसमें अभी तक कुछ रूकावट आ रही थी, अन्यथा यह पहले ही तैयार कर लिया जाता। इसके निर्माण में आ रही रुकावटें दूर कर ली गई हैं। 

पुलिस लगाकर खाली कराई गई परियोजना की पूरी भूमि

स्थानीय कलेक्टर रुचिका चौहान ने अपने प्रयासों से सोमवार को राजस्व विभाग की टीम को लगाकर लैब के लिए आवंटित कराई गई 14 हेक्टेयर भूमि से कब्जा हटवा दिया है। मशीनों की मदद से इस जमीन को समतल किया जा रहा है। एसडीएम नरेश गुप्ता ने टीम का नेतृत्व किया और उसके बाद संबंधित ठेकेदार को 15 दिन के भीतर पूरी जमीन पर बाउंड्री करने के लिए कहा गया है। माना जा रहा है कि उद्यानिकी विभाग के माध्यम से इस काम को पूरा किया जाएगा।  जिला प्रशासन ने इस परियोजना के तहत आवंटित कराई गई 14 हेक्टेयर भूमि आवंटित कराई थी, इसमें लोगों ने कब्जा कर रखा था। 

लैब वाली सरकारी जमीन पर कर रखा था लोगों ने कब्जा 

इसे अब खाली कर लिया गया है। सरकारी अस्तर पर प्रयास किया जा रहे हैं कि यहां लैब का निर्माण जल्दी से जल्दी कराया जा सके। अब इस परियोजना को आगे बढ़ाने में ग्वालियर संभाग की आलू उत्पादक किसानों के लिए काफी मदद मिलने की संभावना है। सहायक उद्यानिकी संचालक एमपीएस बुंदेला ने बताया कि इस लैब की स्थापना से ग्वालियर संभाग के हजारों आलू उत्पादक किसानों को बीमारी रहित और उच्च गुणवत्ता वाली उन्नत प्रजातियों का बीज उपलब्ध हो सकेगा। ग्वालियर संभाग के हजारों किसानों को इसका फायदा मिलने लगेगा अभी तक किसानों को उन्नतशील बीज उपलब्ध नहीं हो पता था। 

किसानों को दिया जाएगा उच्च गुणवत्ता वाला उन्नत प्रजातियों का बीज 

बीमारी रहित और उच्च गुणवत्ता वाली उन्नत प्रजातियां का बीज यहां से किसानों को दिया जाएगा। वर्तमान में मध्य प्रदेश के किसानों को उन्नत आलू बीज के लिए पंजाब में निर्भर रहना पड़ता है, लेकिन अब लैब का काम शुरू होते ही यह निर्भरता रुक जाएगी। टिश्यू कल्चर एवं एरोपोनिक तकनीक से तैयार आलू बीज की उत्पादन क्षमता पारंपरिक बीज की तुलना में कई गुना अधिक है। कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर सोमवार को राजस्व विभाग की टीम ने लैब के लिए आवंटित 14 हेक्टेयर भूमि से मशीनों की मदद से अतिक्रमण हटवा दिया। 

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