मप्र की एकीकृत मत्स्य उत्पादन नीति-2026 अत्यंत सराहनीय पहल: राजीव रंजन सिंह
खबर सार :-
मध्य प्रदेश के भोपाल में देश-विदेश से आए फिशरीज़ एक्सपोर्टर्स और बायर्स-सेलर्स द्वारा इन्वेस्टमेंट एक्सटेंशन, बिजनेस और एक्सपोर्ट बढ़ाने पर चर्चा की गई। यहां इस बात पर मंथन किया गया कि किसानों की आय दोगुना के लिए किसान आगे कैसे लाए जाएं? जबकि सरकार की कई योजनाएं चल रही हैं।
खबर विस्तार : -
भोपाल, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में शुक्रवार को राष्ट्रीय फिशरीज इन्वेस्टर्स एंड एक्सपोर्टर्स कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन किया गया। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह और केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज राज्यमंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल के साथ इस कॉन्क्लेव का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया।
केंद्रीय पंचायती राज, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने एकीकृत मत्स्य उत्पादन नीति-2026 पर अपने विचार व्यक्त किए। नीति की सराहना करते हुए कहा कि यह सफलता मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रतिबद्धता के कारण है। इनलैंड स्टेट्स में मत्स्य निर्यात का नेतृत्व करने जैसी क्षमता देने की इच्छा जताई। कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में उन्होंने मत्स्य पालक, निवेशक और निर्यातकों के साथ होकर खुशी का इजहार किया।
बता दें कि कभी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मछुआ कल्याण और सामाजिक सशक्तीकरण के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत की थी। भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश है। यह बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में देश में मत्स्य उत्पादन मात्र 95.7 लाख टन था। 11 साल प्रयास किए गए और अब यह 106 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 198 लाख टन पर हैं।
यह भी पढ़ेंः हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से त्राहिमाम, कई जिलों में छाया अंधेरा, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग
खेती के साथ कर सकतें हैं और काम
केन्द्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल भी कार्यक्रम में पहुंचे हुए थे। उन्होंने बताया कि किसानों की आय को दोगुना करने का प्रयास चल रहा है। मत्स्य पालन, पशुपालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन को भी खेती के साथ जोड़ना हित में है। किसान आय के लिए फूलों की खेती, औषधीय खेती और जैविक खेती के जरिए ज्यादा लाभ पा सकते है। उन्होंने का कि मध्यप्रदेश में नर्मदा, शिप्रा जैसी नदियां, जलाशय और डैम हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने मत्स्य संपदा योजना की शुरुआत की है। इनको पालकर कमाई बढाने पर विचार कर सकते हैं।
यदि किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा तो देश मजबूत होगा। देश ने एनीमल हसबेंड्री, फिशरीज और डेयरी सेक्टर में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। कॉन्क्लेव में अतिथियों द्वारा मध्य प्रदेश मत्स्य पालन निवेश एवं निर्यात मार्गदर्शिका 2026 के अलावा एक्सपोर्ट पोर्टल की एसओपी का विमोचन किया गया। रायसेन जिले के बारना जलाशय में मध्य प्रदेश में पहली बार निजी निवेश और सहभागिता (पीपीपी मोड) से स्थापित 500 केज कल्चर का शुभारंभ भी इसी दौरान किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा. हमारा पूरा सहयोग रहेगा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से कहा कि नई एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 का आप लाभ लेने के लिए आगे आएं। जहां जरूरत होगी हम आपके सा हैं। योजना के बारे में बताया कि यह प्रावधान किया है कि प्रदेश का मत्स्य उत्पादन हम जल्द से जल्द दोगुना कर देंगे। लेकिन इसके लिए किसान को आना चाहिए। सरकार आपके दो गुना आय के लिए प्रयत्न कर रही है। मत्स्य उत्पादकों, विक्रेताओं, मत्स्य परिवहनकर्ताओं और सभी मत्स्यपालकों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। यह नीली क्रांति एमपी में लाने के लिए पूरी कोशिश की जा रही है। मप्र की जल सम्पदा को निवेश, नवाचार और निर्यात से जोड़ा जाएगा।
इससे प्रदेश को मत्स्य पालन के मामले में देश का अग्रणी केन्द्र बनाने में कामयाबी मिलेगी। मध्यप्रदेश में जल की कमी नहीं है। मध्य प्रदेश को नदियों का मायका कहा जाता है। प्रदेश में नदियों की बड़ी जल संरचनाएं भी हैं। इन उपलब्ध जल स्रोतों को कई कार्याें में उपयोग किया जाएगा। किसानों और मत्स्य पालकों दोनों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए राज्य सरकार इस दिशा में ठोस काम कर रही है। नई नीति के अतंर्गत प्रदेश में 1 लाख नए केज़ कल्चर स्थापित करने का लक्ष्य है। इस बार वन क्षेत्रों में भी बड़े तालाब निर्मित करने का इरादा है। यदि सब ठीक रहा तो मत्स्य पालन उद्योग को फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के साथ जोड़ने की तैयारी चल रही है। इसकी पैकेजिंग, मार्केटिंग संबंधी गतिविधियों से किसानों का ही फायदा होगा। छोटे उद्योग भी लगाए जा सकते हैं।
यह भी पढ़ेंः दिल्ली के कई स्कूलों को फिर मिली बम से उड़ाने की धमकी, पुलिस और फायर ब्रिगेड अलर्ट
अन्य प्रमुख खबरें
-
बिहार के सहरसा की अनोखी खेती: गन्ने के साथ आलू और हल्दी का समागम
2026-10-23
-
कृषि क्षेत्र में बनाई जा रही हैं ठोस रणनीतियां, वैज्ञानिक और अधिकारी निकालेंगे हल
2026-10-22
-
वैज्ञानिक खेती से पैदावार और मुनाफे में अंतर दिखाएंगी मॉडल फार्मः महेंद्र सिंह तंवर
2026-10-21
-
Kaithal ;किसानों ने सरकार को चेतावनी दी: 150 रुपये से कम कुछ भी मंजूर नहीं
2026-10-21
-
किसानों की समस्याओं पर ध्यान देगी सरकार, वेबसाइटों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे
2026-10-19
-
farmers को सरकार कर रही मदद, धान के बदले पसंद कर रहे दूसरी crops
2026-10-17
-
चमोली की कीवी अब दिल्ली के बाजारों में, 200 क्विंटल खेप रवाना
2026-10-17
-
कैंथल में सरकारी प्लानः मंडी में सड़ रहा paddy, नुकसान उठाए किसान
2026-10-15
-
अवसरों का लाभ लेने को तैयार हैं महिलाएं, फसल देसी हो या हो विदेशी
2026-10-15
-
modern होगा किसान मेला, Solar से चलेगा थ्रेशर
2026-10-14
-
किसानों तक लाभ पहुंचाएंगे योजना अधिकारी, समय में काम निपटाने के निर्देश
2026-10-13
-
दो गुनी आय के लिए मददगार होगा खेतों में भरा पानी, रांठ में खेतों में बना रहे तालाब
2026-10-13
-
गुजरात में दमन-गंगा नदी पर जल्द बनेगा बैराज, सिंचाई को होगा फायदा
2026-10-12
-
धन मिलते ही खर्च का ब्योरा तैयार, बीज और खाद का बजट भी जारी
2026-10-11
-
उद्यानिकी योजनाओं से खेती को मिला नया विस्तार, परिवार की आर्थिक स्थिति हुई मजबूत
2026-10-10