आधुनिक खेती से संवर रहा परिवार का भविष्य, खेतों में उगाई नगदी फसल
खबर सार :-
किसानों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की शासकीय सहायताओं को धन्यवाद कहा है। उनकी मेहनत के बेहतर परिणाम मिलने लगे हैं। अच्छी खेती हो रही है। सरकार मदद दे रही है। जरूरत है कि और लोग इसका फायदा उठाएं।
खबर विस्तार : -
कोरबा, सीमित सिंचाई सुविधाओं और पारंपरिक कृषि पद्धतियों के कारण खेती के अवसर सीमित ही रहते हैं। यदि किसान अपनी आय बढ़ाने के लिए अवसर तलाश रहा है तो जल्दबाजी नहीं करना चाहिए। आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत पौध सामग्री और आवश्यक उपकरणों तक पहुंच बनाने के लिए कुछ इंतजार करना चाहिए। इससे किसानों को नई संभावनाएं मिल जाती हैं। जरूरी नहीं कि कृषि विभाग से ही काम हो पाए, उद्यानिकी विभाग द्वारा राष्ट्रीय बागवानी मिशन एवं राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के माध्यम से अनुदान अनुदान लेकर फसल और लाभ ले सकते हैं।
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खुद धान की फसल से बाहर नहीं आ पा रहे थे
कुछ किसानों ने अच्छा काम किया है। इनमें कोरबा जिले के कटघोरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम कुमगरी निवासी किसान सुमरन सिंह कंवर की प्रशंसा जितनी भी की जाए कम है। यह कई किसानों के लिए खुद तकनीकी बन गए हैं। इनके कारण आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने से महत्वपूर्ण बदलाव आया है। यह खुद धान की फसल से बाहर नहीं आ पा रहे थे। धान की केवल एक फसल लेते थे। सिंचाई सुविधाओं, तकनीकी जानकारी और आधुनिक संसाधनों की कमी के कारण उत्पादन सीमित रहता था।
शुरूआत में इन्होंने ज्यादा लाभ के लिए किसान वैज्ञानिकों से सलाह ली। खुद काफी रिसर्च किया। समय के साथ चले और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए नई तकनीकों को अपनाया। उद्यानिकी विभाग की योजनाओं का लाभ लेकर अपनी कृषि गतिविधियों का विस्तार किया। वर्ष 2025-26 में योजनाओं की झड़ी लगी रही। इसी में पोल फेंसिंग, पावर स्प्रेयर और ग्राफ्टेड बैंगन पौधों के लिए 24 हजार रुपये का अनुदान मिला। लेकिन इसे ईमानदारी से काम पर लगाया।
अब वे धान के साथ मौसमी सब्जियों की खेती भी कर रहे हैं। पहले जहो एक फसल होती थी वहीं वर्ष में तीन फसलें ले रहे हैं। इससे उत्पादन एवं फसलों की गुणवत्ता में सुधार आया है। मिट्टी की भी सेहत सुधर रही है। फसल चक्र का बराबर ध्यान दिया जा रहा है। सरकारी गोष्ठियों में भी जाते हैैं।
अच्छे बीज और अच्छी फसल का चयन किया
इसी तरह से योजनाओं का लाभ लिया। अच्छे बीज और अच्छी फसल का चयन किया। खेत को बराबर ध्यान में रखा। सबसे जरूरी था कि उनकी वार्षिक आय बढ़कर लगभग 2.20 लाख रुपये हो गई है। खेती से होने वाली बेहतर आमदनी का लाभ परिवार के जीवन में भी दिखाई देने लगा है। यह सब खेत पर निर्भर हो गया। वैज्ञानिकों को खेत की परिस्थिति बताई तो उन्होंने मिट्टी सुधार के तरीके बताए्। इनमें हमने अपने लाभ वाला ले लिया।
पहले केवल धान की खेती करता था। सिंचाई और आधुनिक साधनों की कमी के कारण आमदनी सीमित रहती थी। उद्यानिकी विभाग की योजनाओं से सहायता मिलने के बाद मैंने खेती में नए तरीके अपनाएं और धान के साथ सब्जियों का उत्पादन शुरू किया। विभाग ने समझाया कि एक ही फसल बारबार लेते रहे तो आपके खेत में एक दिन फसल होनी बंद हो जाएगी। तभी से मैं फसलें बदल कर बोता हूं। जिन किसानों ने परंपराएं बदलीं, उनकी आमदनी बढ़ी और जिंदगी खुशहाल हो गई। खेती के काम से दूसरों को राजगार भी मिला।
अन्य किसान भी आधुनिक तकनीक अपनाएं
किसानों का कहना है कि मैं चाहता हूं कि गांव के अन्य किसान भी आधुनिक तकनीकों को अपनाएं। वह उनको सहयोग देने के लिए तैयार हैं। लाभार्थी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित योजनाओं का लाभ मिल रहा है। पहले भी योजनाएं होती थीं? पता नहीं चल पाता है। इस बार तो एक ही जगह के कई किसानोें को इसका लाभ मिला है।
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