गुजरात के वलसाड में 549 हेक्टेयर जमीन को मिलेगा सिंचाई का पानी, 159.50 करोड़ रुपये से जल्द बनेगा बैराज

खबर सार :-

गुजरात के वलसाड जिले के लोगों को सिंचाई के साथ-साथ पीने के लिए भी पानी भरपूर रूप से उपलब्ध होगा। वापी के पास दमन-गंगा नदी पर 159.50 करोड़ रुपये से बैराज परियोजना शुरू होने वाली है।
गुजरात में दमन-गंगा नदी पर जल्द बनेगा बैराज, सिंचाई को होगा फायदा

खबर विस्तार : -

गांधीनगर: गुजरात के वलसाड जिले के निवासियों के लिए एक अहम खबर है। वापी के पास दमन-गंगा नदी पर ₹159.50 करोड़ की लागत वाली एक बैराज परियोजना जल्द ही शुरू होने वाली है। उम्मीद है कि इस परियोजना से जिले में सिंचाई, भूजल रिचार्ज और जल सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा। वलसाड जिले के वापी तालुका में नामधा गांव के पास दमन-गंगा नदी पर स्थित दमन-गंगा बैराज के लिए एक इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) परियोजना शुरू की गई है। प्रस्तावित बैराज मौजूदा वापी वियर (weir) से लगभग 3 किलोमीटर नीचे की ओर (downstream) स्थित होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का लक्ष्य सभी के लिए पीने और सिंचाई के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना और साथ ही भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखना है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में इस परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। पूरा होने पर परियोजना की कुल भंडारण क्षमता 5.49 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) और कैचमेंट एरिया 2,250.73 वर्ग किलोमीटर होगा। वापी के पास प्रस्तावित दमन-गंगा बैराज से कई लाभ मिलने की उम्मीद है, जिनमें सिंचाई और भूजल रिचार्ज से लेकर पीने के पानी की बेहतर उपलब्धता, खारेपन पर नियंत्रण और सामाजिक-आर्थिक विकास शामिल हैं।

549 हेक्टेयर जमीन की हो सकेगी सिंचाई

इस परियोजना का एक मुख्य लाभ सिंचाई होगा। उम्मीद है कि बैराज से लगभग 549 हेक्टेयर जमीन के लिए सिंचाई की क्षमता पैदा होगी और जमा पानी लिफ्ट सिंचाई के जरिए किसानों तक पहुंचाया जाएगा। इस पहल से छह गांवों नामधा, चंदोर, मोहन, एकलहारे, नहुली और जांबुरी को लाभ होगा। यह परियोजना प्रेशराइज़्ड सिंचाई प्रणालियों के माध्यम से वर्तमान में बिना सिंचाई वाली कृषि भूमि के एक बड़े हिस्से को तत्काल लाभ प्रदान कर सकती है।

किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद

खेतों के लिए सिंचाई सुविधाओं की उपलब्धता से किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है। सिंचाई के पानी की भरोसेमंद और साल भर उपलब्धता किसानों को सालाना दो या उससे अधिक फसलें उगाने में सक्षम बनाएगी, जिससे उनकी आर्थिक समृद्धि में योगदान मिलेगा। यह बैराज वापी और उसके आस-पास के इलाकों में औद्योगिक और नगरपालिका की जरूरतों के लिए पानी की उपलब्धता को भी बढ़ाएगा। 2024-25 के डेटा से पता चलता है कि वापी वियर ने GIDC वापी को औद्योगिक इस्तेमाल के लिए 19 MCM पानी, सामान्य जलापूर्ति के लिए 7.30 MCM और वापी नगर निगम को 6 MCM पानी की सप्लाई की, जिससे कुल ₹69.15 करोड़ का रेवेन्यू मिला। प्रस्तावित बैराज से बनने वाली अतिरिक्त स्टोरेज क्षमता खेती के अलावा पानी की बढ़ती जरूरतों को पूरा कर सकती है और नगर निकाय के लिए और रेवेन्यू पैदा कर सकती है।

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ग्राउंडवाटर रिचार्ज में भी मिलेगा फायदा

इस प्रोजेक्ट का एक और बड़ा फायदा ग्राउंडवाटर रिचार्ज होगा। यह प्रोजेक्ट बैराज के अपस्ट्रीम में लगभग 3.5 किलोमीटर का पानी जमा करने का इलाका बनाएगा, जिससे वापी शहर में मौजूद ट्यूबवेल को रिचार्ज करने में मदद मिलेगी। इससे ग्राउंडवाटर की क्वालिटी और मिट्टी की स्थिति में सुधार हो सकता है, घरेलू इस्तेमाल के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ सकती है और वापी के भविष्य के विकास में मदद मिल सकती है। बैराज को ज्वारीय पानी को कंट्रोल करने और नदी के तल में खारे पानी को घुसने से रोकने के लिए भी डिजाइन किया गया है, जिससे जलाशय के आस-पास ग्राउंडवाटर रिचार्ज में मदद मिलेगी।

2.3 लाख लोगों के लिए साफ पानी की सुविधा

यह प्रोजेक्ट वापी के लिए कई बड़े फायदे देता है। इनमें लगभग 2.3 लाख लोगों के लिए पीने के पानी की बेहतर सुविधाएं, पार्क और बोटिंग एरिया जैसी मनोरंजन की जगहें, रिवरफ्रंट का विकास और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए नदी के पार एक नया रोड कॉरिडोर शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट से पर्यावरण और सामाजिक-आर्थिक फायदे जैसे- ज्वारीय असर में कमी, पानी की स्थिति में सुधार और पर्यटन व रोजगार के ज्यादा मौके मिलने की उम्मीद है,। उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट ज्यादा स्थानीय रोजगार के मौके पैदा करके मौसमी पलायन को कम करेगा और क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी योगदान देगा।

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