महिला किसानों को आधुनिक खेती का मंत्र, 5000 किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य

खबर सार :-

पुरुषों की तरह महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं। उनके लिए यह मायने नहीं रखता है कि क्षेत्र कौन सा हो, विश्वास है कि वह अपने परिश्रम के बल पर हुनर भी सीख जाएंगी। किशनगढ़ महिला किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से एक आयोजन किया गया।
अवसरों का लाभ लेने को तैयार हैं महिलाएं, फसल देसी हो या हो विदेशी

खबर विस्तार : -

किशनगंज,  गुरुवार को खगड़ा स्थित सम्राट अशोक भवन में जिला स्तरीय वसंतिक रबी प्रशिक्षण साल 2026 का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष एवं महिला किसान दिवस के अवसर पर महत्वपूर्ण बातें बताई गईं। इस कार्यक्रम का उद्घाटन जिलाधिकारी नवीन कुमार ने किया। उन्होंने दीप जलाते हुए कहा कि हम अपनी परंपराओं का निर्वहन कर रहे हैं। कार्यशाला में महिला किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक की जानकारी दी गई।

 प्राकृतिक खेती विधि, कारण और सरकारी योजनाओं की जानकारियां दी। कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी ने प्राइवेट बिजली एजेंसी प्रोग्राम के अंतर्गत चिन्हित गांव की 5000 किसानों को संबंधित खेती से जोड़ने के लिए कहा है। यह खेती पारंपरिक तरीके से की जाएगी। इसमें जो दशकों पहले परंपराएं अपनाते थे, वही फसलें ज्यादातर उगाई जाएंगी। 

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जीवामृत, घनजीवामृत और बीजामृत पर जोर 

 इसमें जनजातीय महिला किसानों को प्राथमिकता देने तथा उन्हें जीवामृत, घनजीवामृत और बीजामृत तैयार करने एवं उपयोग करने का प्रशिक्षण देने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों तथा निर्भरता कम करना है। आज वर्तमान में लोग रसायन डालकर खेती को खराब कर देते हैं। पोषक तत्व मर जाते हैं और उत्पादन पर कई बार बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए इसके अलग तरीके बताए जाएंगे। इसका उद्देश्य रसायन को कम करना है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के तरीके भी बताए जाएंगे। डीएम ने संबंधित अधिकारियों को सीमावर्ती क्षेत्र में महिला किसानों को जोड़ने एवं कृषि उद्यान विभाग की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए कहा है। यह लाभ यूं ही नहीं, बल्कि खेती के जरिए उठाया जा सकता है। किसानों को अच्छे बीज मिलेंगे। बाजार मिलेगा और सुविधाएं दी जाएंगी। कार्यशाला में महिला किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक की जानकारी दी गई। 

महिला किसानों को उद्यान विभाग की जानकारियां दें 

जिलाधिकारी ने वाइब्रेट विजिलेंस प्रोग्राम के अंतर्गत चिन्हित गांव में किसानों को पारंपरिक एवं प्राकृतिक खेती से जोड़ने के लिए कहा है। रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा है कि संबंधित अधिकारियों को सीमावर्ती क्षेत्रों में महिला किसानों तथा कृषि एवं उद्यान विभाग की योजनाओं से जोड़ने की पहल करें। बहुउद्देशीय खेती के माध्यम से कम भूमि में अधिक उत्पादन तथा ड्रैगन फूड अनानास, चाय जैसी लाभकारी फसलों की खेती को प्रोत्साहन करने पर जोर दिया गया।

कार्यशाला में जीरो टिलेज, सीड ड्रिल, जलवायु अनुकूल कृषि, मोटे अनाज, रबी मक्का, पॉपकॉर्न, बेबी कॉर्न, स्वीट कॉर्न, दलहन और रबी प्याज की वैज्ञानिक खेती की जानकारी दी गई। किसानों को मिट्टी जांच, संतुलित उर्वरक उपयोग, पौधा संरक्षण, जैविक खेती और कृषि में ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल के बारे में भी बताया गया।

जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा

 इसकी भी जानकारी कार्यशाला में दी गई। कृषि पदाधिकारी ने स्वीट कॉर्न बेबी कॉर्न दलहनी तिलहनी फसलों के साथ बी अनुदानित दर पर उपलब्ध कराने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह सब प्राप्त हो रहा है। प्राकृतिक खेती मिशन की अंतर्गत 2026-27 में तीन कलिस्टो का चयन किया गया है। वहीं परंपरागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत दिघल बैंक प्रखंड की पांच योजनाओं पंचायत में 500 हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन फसलो  में स्वीट कॉर्न, बेबी कॉर्न, पॉपकॉर्न काफी पसंदीदा फसलें हैं। साथ ही दलहनी-तिलहनी फसलों के बीज अनुदानित दर पर उपलब्ध कराने का प्लान है। वाइब्रेंट विलेजेज के महिला किसानों को सात प्रकार की सब्जियों के बीज और वर्मी कम्पोस्ट भी दिए गए। कार्यशाला में कृषि एवं संबंधित विभागों के पदाधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों और बड़ी संख्या में महिला-पुरुष किसानों ने भाग लिया।

किसानों को बताएं आधुनिक प्राकृतिक खेती 

किसान यह जानकारी पहले ही पा लेते तो उनके लिए काफी अच्छा था। कारण है कि श्रीअन्न हमारे देश में हमेशा उत्पादित किया जाता रहा है। वर्तमान में सरकार अपनी योजनाओं के अंतर्गत इसका उत्पादन करवा रही है। वह खुद उन्नतशील बीज मुहैया कराएगी और किसान को टारगेट पर फसल देना होता है। जो फसल तैयार की जाएगी,उनके लिए बाजार उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किसान को ज्यादा दूर भी नहीे जाना है। स्थानीय स्तर पर वह समाधान निकाल लेंगें।

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