एक जगह पर गेहूं बोएंगे दो किसानः एक करेगा आधुनिक तो दूसरा अपनाएगा पारंपरिक तकनीक

खबर सार :-

किसानों की समस्याओं पर सरकार बराबर ध्यान दे रही है। लेकिन उनको अधिक लाभ वाली फसल समझ नहीं आ रही हैं। इसीलिए किसान और फसल का तुलनात्मक अध्ययन कराया जाएगा।
वैज्ञानिक खेती से पैदावार और मुनाफे में अंतर दिखाएंगी मॉडल फार्मः महेंद्र सिंह तंवर

खबर विस्तार : -

कानपुर, किसानों को वैज्ञानिक खेती के फायदे दिखाए जाएंगे। इसके लिए जिले में दो मॉडल फार्म विकसित किए जाएंगे। इन फार्मों के जरिए पारंपरिक और वैज्ञानिक खेती में तुलना की जाएगा। इसके साथ ही किसानों को नकदी फसलों से होने वाली आय की जानकारी भी दी जाएगी।

विकास भवन में बुधवार को किसान दिवस का आयोजन किया गया था। इस मौके पर कानपुर के जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने कई सुझाव दिए। उन्होंने अधिकारियों को मॉडल फार्म स्थापित करने के लिए कहा है। उनका सुझाव है कि उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति में रूकावट नहीं आने दी जाए। किसानों की खेती उर्वरक के बिना प्रभावित होती है। 

वैज्ञानिक तकनीक से खेती की जाएगी

एक खेत को दो बराबर हिस्सों में बांटा जाएगा। एक हिस्से में पारंपरिक तरीके से खेती होगी, जबकि दूसरे हिस्से में वैज्ञानिक तकनीकों से खेती की जाएगी। मॉडल फार्म में गेहूं की खेती के नए और पुराने तरीके के नफा नुकसान का अध्ययन कराया जाएगा। फसल तैयार होने पर दोनों हिस्सों से मिली पैदावार की तुलना की जाएगी।

इससे स्पष्ट हो जाएगा कि किसानों को वैज्ञानिक खेती के फायदों अच्छे हैं या परंपरिक यानी पुरानी व्यवस्था में। दूसरे मॉडल फार्म में जमीन के एक हिस्से पर पारंपरिक फसलें उगाई जाएंगी। बाकी हिस्से में मौसमी सब्जियां उगाई जाएंगी। जरूरत के अनुसार, फूल और अन्य नकदी फसलें लगाई जाएंगी। इस फार्म में मशरूम की खेती भी की जाएगी। मछली पालन और बत्तख पालन किया जाएगा। यह सब उपलब्ध संसाधनों के आधार पर किया जा सकता है। 

मुनाफा वाली फसल नहीं पकड़ पा रहे किसान

गतिविधियों के अनुसार, होने वाले खर्च, पैदावार और शुद्ध आय का आकलन किया जाएगा। इससे  पता चल सकेगा कि किसान की सोच कितनी कारगर रही है। उसकी सोच में मुनाफा वाली फसल मिली या नुकसान वली। जिले में यूरिया, डीएपी और एनपीके की पर्याप्त आपूर्ति की जा रही है। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने यह जिम्मेदारी जिला कृषि अधिकारी को दी है।

उर्वरकों की खेप सहकारी समितियों तक तुरंत पहुंचाने के लिए डीएम ने जिम्मेदारी दे रखी है। यह व्यवस्था पिछली से भिन्न है। इस बार स्टॉक के स्तर और वितरण की निगरानी रोज करने को कहा गया है। किसान की समस्या सुनने के लिए अधिकारी मुकर्रर हैं। इससे उर्वरकों से जुड़ी शिकायतों का तुरंत समाधान करने किया जा सकेगा। इसीलिए एक कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। जिले के लिए अधिकतम 100 मीट्रिक टन का बफर स्टॉक रखने का निर्देश दिया गया है। 

दाम की निगरानी करेंगे अधिकारी 

निर्धारित दाम से ज्यादा पर उर्वरकों को बेचने पर कार्रवाई की जाएगी। तय कीमतों से अधिक पर किसानों को खाद नहीं लेना है। इसके साथ ही अन्य उत्पाद खरीदने का दबाव डालने वाले पर कार्रवाई के निर्देश डीएम दे चुके हैं। किसान दिवस कार्यक्रम के दौरान, चंद्र शेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने खेती के उन्नत तरीकों के बारे में जानकारी दी।

इस आयोजन के दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों की भी मौजूदगी रही है। उन्होंने भी किसानों को मौजूदा सरकारी योजनाओं और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी दी। इस कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन, कृषि उपनिदेशक डॉ. आर. एस. वर्मा, जिला कृषि अधिकारी अरुणेश सिंह और जिला उद्यान अधिकारी नरेश कुमार उत्तम के अलावा कई किसान और वैज्ञानिक उपस्थित रहे। 

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