MP में पहली बार एग्रीस्टैक ID से हो रहा किसानों का सत्यापन, धान खरीद में बिचैलियों को रोकने में होगी मदद
खबर सार :-
मध्य प्रदेश में धान खरीद में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए पहली बार किसानों का सत्यापन एग्रीस्टैक आईडी के जरिए हो रहा है। वहीं, खरीद के लिए अब तक 6.80 लाख किसान रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं।
खबर विस्तार : -
भोपाल: मध्य प्रदेश में 2026-27 खरीफ मार्केटिंग सीजन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान, ज्वार और बाजरा की खरीद के लिए अब तक लगभग 6.80 लाख किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इस संख्या में 6.77 लाख धान उगाने वाले किसान और 13,000 मोटे अनाज उगाने वाले किसान शामिल हैं। इन रजिस्टर्ड किसानों के पास कुल 10.88 लाख हेक्टेयर जमीन है।
राज्य के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। मंत्री राजपूत ने पहले ही विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव रश्मि अरुण शमी को किसानों के रजिस्ट्रेशन के दौरान आने वाली तकनीकी समस्याओं को हल करने और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए जरूरी निर्देश दिए थे। शुक्रवार को, अतिरिक्त मुख्य सचिव रश्मि अरुण शमी ने जिला अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रजिस्ट्रेशन की स्थिति और तकनीकी समस्याओं की समीक्षा की। बैठक का मकसद तकनीकी समस्याओं को हल करना, किसानों के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को आसान बनाना और यह पक्का करना था कि प्रक्रिया तय समय सीमा के भीतर पूरी हो जाए। विभाग के अनुसार, किसानों के रजिस्ट्रेशन के लिए कई माध्यमों से सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। किसान 10 अक्टूबर, 2026 तक रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।
AgriStack ID के जरिए जमीन की जानकारी
बैठक में बताया गया कि इस साल पहली बार किसानों के रजिस्ट्रेशन के लिए AgriStack ID का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि यह पक्का किया जा सके कि धान और मोटे अनाज की खरीद असली किसानों से MSP पर हो। इस ID से किसान की जमीन के विवरण का सत्यापन किया जा सकता है। यह कदम रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाएगा और रजिस्ट्रेशन सेंटरों पर ऑपरेटरों द्वारा एक किसान की जमीन का विवरण दूसरे किसान के रजिस्ट्रेशन में जोड़ने जैसी अनधिकृत गतिविधियों को रोकने में मदद करेगा। साथ ही, यह खरीद प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका को खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
AgriStack ID बनाने की सुविधा
जमीन के मालिक किसानों के लिए AgriStack ID बनाने की सुविधा पटवारियों, सहायकों, कॉमन सर्विस सेंटर्स (CSCs) और 'फार्मर रजिस्ट्री सेल्फ ऐप' के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है। AgriStack ID में किसान से जुड़ी सभी खसरा (जमीन के टुकड़े) जानकारियों का रिकॉर्ड रखा जाता है। अगर कोई खसरा पहले रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया गया था, तो उसे जोड़ने की सुविधा भी मौजूद है।
डिजिटल फसल सर्वेक्षण प्रणाली में बदलाव नहीं
किसान की जमीन पर बोई गई फसलों की जानकारी इकट्ठा करने के लिए डिजिटल फसल सर्वेक्षण की प्रणाली पिछले साल जैसी ही रहेगी। हालांकि, रेवेन्यू लीज, फॉरेस्ट लीज़ या मंदिरों और ट्रस्टों की जमीन के रजिस्ट्रेशन के लिए AgriStack ID जरूरी नहीं है। ऐसी जमीन के टुकड़ों का रजिस्ट्रेशन मौजूदा प्रक्रिया का पालन करते हुए रजिस्ट्रेशन सेंटर्स या DSO लॉगिन के जरिए किया जा सकता है।
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आधार नंबर का वेरिफिकेशन जरूरी
रजिस्ट्रेशन और फसल बेचने के लिए आधार नंबर का वेरिफिकेशन जरूरी है। यह वेरिफिकेशन आधार नंबर से जुड़े मोबाइल नंबर पर भेजे गए OTP या बायोमेट्रिक डिवाइस के जरिए किया जा सकता है। किसान का रजिस्ट्रेशन तभी हो पाएगा जब जमीन के रिकॉर्ड (खासकर खाता और खसरा) में दर्ज नाम उनके आधार कार्ड पर लिखे नाम से मेल खाएगा। अगर जमीन के रिकॉर्ड और आधार कार्ड के नाम में कोई अंतर है, तो तहसील ऑफिस में रजिस्ट्रेशन का वेरिफिकेशन करवाना होगा; ऐसे वेरिफिकेशन के बाद ही रजिस्ट्रेशन को सही माना जाएगा।
आधार सेंटर चालू रखने के निर्देश
सभी जिला कलेक्टरों को यह पक्का करने का निर्देश दिया गया है कि जिला और तहसील स्तर पर बने आधार रजिस्ट्रेशन सेंटर चालू रहें, ताकि किसान आसानी से अपने मोबाइल नंबर और बायोमेट्रिक जानकारी अपडेट कर सकें। इस काम के लिए पोस्ट ऑफिस में चल रहे आधार सुविधा सेंटरों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। बैंक अकाउंट को आधार नंबर से जोड़ने के लिए बैंकों के साथ तालमेल बिठाना भी जरूरी है। किसान के आधार से जुड़े बैंक अकाउंट को वेरिफाई करने के लिए, रजिस्ट्रेशन प्रोसेस के दौरान ही मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन द्वारा e-Uparjan/JIT पोर्टल के जरिए एक रुपये का ट्रांजैक्शन किया जाएगा।
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