हिमाचल में 9 अक्टूबर तक आंधी-तूफान के साथ बारिश का ‘येलो अलर्ट’, 40 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

खबर सार :-

हिमाचल प्रदेश में मौसम सिस्टम एक्टिव होने की वजह से कई इलाकों में ओलावृष्टि, तेज हवाओं के साथ आंधी आई। इससे फसलों को नुकसान पहुंचा। मौसम विभाग ने 9 अक्टूबर तक अलर्ट जारी किया है।
हिमाचल में ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान, 9 अक्टूबर तक बारिश का अलर्ट

खबर विस्तार : -

शिमला: वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के सक्रिय होने से हिमाचल प्रदेश में मौसम का मिजाज बदल गया है। मंगलवार रात और बुधवार को राज्य के कई हिस्सों में बारिश, ओलावृष्टि, तेज हवाएं और आंधी-तूफान जैसी स्थितियां बनी रहीं। तेज हवाओं के साथ हुई ओलावृष्टि से किन्नौर की चौरा और तरंडा पंचायतों में कटाई के लिए तैयार सब्जियों और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा है। राज्य के ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में हल्की बर्फबारी भी हुई, जिससे मौसम ठंडा हो गया है। आदिवासी इलाकों में न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया है।

कांगड़ा के पालमपुर में पिछले 24 घंटों में सबसे ज्यादा 82.2 मिमी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने 9 अक्टूबर तक कई जिलों में आंधी-तूफान, बिजली गिरने और बारिश के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया है। इस दौरान 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने की उम्मीद है, और हवा के झोंके 50 किमी/घंटा तक पहुंच सकते हैं। 10 से 13 अक्टूबर तक भी कुछ इलाकों में मौसम में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।

पालमपुर में 82.2 मिमी, सराहन में 28.7 मिमी बारिश

पालमपुर (कांगड़ा) में पिछले 24 घंटों में 82.2 मिमी बारिश हुई। बारिश के अन्य आंकड़ों में सराहन (शिमला जिला) में 28.7 मिमी, कोठी (कुल्लू) में 19 मिमी, भटियात (चंबा) में 18.3 मिमी, जोत (चंबा) में 17.8 मिमी और गुलेर (कांगड़ा) में 16.7 मिमी बारिश शामिल है। इस दौरान सुंदरनगर, भुंतर, शिमला, जुब्बरहट्टी, कांगड़ा, जोत और मुरारी देवी में आंधी-तूफान और बिजली गिरने की घटनाएं हुईं। पालमपुर और जोत में ओलावृष्टि भी हुई। पालमपुर में हवा की अधिकतम गति 56 किमी/घंटा दर्ज की गई। ताबो में हवा की गति 35 किमी/घंटा और नेरी में 24 किमी/घंटा तक पहुंच गई। बुधवार सुबह राजधानी शिमला समेत राज्य के कई हिस्सों में हल्की बारिश जारी है। मौसम में बदलाव के कारण राज्य का औसत न्यूनतम तापमान लगभग दो डिग्री सेल्सियस गिर गया है।

किन्नौर में ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान

मंगलवार शाम करीब 4:30 बजे किन्नौर जिले के प्रवेश द्वार पर स्थित चौरा और तरंडा पंचायतों में तेज हवाओं के साथ अचानक ओलावृष्टि हुई। कुछ ही देर में खेत और आसपास के रास्ते ओलों से ढक गए। ओलावृष्टि से खेतों में कटाई के लिए तैयार सब्जियां और अन्य फसलें क्षतिग्रस्त हो गईं। किसानों के अनुसार, ओलों की मार से खड़ी फसलें जमीन पर गिर गईं और कई जगहों पर फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं। पेड़ों और पौधों से बड़ी संख्या में पत्ते भी झड़ गए। ग्रामीणों ने बताया कि सर्दियों में पशुओं के चारे के लिए पेड़ों के पत्ते इकट्ठे करके रखे जाते हैं; ऐसे में इस नुकसान से पशु चारे की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। प्रभावित किसानों और ग्रामीणों ने प्रशासन और राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वे इलाके में हुए नुकसान का तुरंत आकलन करें और प्रभावित परिवारों को उचित सहायता प्रदान करें।

7 से 9 अक्टूबर तक विभिन्न जिलों के लिए येलो अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार, आज ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, सिरमौर और शिमला जिलों में तेज हवाओं, आंधी-तूफान, बिजली गिरने और बारिश को लेकर 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है। इस दौरान हवा की गति 30 से 40 किमी/घंटा हो सकती है और हवा के झोंके 50 किमी/घंटा तक पहुंच सकते हैं। विभिन्न स्थानों पर ऐसे हालात बने रहने की संभावना है। कल, 8 अक्टूबर के लिए भी कांगड़ा, मंडी, शिमला और सिरमौर जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में भी तेज हवाओं (30–40 किमी/घंटा), आंधी-तूफान, बिजली गिरने और बारिश की संभावना है। 9 अक्टूबर के लिए बिलासपुर, सोलन, शिमला और सिरमौर ज़िलों में 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है। इन इलाकों में बारिश और आंधी-तूफान के साथ 30-40 किमी/घंटा की रफ़्तार से हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग ने कुछ ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी की संभावना भी जताई है।

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13 अक्टूबर तक मौसम में बदलाव की संभावना

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 10 से 13 अक्टूबर के बीच राज्य के कुछ इलाकों में मौसम में बदलाव हो सकता है। इन चार दिनों के लिए अभी तक कोई खास मौसम चेतावनी जारी नहीं की गई है; हालांकि, पूर्वानुमान बताता है कि इस दौरान कुछ इलाकों में मौसम की अलग-अलग गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। अक्टूबर में बारिश से खेती और पर्यटन गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। राज्य के ज्यादातर सेब उत्पादक इलाकों में सेब का सीज़न अपने आखिरी दौर में है, जबकि किन्नौर में यह अभी शुरू ही होने वाला है। निचले इलाकों में मक्के की कटाई भी चल रही है। ऐसे में बारिश और तेज हवाओं से किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ सकती है। शिमला, मनाली और डलहौजी जैसी जगहों पर घूमने आने वाले पर्यटकों को भी खराब मौसम की वजह से परेशानी हो सकती है।

कुकुमसेरी में 2.9°C, शिमला में 14.5°C तापमान

मौसम में बदलाव के बीच, राज्य के ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड बढ़ गई है। राज्य में सबसे कम न्यूनतम तापमान कुकुमसेरी (लाहौल-स्पीति) में 2.9°C दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान केलंग में 3.7°C, ताबो में 4.9°C और कल्पा में 8°C रहा। मनाली में न्यूनतम तापमान 10.1 डिग्री सेल्सियस और शिमला में 14.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्हें सलाह दी गई है कि वे आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और खुली जगहों या पेड़ों के नीचे खड़े होने से परहेज करें।

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