कृषि भवन मेंं हुई बैठक में लिया गया निर्णय, कार्यालय से बाहर निकल कर करेंगे काम
खबर सार :-
उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने आज कृषि भवन में तीन प्रमुख विषयों पर विमर्श किया। इनमें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, राज्य कृषि विकास योजना विंड्स एवं विकसित उत्तर प्रदेश 2047 के कृषि रोडमैप की प्रगति शामिल रही। किसानों की मूल समस्याओं को लेकर चिंता भी जताई गई।
खबर विस्तार : -
लखनऊ, कृषि मंत्री ने वर्तमान में चलाई जा रही योजनाओं को किसानों तक पहुंचाने के लिए ज्यादा जोर दिया। वहीं संबंधित योजना अधिकारियों को वह कई बार निर्देश दे चुके हैं। आज फिर उन्होंने कहा है कि योजनाओं का लाभ किसानों तक पारदर्शी और समय से पहुंचाने के लिए वे कार्यालयों से बाहर निकलें।
उन्होंने कहा है कि जब तक स्वयं धरातल पर जाकर काम नहीं करेंगे, उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाएंगे। उन्होंने कहा कि स्वाभावित है कि समस्याएं सामने आती रहेंगी। सरकार का उद्देश्य हर योजना का लाभ सभी किसानों को मिले। प्रदेश के कृषि विकास को नई गति देने के लिए उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा मेहनत कर रहा है। इसमें कृषि मंत्री की मेहनत रंग भी ला रही है।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना तथा राज्य कृषि विकास योजना की वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया गया कि पीएम-आरकेवीवाई के समस्त घटकों के लिए 1364.01 करोड़ रुपये के केंद्रीय आवंटन के सापेक्ष राज्य सरकार द्वारा 680.32 करोड़ रुपये अवमुक्त किए गए हैं। किसानों की समस्या गन्ना को लेकर है। सरकार की ओर से गन्ना, बीज विकास निगम व शोध संस्थानों में व्यय की गति धीमी होने पर सुधार के निर्देश दिए गए।
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अनुकूल मौसम में करें यह खेती
मौसम की अनुकूलता एवं उचित नमी को देखते हुए किसानाों को तिलहन की उन्नतशील व शोधित किस्मों की बुवाई करनी चाहिए। इसमें पूसा सरसों-32, पूसा सरसों-34, पूसा डबल जीरो, सुरेखा, गिरिराज, वरुणा तथा नरेंद्र सरसों को अपनी पसंद बना सकते हैं। इसके साथ ही गन्ने की शीघ्र व मध्यम पकने वाली उच्च शर्करायुक्त प्रजातियों तथा आलू की अगेती किस्मों जैसे कुफरी बहार, कुफरी चंद्रमुखी, कुफरी ज्योति व कुफरी सूर्या की बुवाई में देर नहीं करें। मत्स्य पालकों को कहा गया है कि कतला, रोहू, नैन और ग्रास कार्प जैसी प्रजातियों का बीज उत्तर प्रदेश मत्स्य विकास निगम की हैचरियों पर उपलब्ध है। इनमें संपर्क कर आप अच्छे मत्स्य पालक बन सकते हैं।
यह महीना आपके लिए खेती योग्य
अगर आप किसान हैं और कम समय में अपनी फसलों से अच्छी कमाई शुरू करना चाहते हैं, तो अक्टूबर का यह महीना आपके लिए खेती योग्य है। इस समय का मौसम सब्जियों और हरी पत्तेदार फसलों के लिए सबसे बेहता माना जाता है। सबसे खास बात यह है कि कुछ फसलें तो बुवाई के करीब 30 से 35 दिन बाद ही कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं। इससे किसानों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता है। मूली, पालक, मेथी, धनिया और शलजम जैसी फसलें न सिर्फ बहुत जल्द तैयार होती हैं, बल्कि इस मौसम में बाजार में इनकी मांग भी बहुत तेज रहती है।
अक्टूबर का महीना मूली की खेती की शुरुआत करने के लिए बेहद सही समय है। मूली की कुछ अगेती हो या पिछैती लाभ देती है। यह समय जल्दी तैयार होने वाली किस्म बोने का है। इसलिए बताया जा रहा है कि समय रहते इसकी बुवाई कर दें। लगभग 30 से 40 दिन के भीतर उखाड़ने लायक हो जाती हैं। इसके लिए खेत की मिट्टी मुलायम बनाना होता है और हल्की नमी बनाने की जरूरत पड़ सकती है। इस समय बाजार में मूली आने लगी है। किसान ने काफी पहले ही इसे बो दिया था। किसानों को इसमें मुनाफा भी खूब मिला है।
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