UPCAR के 37वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में 27 को राष्ट्रीय संगोष्ठी, कृषि मंत्री शाही मुख्य अतिथि होंगे

खबर सार :-

UPCAR के 37वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में 27 को राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। इसमें कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही मुख्य अतिथि होंगे
कृषि क्षेत्र में बनाई जा रही हैं ठोस रणनीतियां, वैज्ञानिक और अधिकारी निकालेंगे हल

खबर विस्तार : -

लखनऊ, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के 37वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में 27 अक्टूबर, 2026 को आयोजित होने वाली एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी की रूपरेखा बताने और परिषद की अनुसंधान उपलब्धियों को उजागर करने के लिए गुरुवार को करियप्पा मार्ग, आलमबाग, लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई।

शुगरकेन रिसर्च सेंटर में आयोजित किया जाएगा कार्यक्रम

महानिदेशक डॉ. संजय सिंह ने कहा कि इस वर्ष की राष्ट्रीय संगोष्ठी का विषय “उत्पादकता से हटकर होगा। इसमें उत्तर प्रदेश में कृषि के भविष्य की नई परिकल्पना है। यह कार्यक्रम 27 अक्टूबर को रायबरेली रोड, लखनऊ स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ शुगरकेन रिसर्च सेंटर में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि फसल उत्पादन बढ़ाने से के अलावा भी अब सोचना है। हम एक जगह पर टिके नहीं रह सकते हैं। इसका लक्ष्य जलवायु-अनुकूल कृषि, डिजिटल तकनीक, फसल अवशेष प्रबंधन, प्राकृतिक खेती और किसान उत्पादक संगठनों को मजबूत कर लेंगे, तभी पूरा होगा।

किसानों की आय के लिए काफी प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन टिकाऊ वृद्धि के लिए ठोस रणनीतियां विकसित करने की हमें जरूरत है। इस खास आयोजन में 27 अक्टूबर को उद्घाटन सत्र में राज्य के कृषि, कृषि शिक्षा और कृषि अनुसंधान मंत्री, सूर्य प्रताप शाही मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम में शोध प्रकाशनों का विमोचन भी किया जाएगा। यह काफी महत्वपूर्ण होंगे। इसके साथ ही कृषि वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा।

कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख; बागवानी और कृषि विपणन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह की भी यहां मौजूदगी रहेगी। कार्यक्रम में पांच समानांतर तकनीकी सत्र आयोजित कर हर पहलू पर विचार किया जाएगा। इनमें कृषि क्षेत्र की समकालीन चुनौतियों और भविष्य की प्राथमिकताओं पर भी लोगों के साथ चर्चा की जाएगी। जलवायु संबधी सत्र में मौसमी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान और उनकी किस्मों में सुधार लाने में सफलता क्यों नहीं मिल पा रही है, इस पर भी व्याख्यान होंगे और हाल के दिए गए कुछ सफल प्रयास सामने लाए जाएंगे।

मिट्टी और जल संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग पर चर्चा होगी

डिजिटल कृषि और पादप संरक्षण सत्र में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग हम कृषि में कहां कर सकते हैं?  इसका सटीक और सुरक्षित फसल प्रबंधन वाला मार्ग तलाशा जाएगा। प्राकृतिक संसाधनों का इष्टतम प्रबंधन चर्चा का विषय होगा। यहां पर सत्र में मिट्टी और जल संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग पर चर्चा होगी। पैदावार को अधिकतम किया जा सके, इस पर भी राय ली जाएगी।  मक्का व मोटे अनाजों (मिलेट्स) पर अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं।

उपज देने वाली और सुगंधित धान की किस्में विकसित की गई

महानिदेशक ने हाल के वर्षों में परिषद द्वारा हासिल की गई महत्वपूर्ण उपलब्धियों का विस्तृत विवरण दिया, विशेष रूप से राज्य में कृषि अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और नीतिगत पहलों के क्षेत्रों में। फसल सुधार पहलों के अंतर्गत, अधिक उपज देने वाली और सुगंधित धान की किस्में विकसित की गई है। जैसे मालवीय सुगंध धान-104 और मालवीय धान-106 तथा पूसा नरेंद्र चावल से विकसित की गई हैं। हाइब्रिड मक्का की कलिंगराज किस्मों के बीज उत्पादन का काम शुरू किया गया है।

दलहन के क्षेत्र में, अरहर की 74 देसी किस्मों को संरक्षित किया गया है। यह पहली बार नहीं हो रहा है, जबकि मोटा अनाज पर चर्चा हो रही है। मगर इस पर ज्यादा लाभ नहीं हो पा रहा है। रहमुनिया, बलुंधा तथा चिंगारी जैसी नई किस्में विकसित की गई हैं। तकनीकी नवाचार और फसल अवशेष प्रबंधन के संबंध में, सेंट्रल सॉइल सैलिनिटी रिसर्च इंस्टीट्यूटश् के सहयोग से हेलोकेयर नामक एक बायो-फॉर्मूलेशन विकसित किया गया है, जो फसल अवशेषों को अपघटित (सड़ाकर नष्ट) कर सकता है। 

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