कुलंजन की खेती धान और गेहूं से काफी ज्यादा लाभकारी, बन सकता है छोटा उद्योग
खबर सार :-
कुलंजन की खेती से किसानों को बड़ा फायदा मिल सकता है। यह एक साथ कई तरह के गुणों वाली जड़ फसल है। पशु और मनुष्य की दवाओं के साथ ही सजने-संवरने के संसाधनों में भी इसकी खपत है।
खबर विस्तार : -
लखनऊ, कभी सुगंध देने वाले पौधों का जिक्र करते हुए अगर किसी को सुना है तो आपका ध्यान सीधे फूल वाले पौधों की तरफ जाएगा। लेकिन, एक और ऐसा पौधा भी है, जिसकी सुगंध तेज होती है। इसे हम स्वाद लेने के लिए चख भी सकते हैं। हम आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों में इस्तेमाल किए जाने वाली जड़ी बूटी कुलंजन की बात कर रहे हैं।
कभी आपने कुलंजन का नाम सुना होगा तो आपको इसके पौधे की खासियत की भी जानकारी होगी। यह पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इस्तेमाल किया जाता है। इस समय कुलंजन की फिर चर्चा हो रही है। इसका कारण है कि बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद से किसानों के आर्थिक स्रोतों को तलाशा जा रहा है। इन स्रोतों में कृषि एक विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र में आता है।
आय बढ़ाने के श्रोतों में आया जड़ का नाम
इसलिए बिहार के पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग ने एक पोस्ट किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसके बारे में कई रोचक जानकारियां दी हैं। वैसे ते किताबों में इसे अल्पिनिया कैल्के राटा बोलते हैं। इसकी पहचान इसके पत्तों और खुशबू से में मिल जाती है। पौधों की पत्तियां हरी और लंबी होती हैं। यह जमीन के अंदर विकसित होने वाला सुगंधित पौधा माना जाता है। इसके पौधे में सफेद कलर की फूल भी होते हैैं। कुलंजन की विशेषताओं का बखान करना इसलिए जरूरी है, क्योंकि सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा इसके बारे में लोग जागरूक हों। उनकी मांग के आधार पर किसान तैयार किए जाएं। इसीलिए पौधे की विशेषताओं का परिचय भी कराया जा रहा है। जमीन के अंदर विकसित होने वाले जड़ को ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया है।
कुलंजन की तसीर में होता है बड़ा दम
कुलंजन को लेकर उपचार करने वाले वैद्य इसकी तासीर के लिए तब सलाह देते हैं, जब शरीर को गर्माहट की जरूरत हो। सर्दी और जुकाम होने पर या स्वसन से संबंधित परेशानियां आने पर इसकी सलाह दी जाती है। कुलंजन से यौन रोग का उपचार भी किया जाता है। यदि किसान कुलंजन की खेती करते हैं तो उनके लिए यह बहुत मुश्किल नहीं है। भले ही प्रचलन में नहीं है, लेकिन इसके पारंपरिक लाभ होने के कारण इसकी बिक्री आसान है। वैद्य लोगों के पास रखी दवाओं में कुलंजन की जड़ भी होती है।
इसे गठिया, सर्दी जुकाम में बहुत इस्तेमाल किया जाता है। यह अदरक परिवार का मसालेदार पौधा माना जाता है। सदियों से आयुर्वेद, यूनानी, चीनी चिकित्सा पद्धति में इसका प्रयोग होता रहा है। यह स्वाद में बेहद तीखा होता है। यही इसका मुख्य औषधि भाग है। कुलंजन पाचन तंत्र को उत्तेजित करता है। मुख के विकारों को दूर करने में यह बहुत सहायक होता है। खाना खाने से पहले इसकी छोटी सी जड़ का कुछ भाग चबा लेने से पेट को भोजन के लिए तैयार करने की एक पारंपरिक व्यवस्था मानी जाती है।
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पेट के विकार दूर करने में है सहायक
इससे पेट फूलना, भूख न लगना और उसका भारीपन होना नियंत्रण में रहता है। जिनको स्वसन से संबंधित दिक्कतें हैं या बलगम कफ और फेफड़ों में कफ की दिक्कतें हैं, ऐसे लोगों के लिए कुलंजन की अनुशंसा की जाती है। यह बेहद तीखा होने के कारण शहद के साथ इस्तेमाल किया जाता है। मुख में दुर्गंध दूर करने में भी यह सहायक होता है। आयुर्वेद में कुलंजन का इस्तेमाल शरीर में दर्द होने या बुखार होने की स्थिति में भी किया जाता है। इन परिस्थितियों में यह कारगर होता है। रोग संक्रमण को भी दूर करने में मदद करता है। पसीना लाने वाला प्रभावी और शरीर के तापमान को प्राकृतिक रूप से कम करने में सहायक होता है।
परामर्श के बाद ही इसका सेवन है फायदेमंद
यह उल्टी और गति भ्रम को नियंत्रित करने में भी प्रभावी होता है। इसको सेंधा नमक के साथ या चाय में सेवन करने से कुछ मिनट में ही आराम मिल जाता है। गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में और यात्रा के दौरान भी मतली रोकने में सहायक मानी जाने वाली जड़ होती है। यद्यपि इसको बिना चिकित्सकों या वैद्य की सलाह के बिना लेना उचित नहीे होगा। ज्यादा मात्रा में इसका सेवन एसिडिटी, अल्सर और गैस्ट्राइटिस का प्रभाव बन सकता है। इसका उपयोग सावधानी पूर्वक बेहद कम या चिकित्सकों के मार्गदर्शन में ही किया जाना चाहिए। गर्भस्थ महिलाओं को भी इसकी खुराक से दूर रहना चाहिए। जिन व्यक्तियों की त्वचा बेहद संवेदनशील है, उन्हें कुलंजन का रस लगते ही जलन महसूस होने लगेगी।
किसान की आय का श्रोत है कुलंजन
कुलंजन के बारे में बताया गया है कि इसकी खेती आय बढ़ाने के लिए की जा सकती है। साथ ही पशुओं की सेहत सुधारने में भी यह काफी सहायक होता है। कुलंजन को आर्थिक लाभ का जरिया या कमाई का जरिया भी बना सकते हैं। इसे फार्मास्यूटिकल और कॉस्मेटिक उद्योग में इस्तेमाल होने के कारण इसकी आज भी खपत काफी है।
फसल में कीटों पर किसी प्रकार का खर्चा नहीं
बड़े पैमाने पर दवाओं में इसकी बिक्री की जाती है। कुलंजन के बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि पारंपरिक फसलों में कीटों का प्रभाव ज्यादा होता है। यह धान और गेहुं से ज्यादा लाभकारी है। इनकी तुलना में औषधि फसलों में कीटों का प्रकोप बेहद कम होता है। गेहूं और धान की दवाओं में किसानों को इसके लिए ज्यादा खर्च करना पड़ता है, लेकिन कुलंजन के लिए बहुत सरल उपचार है।
ऑनलाइन प्लेटफार्म पर खूब है इसकी बिक्री
बाजार में इसकी जड़ों या पाउडर की अच्छी कीमत मिल जाती है। जो किसान आसान तरीका चाहते हैं, उनके लिए कुलंजन में कई रास्ते हैं। यह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर काफी मुनाफा देने वाला माना जाता है। पशुओं के स्वास्थ्य पर भी इसका अच्छा प्रभाव रहता है। इन तमाम फायदे के कारण ही बिहार सरकार के अलावा केंद्र सरकार भी चाहती है कि किसान की आए बढ़ाने के स्रोतों का ही इस्तेमाल करें और इनमें कुलंजन की खेती एक आसान रास्ता बन सकता है।
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