कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने दिए सख्त निर्देश, हर हाल में किसान का हो फायदा

खबर सार :-

लखनऊः प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने मंगलवार को बैठक कर संबंधित वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अपने प्रक्षेत्रों के साथ किसानों के खेतों पर सजीव प्रदर्शन कराकर इन उन्नत कृषि क्रियाओं को अपनाने में किसानों का सक्रिय सहयोग करें। उन्होंने कहा कि योजनाओं को साबित करने की जरूरत है।
गुस्से में मंत्रीः खेतों तक पहुंचाएं योजनाएं, किसानों का करें सहयोग-शाही

खबर विस्तार : -

उत्तर प्रदेश: कृषि भवन सभागार में एक महत्वपूर्ण बठक की गई। इसमें उन्होंने प्रदेश के सभी 89 कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों एवं प्रभारियों से बात की। इस बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने अधिकारियों को कहा कि हमारा ध्येय हर हाल में किसान को लाभान्वित करना होना चाहिए। प्रत्येक केवीके को एक आदर्श मॉडल के रूप में विकसित करने में सभी का योगदान रहे। 

कृषि मंत्री ने कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) को किसानों के लिए मंदिर के समान बताया हैं। उन्होंने कहा कि यहां वैज्ञानिकों द्वारा किये जा रहे शोध व नवाचार केवल प्रक्षेत्रों तक सीमित न रहकर किसानों के खेतों में वास्तविक बदलाव के रूप में दिखने चाहिए। उनका कहना था कि प्रत्येक केवीके को एक आदर्श मॉडल के रूप में विकसित किया जाए। बैठक में उन्होंने कई महत्वपूर्ण निर्दश दिए। साथ ही वैज्ञानिकों से सुझाव भी मांगे हैं। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बैठक में केंद्रों की गतिविधियों, सभी परियोजनाओं के सुचारु संचालन के साथ ही आगामी रबी सीजन की रणनीति पर भी वैज्ञानिकों की तैयारी जाननी चाही।  

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दलहन व तिलहन उत्पादन पर होगा जोर

उन्होंने विकसित भारत अभियान के अंतर्गत स्थानीय स्तर पर दलहन व तिलहन उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए सुझाव मांगे हैं। यह बैठक इसलिए खास रही, क्योंकि अधिकारियों से ज्यादा महत्व वैज्ञानिकों को दिया गया है। वैज्ञानिकांे को कहा गया कि वे निर्धारित मॉड्यूल के अनुसार कार्य करें। केंद्रों पर व्यावहारिक गतिविधियों को तेज करने की जिम्मेदारी भी उनकी ही है। मंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि देरी से बुवाई की प्रवृत्ति अब नहीं चलेगी। इस आदत को बदलना होगा। 

तरकीब से कराई जाएगी बुवाई

देर की बुवाई फसलों के उत्पादन के साथ ही उत्पादक पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इस दौरान वह महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सुझाव भी मांगते रहे। कृषि मंत्री के अनुसार, अब वैज्ञानिकों और अधिकारियों को समय से बुवाई, निराई-गुड़ाई और कटाई के लिए किसान को जागरूक करना होगा। खेतों में लाइन सोइंग, इंटर क्रॉपिंग (सहफसली खेती) और बॉर्डर लाइनिंग को उन्नतशील पद्धतियां बताते हुए कहा कि इनको हर हाल में करना है। वैज्ञानिकों को एक बड़ा काम दिया है। अब वह अपने प्रक्षेत्रों के साथ-साथ किसानों के खेतों पर सजीव प्रदर्शन कराने जाएंगे। उन्नत कृषि क्रियाओं को अपनाने में किसानों का सक्रिय होकर सहयोग करेंगे। 

अनुदानों की जानकारी किसानों को होगी

अधिकारियों को कहा है कि वह व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाएं। कृषि विश्वविद्यालयों के स्तर पर केवीके की नियमित रैंकिंग कराकर परिणाम दें। दो माह में कृषि विज्ञान केंद्रों का स्थलीय निरीक्षण करने के लिए कहा गया है। इससे सारी जानकारियां मिलती रहेंगी। साथ ही कृषि मंत्री का ध्यान सरकार द्वारा संचालित वेलफेयर स्कीम की ओर भी रहा। इनको अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में केवीके की जिम्मेदारी तय की गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में खुले बीज पोर्टल, कृषि यंत्र पोर्टल तथा 75 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराए जा रहे, ऐसी योजनाएं किसानों को पता चलना चाहिए। 

17 सितंबर को सेवा संकल्प अभियान 

17 सितंबर को सेवा संकल्प अभियान के अवसर पर व्यापक स्वच्छता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। साथ ही प्रदेश के सभी विकास खंडों में पांच दिवसीय किसान मेला भी लगाया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी केवीके को दी गई है। बैठक में कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख, प्रमुख सचिव रवींद्र, विशेष सचिव लाल बहादुर यादव, बांदा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति एसवीएस राजू, मेरठ कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति त्रिवेणी दत्त, कानपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति संजीव गुप्ता, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह, निदेशक कृषि टीएम त्रिपाठी सहित सभी 89 कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक एवं कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

 सभागार में कृषि मंत्री के प्रमुख निर्देश

1. हर हाल में किसान को लाभ मिलना चाहिए।

2. प्रत्येक केवीके आदर्श मॉडल के रूप में विकसित हो।

3. शोध व नवाचार खेतों में बदलाव के रूप में दिखें।

4. वैज्ञानिक निर्धारित मॉड्यूल के अनुसार कार्य करें।

5. केंद्रों पर व्यावहारिक गतिविधियों को तेजी से बढ़ाएं।

6. केवीके की नियमित रैंकिंग कराने के निर्देश दिए।

7. कृषि विज्ञान केंद्रों का स्थलीय निरीक्षण करें।

8. किसानों के बीच जागरूकता फैलाई जाए।

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