Smartphone-Laptop से लेकर रक्षा उपकरणों तक की Overheating कम करेगी New Technology, आईआईटी मद्रास के वैज्ञानिकों ने विकसित की तकनीक

खबर सार :-

स्मार्टफोन, लैपटॉप के लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद ओवरहीट होने की समस्या अब आम हो गई है। आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों को ओवर हीटिंग से बचाना बड़ी चुनौती हो गई है। आईआईटी मद्रास के वैज्ञानिकों ने इस समस्या से निजात के लिए नई टेक्नोलॉजी विकसित की है।
Smartphone-Laptop से लेकर रक्षा उपकरणों तक की Overheating कम करेगी New Technology, आईआईटी मद्रास के वैज्ञानिकों ने विकसित की तकनीक

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: अक्सर बात करते समय हमारा फोन या लंबे समय तक काम करने के दौरान लैपटॉप गर्म हो जाता है। स्मार्टफोन या लैपटॉप के ओवरहीट हो जाने की समस्या आम है। डेटा सेंटरों में बढ़ रही लगातार गर्मी अथवा रक्षा उपकरणों को ओवर हीटिंग से बचाना बड़ी चुनौती बन गया है। आधुनिक इलेक्ट्रानिक्स में ओवर हीटिंग की समस्या आज के समय में सबसे बड़ी है। इस समस्या को लेकर आईआईटी मद्रास के वैज्ञानिकों ने एक नई टेक्नोलॉजी विकसित की है। जिससे इस समस्या का प्रभावी समाधान संभव हो सकेगा। इस समाधान से स्मार्टफोन और लैपटॉप कम हीट होंगे और लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे। 

नई तकनीक से अधिक प्रभावी कूलिंग के साथ संचालित हो सकेंगे डेटा सेंटर

आईआईटी मद्रास के शोधकर्ताओं ने फ्लैट प्लेट पल्सेटिंग हीट पाइप (एफपीपीएचपी) का एक नया डिजाइन तैयार किया है। यह एक ऐसा डिजाइन है, जो कम जगह में भी अधिक प्रभावी ढंग से गर्मी बाहर निकाल सकता है। यह तकनीक भविष्य में स्मार्टफोन, लैपटॉप, डेटा सेंटर, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस सिस्टम और इलेक्ट्रिक वाहनों तक में इस्तेमाल की जा सकती है।इससे डेटा सेंटर अधिक प्रभावी कूलिंग के साथ संचालित हो सकेंगे। रक्षा क्षेत्र में रडार, एवियोनिक्स और अन्य उच्च क्षमता वाले इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम अधिक भरोसेमंद बनेंगे। इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों और पावर कन्वर्टर में भी भविष्य में इसका उपयोग किया जा सकता है। 

ऐसे काम करेगी यह नई टेक्नोलॉजी

आईआईटी के मुताबिक इसे एक ऐसे सूक्ष्म कूलिंग सिस्टम की तरह समझा जा सकता है, जो बिना किसी मोटर या पंप के अपने आप गर्मी को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचा देता है। इसमें एक सपाट धातु प्लेट के भीतर बेहद महीन नलिकाएं बनाई जाती हैं। इन नलिकाओं में विशेष द्रव भरा होता है। जैसे ही कोई हिस्सा गर्म होता है, द्रव वाष्प बनकर ठंडे हिस्से तक पहुंचता है, वहां दोबारा तरल बन जाता है और वापस लौट आता है।

यही प्रक्रिया लगातार चलती रहती है और उपकरण का तापमान नियंत्रित रहता है। अब तक ऐसे अधिकांश कूलिंग सिस्टम में गर्मी लेने वाला हिस्सा और गर्मी छोड़ने वाला हिस्सा प्लेट की एक ही तरफ होता था। दरअसल यह नई तकनीक संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में छोटे होते इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में ओवरहीटिंग का समाधान भारतीय वैज्ञानिकों के इस नवाचार से काफी हद तक संभव हो सकता है।

पहली बार तैयार किया ‘एंटीपैरलल डिजाइन’ 

शोधकर्ताओं ने इस कूलिंग सिस्टम के दो मॉडल बनाए एक है सिलिकॉन गैस्केट आधारित व दूसरा है ओ-रिंग आधारित। परीक्षण में सामने आया कि गैस्केट मॉडल में द्रव अधिक भरता है, लेकिन ओ-रिंग मॉडल में वही द्रव कहीं अधिक तेजी और प्रभावी ढंग से आगे-पीछे गति करता है। परिणामस्वरूप कूलिंग क्षमता काफी बढ़ गई। शोध में एक और रोचक परिणाम सामने आया। सामान्य धारणा के विपरीत, इस डिजाइन में एल्युमिनियम ने तांबे से बेहतर प्रदर्शन किया। आईआईटी मद्रास के वैज्ञानिकों ने पहली बार ‘एंटीपैरलल डिजाइन’ तैयार किया है। इसमें दोनों हिस्से प्लेट की विपरीत सतहों पर लगाए गए हैं। इससे बेहद छोटे और कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में भी इस तकनीक को आसानी से लगाया जा सकता है। 

बड़े पैमाने पर निर्माण की लागत और वजन किए जा सकते हैं कम 

वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने नलिकाओं की भीतरी सतह को विशेष तरीके से तैयार किया, जिससे द्रव सतह पर अधिक अच्छी तरह फैलने लगा। इस एक बदलाव से तापीय प्रतिरोध में करीब 16 प्रतिशत की अतिरिक्त कमी दर्ज की गई और गर्मी निकालने की क्षमता और बढ़ गई। यदि यह तकनीक व्यावसायिक स्तर पर अपनाई जाती है तो इसके उपयोग की संभावनाएं बेहद व्यापक हैं। आईआईटी का कहना है कि एल्युमिनियम न केवल हल्का है, बल्कि इसका तापीय प्रतिरोध तांबे की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत कम पाया गया। इससे बड़े पैमाने पर निर्माण की लागत और वजन दोनों कम किए जा सकते हैं।

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