​​​​​​​मेटा पर अमेरिकी सीनेटर का वार, पूछा- आपत्तिजनक विज्ञापन कैसे निकले, कंपनी ने कितनी कमाई की?

खबर सार :-

मेटा पर लगे गंभीर आरोपों ने उसके विज्ञापन मॉडरेशन और एआई सुरक्षा तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीनेटर वॉर्नर ने कंपनी से विज्ञापनों की पहचान, हटाने, रिपोर्टिंग और संभावित राजस्व से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी है। 26 अगस्त की जवाबी समयसीमा के बीच मेटा की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। मामला एआई के दुरुपयोग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी को लेकर आगे की नीतिगत बहस को भी प्रभावित कर सकता है।
मेटा के विज्ञापनों पर सीनेटर का वार, जुकरबर्ग से जवाब तलब

खबर विस्तार : -

Mark Warner CSAM: बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी कथित सामग्री वाले पेड विज्ञापनों को लेकर मेटा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। अमेरिकी सीनेटर मार्क वॉर्नर ने मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से इस मामले में जवाब मांगा है। उन्होंने कंपनी से पूछा है कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, मैसेंजर और थ्रेड्स पर ऐसे विज्ञापन उसकी समीक्षा व्यवस्था को पार करके कैसे प्रसारित हुए और क्या मेटा ने उनसे आर्थिक लाभ कमाया।

वर्जीनिया से डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर वॉर्नर ने 18 अगस्त को जुकरबर्ग को पत्र भेजकर इस मामले पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मेटा के प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) और बिना सहमति के बनाए गए अंतरंग चित्रों (एनसीआईआई) से जुड़े विज्ञापनों का दिखाई देना पूरी तरह अस्वीकार्य है। उनका कहना है कि इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि ऐसी सामग्री से कंपनी को कथित तौर पर राजस्व मिला हो सकता है।

50 से ज्यादा तस्वीरों और वीडियो वाले विज्ञापनों का दावा

वॉर्नर ने टेक ट्रांसपेरेंसी प्रोजेक्ट (टीटीपी) की एक शोध रिपोर्ट का हवाला दिया। रिपोर्ट के अनुसार, करीब नौ महीने की अवधि में मेटा के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर एआई से तैयार बाल यौन शोषण सामग्री वाले दर्जनों पेड विज्ञापन प्रसारित हुए। शोधकर्ताओं ने मेटा की सार्वजनिक विज्ञापन लाइब्रेरी में बच्चों के शोषण से संबंधित 50 से अधिक तस्वीरों और वीडियो वाले विज्ञापनों की पहचान करने का दावा किया।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये विज्ञापन नवंबर 2025 से अगस्त 2026 की शुरुआत तक अलग-अलग समय पर प्रसारित होते रहे। इन्हें अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के एक दर्जन से अधिक देशों के उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाया गया। पत्र में यह भी कहा गया है कि कम से कम एक विज्ञापन यूरोप में 2,500 से अधिक सोशल मीडिया खातों तक पहुंचा। शोध में ऐसे विज्ञापनों का भी उल्लेख किया गया है जो लोगों को ऐसी सेवाओं या वेबसाइटों की ओर ले जाते थे, जहां तस्वीरों में अनुचित कृत्रिम बदलाव किए जा सकते थे। कुछ विज्ञापनों में बच्चों की तस्वीरों का इस्तेमाल आपत्तिजनक सामग्री की ओर आकर्षित करने के लिए किया गया, जबकि अन्य में एआई आधारित तकनीकों के दुरुपयोग के संकेत मिले।

मेटा की विज्ञापन समीक्षा पर उठे सवाल

वॉर्नर ने सवाल किया कि जब मेटा अपनी विज्ञापन व्यवस्था के तहत विज्ञापनों की समीक्षा और मंजूरी देने का दावा करता है, तो इतनी गंभीर सामग्री उसकी प्रणाली से कैसे गुजर गई। उन्होंने कंपनी से प्रत्येक विज्ञापन की पहचान और हटाए जाने की तारीख बताने को कहा है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि संबंधित मामलों की सूचना गुमशुदा एवं शोषित बच्चों के लिए राष्ट्रीय केंद्र (एनसीएमईसी) को कब दी गई। सीनेटर ने यह जानना भी चाहा है कि विज्ञापनों की पहचान और रिपोर्टिंग के बीच कोई देरी हुई थी या नहीं। यदि देरी हुई, तो उसका कारण क्या था। उन्होंने मेटा से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि क्या कंपनी ने ऐसी सामग्री के प्रसार, प्रचार या विज्ञापन से किसी भी तरह का राजस्व अर्जित किया।

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भारत से सामने आए मामले का भी जिक्र

वॉर्नर ने जुलाई 2026 में सामने आई बीबीसी की उस जांच का भी हवाला दिया, जिसमें भारत में इंस्टाग्राम पर इसी तरह के विज्ञापनों के प्रसारित होने की बात सामने आई थी। उनके मुताबिक, उस जांच के बाद मेटा को जानकारी दिए जाने के बावजूद शोधकर्ताओं को नए संदिग्ध विज्ञापन मिलते रहे। सीनेटर ने मेटा की विज्ञापन नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि कंपनी के नियम नग्नता, यौन गतिविधियों या यौन संकेतात्मक सामग्री वाले विज्ञापनों की अनुमति नहीं देते। ऐसे में उन्होंने सवाल किया कि इन नियमों के बावजूद संबंधित विज्ञापनों को स्वीकृति कैसे मिली।

चीनी पुनर्विक्रेताओं से जुड़े विज्ञापनों पर भी जानकारी मांगी

वॉर्नर ने 11 चीनी पुनर्विक्रेताओं से जुड़े विज्ञापनों की जानकारी भी मांगी है। बताया गया है कि इनमें से कुछ विज्ञापन बाल शोषण, उत्पीड़न या ऐसी सेवाओं से संबंधित नीतियों के उल्लंघन के कारण हटाए गए थे। सीनेटर ने विज्ञापनों की प्रसारण अवधि, लक्ष्य बनाए गए उपयोगकर्ताओं, कुल इम्प्रेशन, अमेरिका में पहुंच और मेटा को किए गए भुगतान का विवरण मांगा है। उन्होंने यह भी पूछा है कि क्या कंपनी ने ऐसे विज्ञापनों से प्राप्त राजस्व अपने पास रखा। इसके अलावा 2025 और 2026 के दौरान अमेरिका में 13 से 18 वर्ष की उम्र के किशोरों को दिखाए गए उन पेड विज्ञापनों के आंकड़े भी मांगे गए हैं, जिन्हें बाद में नग्नता या शोषणकारी सामग्री के कारण चिह्नित किया गया।

एआई के दुरुपयोग पर कानून की तैयारी

गौरतलब है कि वॉर्नर ने जुलाई में सेफ एआई एक्ट नामक विधेयक पेश किया था। इसका उद्देश्य ऐसी एआई प्रणालियों पर रोक लगाने की दिशा में काम करना है, जिनका इस्तेमाल बाल यौन शोषण सामग्री या बिना सहमति वाले अंतरंग चित्र तैयार करने के लिए किया जा सकता है। प्रस्तावित कानून में एआई सुरक्षा नियंत्रणों को दरकिनार करने वाले सॉफ्टवेयर पर भी प्रतिबंध का प्रावधान बताया गया है। अब मेटा के सामने 26 अगस्त तक वॉर्नर के सवालों का जवाब देने की समयसीमा है। इस मामले में कंपनी की प्रतिक्रिया यह स्पष्ट करने में अहम होगी कि उसकी विज्ञापन समीक्षा और सुरक्षा प्रणालियां ऐसे मामलों को रोकने में कितनी प्रभावी रहीं।

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)...

1.मार्क वॉर्नर ने मेटा से क्या पूछा है?

उन्होंने पूछा है कि कथित आपत्तिजनक विज्ञापन मेटा की समीक्षा प्रणाली से कैसे गुजर गए और उनसे कंपनी को कितनी कमाई हुई।

2.इन विज्ञापनों में किस तरह की सामग्री होने का आरोप है?

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ पेड विज्ञापनों में बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) और बिना सहमति वाले अंतरंग चित्रों (एनसीआईआई) से जुड़ी सामग्री शामिल थी।

3.मेटा को जवाब कब तक देना है?

सीनेटर मार्क वॉर्नर ने मेटा से 26 अगस्त तक इन सवालों का जवाब देने को कहा है।

4.मार्क वॉर्नर ने कौन-सा एआई विधेयक पेश किया है?

उन्होंने जुलाई 2026 में सेफ एआई एक्ट पेश किया, जिसका उद्देश्य एआई के जरिए बाल यौन शोषण सामग्री और गैर-सहमति वाले अंतरंग चित्रों के निर्माण को रोकना है।

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