Google पर €403 मिलियन का जुर्माना, लोकेशन डेटा के इस्तेमाल पर EU नियामक की बड़ी कार्रवाई

खबर सार :-

गूगल पर लोकेशन डेटा नियमों के उल्लंघन को लेकर 403 मिलियन यूरो का जुर्माना लगा है। कंपनी को छह महीने में अपनी डेटा प्रोसेसिंग व्यवस्था GDPR के अनुरूप करनी होगी।
Google पर €403 मिलियन जुर्माना, लोकेशन डेटा पर EU की बड़ी कार्रवाई

खबर विस्तार : -

EU GDPR Google FINE: यूरोपीय संघ के डेटा संरक्षण नियामक ने गूगल पर लोकेशन डेटा के इस्तेमाल को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। आयरलैंड के डेटा संरक्षण आयोग (DPC) ने सोमवार को गूगल पर 403 मिलियन यूरो यानी करीब 4,000 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने कंपनी को अपनी लोकेशन डेटा प्रोसेसिंग प्रणाली को यूरोपीय डेटा संरक्षण नियमों के अनुरूप बनाने के लिए छह महीने का समय भी दिया है।

यह मामला गूगल की ‘लोकेशन हिस्ट्री’ सेवा और उससे जुड़ी लोकेशन डेटा प्रोसेसिंग गतिविधियों से संबंधित है। इस फीचर के जरिए उपयोगकर्ता के मोबाइल डिवाइस से उसकी लोकेशन का रिकॉर्ड रखा जाता है। हालांकि, लोकेशन हिस्ट्री सभी उपयोगकर्ताओं के लिए अपने आप सक्रिय नहीं होती। इसे इस्तेमाल करने के लिए उपयोगकर्ता की ओर से ऑप्ट-इन यानी स्वैच्छिक सहमति जरूरी होती है।

लोकेशन डेटा से तैयार होती है यूजर की प्रोफाइल

नियामक के मुताबिक, लोकेशन हिस्ट्री सक्रिय होने के बाद गूगल उपयोगकर्ताओं के लोकेशन डेटा का विश्लेषण करता है। इसके आधार पर उपयोगकर्ता किन जगहों पर गया, उसकी गतिविधियां क्या रहीं और उसने अलग-अलग स्थानों के बीच किस तरह यात्रा की, जैसी जानकारियों का अनुमान लगाया जा सकता है। आयरलैंड के डेटा संरक्षण आयोग ने अपने फैसले में कहा कि गूगल वेब एंड ऐप एक्टिविटी, लोकेशन हिस्ट्री और लोकेशन एक्यूरेसी से संबंधित डेटा प्रोसेसिंग गतिविधियों में GDPR के तहत वैधता, निष्पक्षता और पारदर्शिता के सिद्धांतों का पालन साबित करने में विफल रहा।

जरूरत से ज्यादा समय तक डेटा रखने का आरोप

आयोग ने यह भी पाया कि गूगल ने कुछ मामलों में उपयोगकर्ताओं के लोकेशन डेटा को उस अवधि से अधिक समय तक सुरक्षित रखा, जितने समय तक उसे रखना आवश्यक था। नियामक के अनुसार, डेटा को जरूरत से अधिक समय तक बनाए रखना डेटा संरक्षण के मूल सिद्धांतों से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। आयरिश डेटा संरक्षण आयोग के उप आयुक्त ग्राहम डॉयल ने लोकेशन डेटा को व्यक्तिगत जानकारी का बेहद संवेदनशील प्रकार बताया। उनके अनुसार, लोकेशन संबंधी जानकारी डिजिटल सेवाओं को उपयोगी बनाने में मदद कर सकती है, लेकिन इससे किसी व्यक्ति की निजी जिंदगी से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी सामने आ सकती हैं।

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पारदर्शिता और यूजर कंट्रोल पर जोर

डॉयल के मुताबिक, अगर उपयोगकर्ताओं को पर्याप्त जानकारी नहीं दी जाती है तो वे यह समझने में सक्षम नहीं होंगे कि उनकी लोकेशन संबंधी जानकारी का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है। इसमें विज्ञापन को लक्षित करना या उपयोगकर्ता की रुचियों का अनुमान लगाना भी शामिल हो सकता है। नियामक का कहना है कि ऐसी स्थिति में उपयोगकर्ताओं का अपने व्यक्तिगत डेटा पर नियंत्रण प्रभावित हो सकता है। लोकेशन डेटा को आवश्यकता से अधिक अवधि तक सुरक्षित रखने से यह चिंता और बढ़ जाती है।

GDPR के तहत डेटा को उच्च सुरक्षा

जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (GDPR) यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र (EEA) में व्यक्तिगत डेटा को उच्च स्तर की सुरक्षा प्रदान करता है। इसके तहत कंपनियों के लिए व्यक्तिगत डेटा का इस्तेमाल कानूनी, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से करना जरूरी है। डेटा संरक्षण आयोग ने कहा है कि इस मामले से जुड़ा विस्तृत फैसला बाद में सार्वजनिक किया जाएगा। विस्तृत निर्णय सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि नियामक ने किन विशिष्ट डेटा प्रोसेसिंग गतिविधियों और प्रक्रियाओं को नियमों के अनुरूप नहीं पाया।

टेक कंपनियों की बढ़ती नियामकीय जांच

गूगल पर यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब यूरोप समेत दुनिया के कई नियामक बड़ी टेक कंपनियों की डेटा संग्रह और उपयोग संबंधी नीतियों की जांच तेज कर रहे हैं। यूजर प्राइवेसी, डेटा की अवधि और व्यक्तिगत जानकारी के इस्तेमाल को लेकर नियामकीय निगरानी लगातार बढ़ रही है। इस मामले में 403 मिलियन यूरो का जुर्माना और छह महीने में सिस्टम में बदलाव का निर्देश गूगल के लिए महत्वपूर्ण नियामकीय कार्रवाई है। साथ ही, यह फैसला कंपनियों के लिए व्यक्तिगत लोकेशन डेटा के इस्तेमाल में पारदर्शिता, वैधता और डेटा संरक्षण के सिद्धांतों के महत्व को भी रेखांकित करता है।

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