भारत में AI बूम से शेयर बाजार को मिलेगा बूस्ट, 2-3 साल में 100 अरब डॉलर बढ़ सकता है वैल्यूएशन

खबर सार :-

भारत का तेजी से बढ़ता AI इकोसिस्टम अगले 2-3 वर्षों में शेयर बाजार का मूल्यांकन 50-100 अरब डॉलर बढ़ा सकता है। गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, संभावित IPO में AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बड़ी भूमिका होगी, हालांकि वास्तविक असर बाजार की स्थितियों पर निर्भर करेगा।
भारत में AI बूम, शेयर बाजार में 100 अरब डॉलर बढ़ेगी वैल्यूएशन

खबर विस्तार : -

India AI Boom: भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से बढ़ता इकोसिस्टम आने वाले दो से तीन वर्षों में शेयर बाजार की तस्वीर बदल सकता है। गोल्डमैन सैक्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, AI स्टार्टअप्स की संभावित लिस्टिंग से भारतीय शेयर बाजार में AI से जुड़ी सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मूल्यांकन 50 अरब से 100 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है। इस वृद्धि के पीछे निजी AI कंपनियों के IPO, निवेश में तेजी और AI से जुड़े बुनियादी ढांचे की बढ़ती मांग प्रमुख कारक होंगे।

70 कंपनियों में से 25-50% ला सकती हैं IPO

गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मिड-टू-लेट-स्टेज की लगभग 70 निजी AI कंपनियां हैं। इनमें से 25 से 50 प्रतिशत कंपनियां आने वाले वर्षों में इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के जरिए शेयर बाजार में उतर सकती हैं। रिपोर्ट का अनुमान है कि इन कंपनियों की लिस्टिंग उनके मौजूदा अनुमानित मूल्यांकन के मुकाबले औसतन करीब चार गुना वैल्यूएशन पर हो सकती है। ऐसी लिस्टिंग से निवेशकों को AI क्षेत्र की नई कंपनियों में निवेश के अवसर मिल सकते हैं। साथ ही, शेयर बाजार में AI से जुड़े कारोबारों की विविधता बढ़ सकती है। इससे उन क्षेत्रों की कंपनियों को भी पहचान मिलेगी, जिनका प्रतिनिधित्व फिलहाल सार्वजनिक बाजार में सीमित है। गोल्डमैन सैक्स में एशिया मैक्रो रिसर्च के सह-प्रमुख और एशिया-प्रशांत इक्विटी रणनीतिकार टिमोथी मो के मुताबिक, इन संभावित लिस्टिंग से भारत के सार्वजनिक बाजार में AI वैल्यू चेन के कई ऐसे हिस्से शामिल हो सकते हैं, जिनकी मौजूदगी अभी अपेक्षाकृत कम है।

AI स्टार्टअप्स की फंडिंग में तीन गुना उछाल

भारत में AI कंपनियों के प्रति निवेशकों की दिलचस्पी भी तेजी से बढ़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 के बाद से भारतीय AI स्टार्टअप्स के लिए प्राइवेट इक्विटी फंडिंग तीन गुना हो गई है। वहीं, कुल प्राइवेट इक्विटी निवेश में AI की हिस्सेदारी चार गुना बढ़कर देश में निवेश की गई कुल निजी पूंजी का लगभग पांचवां हिस्सा पहुंच गई है। यह रुझान बताता है कि निवेशक अब AI को केवल तकनीकी नवाचार तक सीमित नहीं मान रहे, बल्कि इसे भविष्य के कारोबार और बाजार विस्तार के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में भी देख रहे हैं। हालांकि, फंडिंग में बढ़ोतरी का असर कंपनियों के वास्तविक मुनाफे और शेयर बाजार के प्रदर्शन पर किस हद तक पड़ेगा, यह उनके कारोबारी नतीजों और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

ये भी पढ़ें.....भारत में डेटा सेंटर बूमः 2030 तक क्षमता 4 गुना बढ़ने की उम्मीद; बिजली, पानी और साइबर सुरक्षा पर बढ़ा जोखिम

84 निजी AI कंपनियों की कुल वैल्यू 55 अरब डॉलर

गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट में भारत को निजी AI फंडिंग के मामले में दुनिया के शीर्ष छह देशों में शामिल बताया गया है। नई फंडिंग हासिल करने वाली AI कंपनियों की संख्या के लिहाज से भारत शीर्ष चार देशों में जगह रखता है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 84 निजी कंपनियों की पहचान 'प्राइवेट AI कंटेंडर्स' के रूप में की गई है। इन कंपनियों का कुल अनुमानित मूल्यांकन करीब 55 अरब डॉलर है। वर्ष 2025 के बाद से भारत में AI से जुड़ी कुल निजी फंडिंग का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं कंपनियों को मिला है। ये कंपनियां AI वैल्यू चेन के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं। इनमें तकनीकी समाधान विकसित करने वाली कंपनियों से लेकर AI सिस्टम के संचालन के लिए जरूरी संसाधन और सेवाएं उपलब्ध कराने वाले कारोबार शामिल हैं।

AI इंफ्रास्ट्रक्चर में सबसे बड़ा अवसर

रिपोर्ट में 'अपस्ट्रीम AI इनेबलर्स' को सबसे बड़े अवसर वाले क्षेत्रों में शामिल किया गया है। इस सेगमेंट का अनुमानित मूल्यांकन करीब 35 अरब डॉलर है। इसमें बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, चिप डिजाइन, क्वांटम कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर, क्लाउड सेवाओं और डेटा मैनेजमेंट से जुड़ी कंपनियां आती हैं। AI तकनीक के विस्तार के साथ कंप्यूटिंग क्षमता, बिजली, डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग की मांग बढ़ने की संभावना है। ऐसे में इन क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों को निवेश और कारोबार बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं।

संभावित लिस्टिंग में इंफ्रास्ट्रक्चर की दो-तिहाई हिस्सेदारी

गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि भविष्य में AI से जुड़ी कंपनियों की संभावित कुल लिस्टिंग वैल्यू में लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा अपस्ट्रीम AI इनेबलर्स का हो सकता है। इसका मतलब है कि AI का बाजार केवल सॉफ्टवेयर और एप्लिकेशन बनाने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। इसके पीछे काम करने वाला तकनीकी और भौतिक बुनियादी ढांचा भी शेयर बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि, रिपोर्ट में बताए गए आंकड़े संभावित अवसरों और अनुमानित मूल्यांकन को दर्शाते हैं। वास्तविक IPO की संख्या, कंपनियों की लिस्टिंग वैल्यू और शेयर बाजार पर उनका असर भविष्य की फंडिंग, कारोबारी प्रदर्शन तथा निवेशकों की मांग पर निर्भर करेगा।

ये भी पढ़ें.....मेटा को सरकार का निर्देश: फेसबुक-इंस्टाग्राम के एल्गोरिद्म की समीक्षा, भ्रामक कंटेंट और डीपफेक पर कसेगा शिकंजा

FAQ (पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न)....

1. भारत में AI बूम से शेयर बाजार का मूल्यांकन कितना बढ़ सकता है?

गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के अनुसार, अगले दो से तीन वर्षों में AI कंपनियों की संभावित लिस्टिंग से भारतीय शेयर बाजार का मूल्यांकन 50 से 100 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है।

2. भारत की कितनी AI कंपनियां IPO ला सकती हैं?

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की लगभग 70 मिड-टू-लेट-स्टेज निजी AI कंपनियों में से 25 से 50 प्रतिशत कंपनियां आने वाले वर्षों में IPO ला सकती हैं।

3. AI क्षेत्र में सबसे बड़ा निवेश अवसर किस सेक्टर में है?

रिपोर्ट के अनुसार, अपस्ट्रीम AI इनेबलर्स में बड़ा अवसर है। इसमें डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, चिप डिजाइन, बिजली उत्पादन, क्लाउड सर्विस और डेटा मैनेजमेंट जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

अन्य प्रमुख खबरें