स्टारलिंक से पहले वनवेब को मिले मंजूरी, सुनील मित्तल ने उठाई मांग; 5 साल पुराने आवेदन का दिया हवाला
खबर सार :-
वनवेब के प्रमुख सुनील भारती मित्तल ने पांच साल पहले आवेदन और तैयार नेटवर्क का हवाला देकर स्टारलिंक से पहले मंजूरी मांगी है। वहीं, सरकार ने सभी सैटेलाइट ऑपरेटरों के लिए निष्पक्ष और समान नियामकीय प्रक्रिया अपनाने की बात कही है।
खबर विस्तार : -
OneWeb Regulatory Approval: : भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाओं की शुरुआत को लेकर नियामकीय मंजूरी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। भारती एंटरप्राइजेज के संस्थापक और चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने कहा है कि यूटेलसैट वनवेब को एलन मस्क की स्टारलिंक से पहले भारत में सेवाएं शुरू करने की मंजूरी मिलनी चाहिए। उनका तर्क है कि वनवेब ने करीब पांच साल पहले आवेदन किया था और वह मंजूरी प्रक्रिया में काफी पहले से शामिल है।
पांच साल पहले किया था आवेदन
राष्ट्रीय राजधानी में बुधवार को आयोजित 'ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम 2026' में एक पैनल चर्चा के दौरान मित्तल ने कहा कि वनवेब भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने के लिए जरूरी तैयारियां काफी पहले पूरी कर चुकी है। इसके बावजूद कंपनी को अब तक आवश्यक नियामकीय मंजूरियों का इंतजार करना पड़ रहा है। मित्तल के मुताबिक, वनवेब ने लगभग पांच साल पहले आवेदन किया था। ऐसे में मंजूरी की कतार में कंपनी को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि वनवेब को स्टारलिंक से कुछ दिन पहले भी जरूरी स्वीकृतियां मिल जाती हैं, तो कंपनी के लिए यह खुशी की बात होगी।
तीन साल से तैयार है ग्राउंड नेटवर्क
सुनील मित्तल ने वनवेब की तैयारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कंपनी का ग्राउंड नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर पिछले तीन वर्षों से तैयार है। वहीं, उसके सैटेलाइट लगभग पांच वर्षों से भारत के ऊपर अपनी निर्धारित स्थिति में मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि इतनी लंबी तैयारी और पहले आवेदन करने के बावजूद कंपनी को अभी तक सेवाएं शुरू करने के लिए जरूरी अनुमति नहीं मिली है। मित्तल के अनुसार, वनवेब मंजूरी प्रक्रिया में काफी आगे है और उसे अपनी बारी का इंतजार है। उन्होंने कहा, “जैसा कि मैं पहले भी कह चुका हूं, हम अपनी मंजूरियों का इंतजार कर रहे हैं। मेरा मानना है कि मंजूरी की कतार में हम उनसे काफी आगे हैं, क्योंकि हमने पांच साल पहले आवेदन किया था।” मित्तल ने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी की मांग का आधार उसका पहले आवेदन करना और तैयार बुनियादी ढांचा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नियामकीय मंजूरी मिलने के बाद वनवेब जल्द भारतीय बाजार में अपनी सेवाएं शुरू कर सकेगी।
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स्टारलिंक के भारत प्रवेश पर बढ़ी चर्चा
मित्तल का यह बयान ऐसे समय आया है, जब एलन मस्क की अगुवाई वाली स्टारलिंक के भारत में प्रवेश को लेकर बहस तेज हो गई है। पिछले सप्ताह मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आरोप लगाया था कि कुछ भारतीय कारोबारी देश में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाएं शुरू करने की स्टारलिंक की योजना में बाधा डाल रहे हैं। स्टारलिंक की संभावित शुरुआत को लेकर भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा और नियामकीय प्रक्रिया पर चर्चा हो रही है। सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवाओं को दूरदराज के इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ाने के एक विकल्प के रूप में देखा जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में काम कर रही कंपनियों के लिए भारत की मंजूरी प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। हालांकि, मित्तल ने अपनी टिप्पणी में मुख्य रूप से वनवेब के पहले आवेदन और उसकी तैयारियों का हवाला देते हुए कहा कि कंपनी को स्टारलिंक से पहले मंजूरी मिलनी चाहिए।
सरकार ने भेदभाव के आरोपों को नकारा
दूसरी ओर, भारत सरकार ने सैटेलाइट संचार सेवाओं की मंजूरी प्रक्रिया में पक्षपात या भेदभाव किए जाने के आरोपों को खारिज किया है। मस्क के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए संचार मंत्रालय ने कहा था कि सभी सैटेलाइट संचार ऑपरेटरों का मूल्यांकन निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण नियामकीय ढांचे के तहत किया जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार, संबंधित तीनों संस्थाएं व्यापक रूप से नियामकीय प्रक्रिया के एक समान चरण में हैं। मंत्रालय ने कहा था कि मौजूदा ढांचे या उसके अनुपालन को अनुचित अथवा भेदभावपूर्ण बताना निराधार और गलत है।
मंजूरी और प्रतिस्पर्धा पर टिकी निगाहें
वनवेब की ओर से जल्द मंजूरी की मांग और स्टारलिंक के भारत प्रवेश को लेकर उठे सवालों के बीच अब नियामकीय प्रक्रिया पर सबकी निगाहें हैं। एक तरफ वनवेब पहले आवेदन और तैयार नेटवर्क के आधार पर प्राथमिकता चाहती है, तो दूसरी तरफ सरकार सभी ऑपरेटरों के लिए समान प्रक्रिया अपनाने की बात कह रही है। आने वाले समय में मंजूरी से जुड़े फैसले यह तय करने में अहम होंगे कि भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाओं का विस्तार किस गति से होता है और इस उभरते बाजार में प्रतिस्पर्धा किस तरह आगे बढ़ती है।
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