स्नातक किसान करेंगे ड्रोन से खेत पर काम, कम पढ़ाई वालों को कम अनुदान
खबर सार :-
बिहार सरकार ने किसानों के लिए कई योजनाएं जारी की हैं। यहां समस्तीपुर में ड्रोन की खरीद के लिए स्नातक आवेदन कर सकते हैं। इनको ज्यादा अनुदान दिया जाएगा। दूसरी ओर अनुबंध के आधार पर खेती की शर्ताें को तोड़ने पर सरकारी लाभ नहीं मिल पाएगा।
खबर विस्तार : -
समस्तीपुरः बिहार के समस्तीपुर में किसानों का काम आसान हो जाएगा। यहां के किसानों को उनकी खेतों की रखवाली करने के लिए जिले में पहली बार 18 किसान ड्रोन बैंक स्थापित किए जाने वाले हैं। यदि सब ठीक रहा तो जल्द ही किसानों को ड्रोन से ही कीटनाशक छिड़कने का अवसर मिल जाएगा।
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बैंक योजना के अंतर्गत 500000 तक अनुदान तय
राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 में कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत काम कर रही है है। कृषि विभागीय स्तर पर ड्रोन व्यवस्था के लिए 1.80 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। 18 किसान ड्रोन बैंक योजना के अंतर्गत 500000 तक अनुदान दिया जा सकता है। प्रदेश की महत्वपूर्ण योजना में सी प्रमाण पत्र के बाद ही वह अनुबंध तोड़ सकते हैं।
ड्रोन के साथ खेती के सहायक उपकरण मिलेंगे
सरकार के किसान ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर योजना में आवेदकों की संख्या काफी हो सकती है। योजना के सही ढंग से क्रियान्वयन के लिए इसे श्रेणियों में कर दिया गया है। इसमें सामान्य श्रेणी के 15 और अनुसूचित जाति के तीन किसान ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर योजना का लाभ ले पाएंगे। किसान केंद्रों के अंतर्गत इस व्यवस्था को आगे बढ़ाया जाएगा। स्थानीय स्तर पर ही फसलों में कीटनाशक, तरल उर्वरक, पोषक तत्व के छिड़काव के लिए ड्रोन सेवा उपलब्ध रह सकती है। किसानों को ड्रोन के साथ खेती के कई सहायक उपकरण भी दिए जाएंगे।
प्रत्येक किसान ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर की परियोजना लागत 10 लाख रुपये तय कर दी गई है। इस योजना को कृषि क्षेत्र में लागू किया जा रहा है, पर वही किसान इसका लाभ ले पाएंगे जो स्नातक आवेदक होंगे। इनको परियोजना लागत का 50 प्रतिशत अनुदान देना होगा। बाकी की व्यवस्था किसान खुद कम अनुदान के तहत करेगा। यह राशि अधिकतम पांच लाख रुपये अनुदान में निर्धारित हैं। जिन किसानों ने स्नातक नहीं किया है, उनको 40 प्रतिशत, अधिकतम चार लाख रुपये तक अनुदान देने का निर्णय किया गया है।
कम समय में बड़े क्षेत्र को कवर किया जा सकता
अभी तक खेती में जो पारंपरिक तरीके से कीटनाशक और तरल उर्वरक का छिड़काव किया जाता रहा है, उसमें अधिक श्रम और समय लगता है। इस लिहाज से यह खेती महंगी हो सकती है। सरकार की नई नीति में ड्रोन से कम समय में बड़े क्षेत्र को कवर किया जा सकता है। इसमें दवाओं की मात्रा समान रूप से रहेगी। यह छिड़काव व्यवस्था को नियंत्रित कर सकता है। उप निदेशक, कृषि यांत्रिकरण, कृषि विभा से सुरेन्द्र भारती कहते हैं कि इच्छुक किसान विभाग के पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
दवा की मात्रा और छिड़काव समान होगा
सरकार का छोटे किसानों पर भी ध्यान है। इसलिए उनको ड्रोन खरीदने के लिए बड़ी राशि खर्च करने की जरूरत नहीं होगी। ऐसे किसान कस्टम हायरिंग सेंटर से ड्रोन सेवा ले सकेंगे। पारंपरिक खेती के बजाय यह विकसित खेती भी कर सकते हैं। इस व्यवस्था से किसानों को अच्छे बीज के अलावा सरकार से कई लाभ मिल रहे हैं। जिले को 18 ड्रोन बैंक का लाभ पाने के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। दूसरी ओर समस्तीपुर समेत 10 जिलों समस्तीपुर, लखीसराय, मुंगेर, पटना, नालंदा, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर और कटिहार में जैविक खेती में भी विकास कार्य किए जाने हैं। यहां पर करीब पांच करोड़, 26 लाख से ज्यादा सरकार खर्च कर सकती है।
मिट्टी की जांच पर भी सरकार करेगी खर्च
इसमें प्रति एकड़ 1,500 रुपये अग्रिम अनुदान की व्यवस्था की गई है। खेती को और मजबूत आधार बनाने के लिए प्रशिक्षण व्यवस्था भी की जा रही है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षण देने वाले को एवं मिट्टी की जांच कराने वाले पर भी धन खर्च किया जाएगा। सरकार की ओर से जारी धन जैविक प्रमाणीकरण पर खर्च किया जाएगा। इसमें प्रति एकड़ के हिसाब से खर्च करने का प्रावधान है।
सरकार की ओर से जारी किए गए नियमों के तहत काम करने वाले किसान योजनाओं का लाभ लें। इससे उनको अनुबंध की अड़चन का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही उनकी जैविक खेती में सरकार कई तरह से मदद कर रही है। किसानों को इनमें मोटा अनाज का भी लाभ मिल सकता है। बिहार सरकार मोटा अनाज को बोने के लिए प्रात्साहित कर रही है।
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