बुखार में 24 घंटे की देरी पड़ सकती है भारी, बरसात में डेंगू-मलेरिया का खतरा अधिक बढ़ा, जांच जरूरी
खबर सार :-
डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया से बचाव के लिए केवल जागरूकता नहीं, बल्कि मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था जरूरी है। समय पर जांच और इलाज में देरी मरीजों के लिए खतरा बढ़ा सकती है। सरकार, स्वास्थ्य विभाग और नागरिकों के संयुक्त प्रयास से ही संक्रमण पर नियंत्रण संभव है। मानसून में बुखार को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है, इसलिए सतर्कता और त्वरित उपचार सबसे जरूरी है।
खबर विस्तार : -
Dengue in Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बरसात की शुरुआत के साथ ही डेंगू, मलेरिया और अन्य संचारी रोगों का खतरा बढ़ने लगा है। शहर में सरकारी और निजी अस्पतालों में डेंगू के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, इसकी सबसे बड़ी वजह जगह-जगह जमा कूड़ों का ढेर, जलभराव और ठहरे हुए पानी में पनपने वाले मच्छर हैं। बरसात के मौसम में संक्रामक बीमारियों से बचाव को लेकर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की तरफ से की जा रही तैयारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेष संचारी रोग नियंत्रण और दस्तक अभियान के बावजूद कई क्षेत्रों में मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने, समय पर जांच कराने और मरीजों को त्वरित उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था कमजोर नजर आ रही है। विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि बुखार के शुरुआती 24 घंटे बेहद अहम होते हैं, लेकिन जांच और इलाज में देरी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है।
बीमारियों पर नियंत्रण को जन भागीदारी और प्रशासनिक कार्रवाई जरूरीः डॉ. विमला वेंकटेश
केजीएमयू माइक्रोबायोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. विमला वेंकटेश ने संचारी रोगों पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में कहा कि डेंगू, मलेरिया और अन्य मच्छर जनित बीमारियों पर नियंत्रण के लिए केवल अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों की भागीदारी और जमीनी स्तर पर प्रशासनिक कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने कहा कि घरों और आसपास जमा पानी को हटाकर मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म किया जा सकता है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के बावजूद शहरों और ग्रामीण इलाकों में सफाई व्यवस्था, जलभराव नियंत्रण और नियमित निगरानी में कमी देखने को मिलती है। प्रशासनिक स्तर पर समय रहते फॉगिंग, लार्वा जांच और जागरूकता अभियान प्रभावी तरीके से लागू नहीं होने पर संक्रमण तेजी से फैलने का खतरा बना रहता है।

साफ पानी में भी पनपता है डेंगू का मच्छर
डॉ. विमला वेंकटेश ने बताया कि डेंगू की बीमारी फैलाने वाला एडीज मच्छर गंदे पानी में नहीं, बल्कि साफ और रुके हुए पानी में पनपता है। इसलिए लोगों को सप्ताह में कम से कम एक बार घरों में रखे कूलर, गमले, बाल्टियां, पानी की टंकियां, पुराने टायर और अन्य सामानों की जांच करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी मशीनरी के भरोसे बीमारी पर नियंत्रण संभव नहीं है। प्रशासन को जहां नियमित निगरानी और सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी, वहीं नागरिकों को भी अपने घर और आसपास स्वच्छता बनाए रखने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
बुखार के शुरुआती 24 घंटे सबसे महत्वपूर्ण
केजीएमयू की डॉ. शीतल वर्मा ने बताया कि मानसून का महीना संक्रमण काल होता है। इस दौरान आने वाले बुखार को सामान्य समझकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। लगातार तेज बुखार होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि समय पर जांच होने से डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, लेप्टोस्पायरोसिस और वायरल संक्रमण की पहचान आसानी से हो सकती है। देरी होने पर मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है और अस्पताल में भर्ती की नौबत आ सकती है। स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि कई बार मरीज शुरुआती लक्षणों के बाद जांच के लिए देर से पहुंचते हैं। वहीं, कई स्थानों पर जांच सुविधाओं की उपलब्धता और रिपोर्ट मिलने में देरी भी उपचार को प्रभावित करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बुखार को लेकर त्वरित जांच और सही उपचार व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है।
डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया में अंतर समझना आवश्यक
मच्छर जनित बीमारियों में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया सबसे प्रमुख हैं। इनके शुरुआती लक्षण कई बार एक जैसे दिखाई देते हैं, जिससे पहचान करना मुश्किल हो सकता है। डेंगू एडीज मच्छर से फैलने वाला वायरल संक्रमण है। इसमें तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, उल्टी और त्वचा पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर स्थिति में रक्तस्राव और प्लेटलेट्स में कमी जैसी समस्या हो सकती है। मलेरिया प्लाज्मोडियम परजीवी से होने वाली बीमारी है, जो संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलती है। इसमें ठंड लगना, कंपकंपी, तेज बुखार, पसीना आना, सिरदर्द और कमजोरी जैसे लक्षण आम हैं। मलेरिया की बीमारी से गंभीर रूप से पीड़ित मरीज के अंगों पर भी असर पड़ सकता है। वहीं दूसरी तरफ, चिकनगुनिया भी एडीज मच्छर से फैलने वाला वायरल संक्रमण है। इसमें तेज बुखार के साथ जोड़ों में गंभीर दर्द होता है। कई मरीजों में यह दर्द लंबे समय तक बना रह सकता है। इसलिए गंभीर बीमारियों के बारे में समय से पहचान होना बहुत जरूरी है।
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रोकथाम के नाम पर सिर्फ अभियान नहीं, प्रभावी कार्रवाई भी जरूरी
सरकार की ओर से संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इन अभियानों की सफलता नियमित निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। केवल पोस्टर, जागरूकता कार्यक्रम और घोषणाओं से संक्रमण पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सकता। प्रशासन को जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान, नियमित सफाई, मच्छर लार्वा नियंत्रण और स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच सुविधाओं को मजबूत करने की जरूरत है। समय पर जांच और इलाज में देरी रोकने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर बड़े अस्पतालों तक बेहतर समन्वय जरूरी है।

बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय
- सप्ताह में एक दिन कूलर और पानी की टंकियों को खाली कर साफ करें।
- गमलों, टायरों, बाल्टियों और अन्य बर्तनों में पानी जमा न होने दें।
- पूरी बांह के कपड़े पहनें और मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
- घर के अंदर-बाहर और आसपास नियमित सफाई रखें।
- तेज बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
- बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक न लें।
खान-पान में क्या सावधानी बरतें?
बरसात के मौसम में दूषित पानी और संक्रमित भोजन से डायरिया, टाइफाइड, वायरल संक्रमण और पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। संक्रमण से बचने के लिए इन सावधानियों का पालन करें-
- साफ और उबला हुआ पानी पिएं। पानी की शुद्धता को लेकर संदेह हो तो उसे उबालकर या फिल्टर करके ही इस्तेमाल करें।
- बाहर का कटा हुआ फल, सलाद और खुले में रखे खाद्य पदार्थ खाने से बचें। बारिश में इनमें बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनप सकते हैं।
- ताजा और गर्म भोजन करें। लंबे समय तक रखा हुआ खाना खाने से फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ सकता है।
- सब्जियों और फलों को अच्छी तरह धोकर इस्तेमाल करें। पत्तेदार सब्जियों की सफाई पर विशेष ध्यान दें।
- खाना बनाने से पहले और खाने से पहले हाथ जरूर धोएं। साबुन से हाथ साफ करना संक्रमण रोकने का आसान तरीका है।
- कच्चे और पके भोजन को अलग रखें। इससे हानिकारक बैक्टीरिया फैलने का खतरा कम होता है।
- बासी भोजन और खुले पेय पदार्थों से दूरी बनाए रखें।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
मानसून के दौरान संक्रमण फैलने का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है। इसलिए ऐसे मौसम में लगातार तेज बुखार, सिर और शरीर में दर्द, आंखों के पीछे दर्द, उल्टी, अत्यधिक कमजोरी, त्वचा पर लाल चकत्ते, ठंड लगना, कंपकंपी, सांस लेने में परेशानी या शरीर से खून आने जैसी स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए। संक्रामक रोगों से बचाव में समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार दवा देना बहुत जरूरी होता है। इसमें लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
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FAQ (पूछे जाने वाले सवाल)….
1. डेंगू और मलेरिया में शुरुआती लक्षण कैसे पहचानें?
डेंगू में तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर व जोड़ों में दर्द और त्वचा पर लाल चकत्ते हो सकते हैं। वहीं मलेरिया में तेज बुखार के साथ ठंड लगना, कंपकंपी और पसीना आने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। सही पहचान के लिए समय पर जांच जरूरी है।
2. बुखार आने के बाद कितने समय में जांच करानी चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार बुखार के शुरुआती 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। लगातार बुखार रहने पर बिना देरी किए डॉक्टर की सलाह लेकर जांच करानी चाहिए, ताकि डेंगू, मलेरिया या अन्य संक्रमण की समय पर पहचान हो सके।
3. डेंगू से बचाव के लिए सबसे जरूरी उपाय क्या हैं?
डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर साफ और रुके हुए पानी में पनपता है। इसलिए कूलर, गमले, टंकी, बाल्टी और पुराने टायरों में पानी जमा न होने दें। घर और आसपास सफाई रखें तथा मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं।
4. तेज बुखार में किन लक्षणों पर तुरंत अस्पताल जाना चाहिए?
लगातार तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, सांस लेने में परेशानी, उल्टी, शरीर पर लाल चकत्ते, खून आने की शिकायत या प्लेटलेट्स कम होने के संकेत दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
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