निरीक्षण तक सीमित रहने का खामियाजा है Waterlogging, प्रभावित क्षेत्रों में काम नहीं आ रहा LUCKNOW नगर निगम का आश्वासन
खबर सार :-
लखनऊ नगर निगम लाख कहे कि सब ठीक है, लेकिन सब ठीक होता तो लोग जोन-3 और जोन-6 में मैदान में, रैन बसेरों में, जलभराव में और रिश्तेदारों के यहां रहने को मजबूर नहीं होते। भोजन-पानी, नावों से रेस्क्यू और स्वास्थ्य सुरक्षा के इंतजाम काम नहीं आ रहे हैं।
खबर विस्तार : -
लखनऊ: गोमती नदी का जलस्तर बढ चुका है। बस्तियों में Waterlogging हो रहा है। इस हालत से बचाने के लिए municipal corporation प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य कर रहा है, लेकिन यह बहुत काम नहीं आ रहा है। लोगा अपने घरों को छोड़कर जा रहे हैं। Municipal Commissioner गौरव कुमार और अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्त प्रभावित जोन-3 और जोन-6 में लोगों को राहत दिलाने की कोशिशें कर रहे हैं।
municipal corporation की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार सक्रिय भी हैं। दरअसल, कोशिश चल रही है कि जल्द ही पानी कम हो जाए और मीडिया में खबरें आनी बंद हो जाएं। एक ओर जहां घरों तक पानी भरा हुआ है, वहीं नागरिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ ही भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाएं, आश्रय, प्रकाश, स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा की सुविधाएं उपलब्ध कराया जा रहा है। दरअसल, यह परेशानी आज की नहीं है।
यादव चौराहे से मामा कॉलोनी तक 200 सफाईकर्मी तैनात
यादव चौराहे से मामा कॉलोनी तक 200 सफाईकर्मी तैनात किए गए हैं। साथ ही दाउदनगर, मामा कॉलोनी, लोहरामऊ और मिल्लतनगर में राहत व्यवस्था की जा रही है। यहां पर अस्थायी shelters से लेकर पेयजल, भोजन और स्वास्थ्य सुरक्षा तक इंतजाम किए गए हैं। निगम राजनीतिज्ञों की तरह कह रहा है कि व्यवस्था मजबूत है। इसके पीछे के कारण भी जानना जरूरी है। सच्चाई यह कि निगम के पास सालों से इन हालातों से निपटने की योजना थी ही नहीं। नए-नए Municipal Commissioner आते रहे और अधिकारियों या राजनीतिज्ञों के कहने पर वह पंप चेक करने पहुंचते रहे।
कई मोहल्ले ऐसे हैं, जहां सालों पहले बाढ़ और Waterlogging का सामना करना पड़ा था। इस बार कई सालों बाद यह हालात देखे गए हैं। वरना बारिश में अधिकारियों और माननीयों को खास मोहल्लों में जाने के बजाय इन इलाकों में, जहां Waterlogging है वहां पहुंचना चाहिए। दाउदनगर, मामा कॉलोनी, लोहरामऊ और मिल्लतनगर के साथ ही जोन-6 के हयात नगर, लक्ष्मी हॉस्पिटल गली, दौलत खेड़ा, मुन्नू खेड़ा, टांड खेड़ा, सुखलाल खेड़ा, सैंथा, गुलमी खेड़ा और हयातगंज सहित विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों में नगर निगम की टीमें राहत कार्यों में जुटी हैं।
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परिणाम लोगों के सामने है। यदि लगातार तीन दिन जोरदार बारिश हो जाए, तो कल्पना की जा सकती है, कि पानी कहां कहां होगा। लोगों को रैनबसेरों में रहना पड़ रहा है। दाउदनगर क्षेत्र में 10, जबकि लोहरामऊ और मिल्लतनगर में एक-एक अस्थायी shelters शामिल है। जोन-6 क्षेत्र में करीब 250 परिवारों को बाहर निकाला गया है, जबकि 300 लोग रैन बसेरे में रह रहे हैं। यहां तक कि लोगों को पानी की किल्लत उठानी पड रही है। दाउदनगर में रात के समय अंधेरा रहता है।
municipal corporation की कुछ लाइटें लगवाई गई हैं। हर ओर बीमारी पसरने का डर बन रहा है। Waterlogging वाले और प्रभावित स्थानों पर ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव भी कराया जा रहा है, ताकि संक्रमण और बीमारियों की आशंका को कम किया जा सके। अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्त ने बताया कि municipal corporation द्वारा केवल वर्तमान Waterlogging की स्थिति से निपटने पर ही नहीं, बल्कि बाढ़ का पानी कम होने के बाद सामने आने वाली चुनौतियों की भी पहले से तैयारी की जा रही है।
मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए क्षेत्रवार टीमें निर्धारित
पानी उतरने के बाद सड़कों और बस्तियों में जमा गंदगी, कीचड़ और कचरे की सफाई तथा संभावित जलजनित और मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए क्षेत्रवार टीमें निर्धारित की जा रही हैं। इन टीमों को संबंधित क्षेत्रों में तत्काल सफाई, ब्लीचिंग पाउडर एवं आवश्यक दवाओं के छिड़काव तथा स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए सक्रिय किया जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में 90 नावें लगाई गई हैं। राहत एवं खाद्य सामग्री की लोडिंग-अनलोडिंग में municipal corporation की टीमें सहयोग कर रही हैं।
दाउदनगर में दो शिफ्टों में 20-20 कर्मचारियों के साथ ही लोहरामऊ और मिल्लतनगर में 20-20 कर्मचारियों को इस कार्य में लगाया गया है। सबसे ज्यादा मच्छरों से फैलने वाली बीमारी का डर सता रहा है। इसीलिए दो बड़ी मशीनों में 500-500 लीटर क्षमता के टैंकरों से एंटी लार्वा दवा एवं एमएलओ का छिड़काव कराया जा रहा है। municipal corporation की ओर से बताया गया है कि छह मैनुअल मशीनों से एंटी लार्वा एवं फॉगिंग का कार्य कराया जा रहा है, जबकि छह बड़ी फॉगिंग मशीनें भी प्रभावित क्षेत्रों में लगाई गई हैं। समस्या Waterlogging की नहीं, जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लेने की है।
municipal corporation के अफसर सालों से एक ही जगह पर जमे हुए हैं, जिनके कंधे पर जिम्मेदारी रहती है, उनको करीब तीन साल में हटा दिया जाता है। क्षेत्र की जानकारी भी सही से नहीं हो पाती है। आफिस के अधिकारी सालों से जमा हैं। उनकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। आखिर जोन छह और चार के अफसरों ने Waterlogging और बाढ़ वाले स्थानों की स्थिति बराबर अफसरों को क्यों नहीं बताई? यही हाल रहा तो दशकों तक बाढ़ आने पर इसका समाधान नहीं हो पाएगा। जरूरत है कि जब पानी उतर जाए और मौजूदा समस्या से निपट लिया जाए, हमेशा के लिए पुख्ता इंतजाम पर काम किया जाए।
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