अल नीनो से बढ़ रही गर्मी, अगले छह महीने में 4.5 लाख से ज्यादा मौतों का अनुमान; भारत समेत कई देशों को चेतावनी

खबर सार :-

भारत, इंडोनेशिया और नाइजीरिया और अमेरिका में अल नीनो का असर दिख रहा है। जलवायु वैज्ञानिकों के अनुसार, अगले छह महीने में 4.5 लाख लोगों की मौत हो सकती है।
भारत समेत कई देशों में अल नीनो का असर, 4.5 लाख मौतों का अनुमान

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: जलवायु वैज्ञानिकों के एक नए आकलन के अनुसार, प्रशांत महासागर में बन रहा बेहद शक्तिशाली अल नीनो (El Niño) अगले छह महीनों में अत्यधिक गर्मी के कारण दुनियाभर में 4,50,000 से ज्यादा लोगों की जान ले सकता है। यह अनुमान जलवायु परिवर्तन से जुड़े बढ़ते तापमान के कारण पहले से हो रही मौतों के अलावा है। यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब ने इन नतीजों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए एक बयान जारी किया।

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस असाधारण अल नीनो का असर इंडोनेशिया, भारत और नाइजीरिया से लेकर अमेरिका तक के इलाकों में महसूस किया जा सकता है। इसके अलावा, सूखे, जंगल की आग और बाढ़ जैसी घटनाओं के कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौत की आशंका है। रिपोर्ट में प्रकाशित आकलन के अनुसार, गर्मी से होने वाली मौतों का अनुमान अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग-अलग है। इसका मकसद उन इलाकों की पहचान करना है, जहां समय पर कदम उठाकर लोगों की जान बचाई जा सकती है। ऐसे उपायों में गर्मी का बेहतर पूर्वानुमान, कूलिंग सेंटर बनाना, भीषण गर्मी के दौरान मेडिकल सुविधाओं में ज्यादा स्टाफ़ की तैनाती और बाहर काम करने वालों के लिए सुरक्षा नियम शामिल हैं।

वैश्विक जलवायु के असर को बढ़ा सकता है अल नीनो

जलवायु वैज्ञानिकों ने इस घटना की तीव्रता को बहुत असामान्य बताया है। उनके अनुसार, उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य स्तर से काफी बढ़ गया है। यह गर्मी पहले से ही गर्म हो रही वैश्विक जलवायु के असर को और बढ़ा रही है। यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के प्रोफेसर और क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के सह-संस्थापक माइकल ग्रीनस्टोन (जो इस आकलन के सह-लेखक भी हैं) ने कहा कि संभावित 4,50,000 मौतों का अनुमानित आंकड़ा इतना बड़ा है कि इसे पूरी तरह समझना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने बताया कि यह संख्या माता-पिता, बच्चों, बुज़ुर्गों, पड़ोसियों और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जी रहे आम लोगों को दर्शाती है।

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सामान्य जलवायु में बदलाव

अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है जिसमें मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य स्तर से ऊपर चला जाता है। इससे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बारिश, तापमान और हवा के सामान्य पैटर्न में गड़बड़ी होती है। मौजूदा घटना ऐसे समय में हो रही है जब मानवीय गतिविधियों के कारण वैश्विक तापमान पहले ही बढ़ चुका है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह अतिरिक्त गर्मी अल नीनो से जुड़े प्रभावों को और बढ़ा सकती है।

भीषण गर्मी और सूखे का खतरा

अल नीनो कुछ क्षेत्रों में भीषण गर्मी और सूखे का खतरा बढ़ा सकता है, जबकि अन्य क्षेत्रों में भारी बारिश, बाढ़ और तूफान के हालात पैदा कर सकता है। यह कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि गर्मी से होने वाली मौतों के अनुमान असल में संभावित जोखिम का आकलन हैं, न कि कोई पक्की भविष्यवाणी। सरकारें और स्थानीय प्रशासन इस जानकारी का इस्तेमाल पहले से तैयारी करने के लिए कर सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि अल नीनो के असर को पूरी तरह से रोकना मुमकिन नहीं है, लेकिन बेहतर तैयारी और मौसम से जुड़े जोखिमों की समय पर पहचान करके इससे होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।

FAQ

1- अल नीनो क्या है?

अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर की सतह का तापमान बढ़ता है और मौसम के पैटर्न में बदलाव आते हैं।

2- अल नीनो का प्रभाव किन-किन देशों पर है?

वैज्ञानिकों के अनुसार, अल नीनो का असर इंडोनेशिया, भारत और नाइजीरिया से लेकर अमेरिका तक के इलाकों में महसूस किया जा सकता है।

3- अल नीनो के प्रभाव से क्या होता है?

अल नीनो के प्रभाव से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बारिश, तापमान और हवा के सामान्य पैटर्न में गड़बड़ी होती है। अल नीनो कुछ क्षेत्रों में भीषण गर्मी और सूखे का खतरा बढ़ा सकता है, जबकि अन्य क्षेत्रों में भारी बारिश, बाढ़ और तूफ़ान के हालात पैदा कर सकता है। 

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