मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है शहडोल, 4 टाइगर रिजर्व को जोड़ते हैं प्राकृतिक काॅरिडोर
खबर सार :-
मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के लिए शहडोल जिले का महत्वपूर्ण स्थान है। यहां कोई टाइगर रिजर्व नहीं है, लेकिन इसका वन क्षेत्र 4 टाइगर रिजर्व को जोड़ते हैं।
खबर विस्तार : -
भोपाल: मध्य प्रदेश का शहडोल जिला अपने समृद्ध वन संसाधनों और जैव विविधता के कारण वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। जिले के घने जंगल बाघ, हाथी, तेंदुए और भालू जैसे विभिन्न जंगली जानवरों की आवाजाही के लिए प्राकृतिक गलियारों (कॉरिडोर) का काम करते हैं। जनसंपर्क अधिकारी के.के. जोशी ने शनिवार को बताया कि शहडोल जिले में मौजूद प्राकृतिक गलियारे चार टाइगर रिजर्व को आपस में जोड़ते हैं। शहडोल की भौगोलिक स्थिति मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विभिन्न वन क्षेत्रों के बीच वन्यजीवों की आवाजाही को सुगम बनाने में अहम भूमिका निभाती है।
उन्होंने बताया कि हालांकि शहडोल खुद कोई टाइगर रिजर्व नहीं है, लेकिन इसका वन क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण है। यह उन वन्यजीव गलियारों का हिस्सा है जो बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (उमरिया जिले में), कान्हा टाइगर रिजर्व, संजय गांधी टाइगर रिजर्व (सीधी जिले में) और अचानकमार टाइगर रिजर्व (छत्तीसगढ़ में) को जोड़ते हैं। विशेष रूप से, दक्षिण वन प्रभाग (साउथ फॉरेस्ट डिवीजन) के अंतर्गत आने वाला वन क्षेत्र इन संरक्षित वन क्षेत्रों के बीच वन्यजीवों की आवाजाही के लिए एक मुख्य कड़ी का काम करता है।
प्राकृतिक आवास, भोजन और पानी का महत्व
जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार, शहडोल के घने जंगल वन्यजीवों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाते हैं, यहां साल के पेड़, प्राकृतिक जल स्रोत और प्रचुर मात्रा में भोजन उपलब्ध है। बाघ अपने क्षेत्र का विस्तार करने, नए आवास की तलाश करने या भोजन खोजने के लिए दूसरे वन क्षेत्रों में जा सकते हैं। इसी तरह, हाथी भी अपने पारंपरिक प्रवास मार्गों से लंबी दूरी तय करते हैं। इस प्राकृतिक आवाजाही के दौरान, शहडोल के जंगल वन्यजीवों को एक वन क्षेत्र से दूसरे वन क्षेत्र तक जाने में मदद करते हैं।
उमरिया जिले में स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व अपनी बाघ आबादी के लिए प्रसिद्ध है। वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से इस क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी भी काफी महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ से आकर अनूपपुर और शहडोल के वन क्षेत्रों से गुजरते हुए बांधवगढ़ तक पहुंचने वाले हाथियों की आवाजाही इन जंगलों के महत्व को दर्शाती है। 2018 के आसपास बांधवगढ़ क्षेत्र में हाथियों के आने के बाद से, वन्यजीव संरक्षण के नजरिए से उनकी उपस्थिति लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है।
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वन्यजीव गलियारों के संरक्षण का महत्व
वन्यजीव गलियारे ऐसे प्राकृतिक रास्ते होते हैं, जो जंगली जानवरों को अलग-अलग वन क्षेत्रों के बीच स्वतंत्र रूप से आने-जाने की सुविधा देते हैं। इन रास्तों में न केवल जंगल, बल्कि नदियां, पहाड़ियां, गांव और इंसानी बस्तियां भी शामिल हो सकती हैं। इन गलियारों (कॉरिडोर) को सुरक्षित रखने से यह सुनिश्चित होता है कि वन्यजीव अलग-अलग जंगली इलाकों के बीच आ-जा सकें और आपस में जुड़े रहें। जंगलों की कटाई, निर्माण कार्य या इंसानी गतिविधियों के कारण इन गलियारों में रुकावट आने से वन्यजीवों की आवाजाही बाधित हो सकती है। इस तरह की दखलंदाजी उनके प्राकृतिक आवासों के बीच के जुड़ाव को कमजोर करती है और इंसानों व वन्यजीवों के बीच टकराव का खतरा बढ़ा देती है। इसलिए, जैव विविधता को बचाने और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इन गलियारों का संरक्षण बहुत जरूरी है।
वन्यजीवों की मौजूदगी को लेकर सतर्कता
बाघों और हाथियों की आवाजाही वाले इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को सतर्क रहना चाहिए। यदि जंगल या गांव के पास कोई जंगली जानवर दिखाई दे, तो उसके करीब जाने, उसे घेरने या उकसाने से बचना चाहिए; इसके बजाय, तुरंत वन विभाग को सूचित करना चाहिए। इसके अलावा, जंगली इलाकों में उनके प्राकृतिक आवास, पानी और भोजन के स्रोतों को बनाए रखना वन्यजीव संरक्षण का एक अहम हिस्सा है। शहडोल, अनूपपुर और उमरिया के जंगली इलाकों की सुरक्षा, पूरे संभाग की प्राकृतिक धरोहर को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शहडोल के जंगल, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बड़े जंगली इलाकों के बीच वन्यजीवों की आवाजाही के लिए एक अहम कड़ी का काम करते हैं। इन प्राकृतिक गलियारों की सुरक्षा करना बाघों, हाथियों और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण, जैव विविधता को बनाए रखने, और इंसानों व वन्यजीवों के बीच टकराव के खतरे को कम करने के लिए बहुत जरूरी है।
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