अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर “पानी पेड़ बचाओ अभियान” की भव्य गोष्ठी आयोजित
खबर सार :-
अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें पर्यावरण संरक्षण, जल संकट और पेड़ों की लगातार कटाई जैसे कई मुद्दों पर चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त, लोगों से पर्यावरण को बचाने के लिए एकजुट होने का आग्रह किया गया।
खबर विस्तार : -
सोनभद्र: रॉबर्ट्सगंज में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर “पानी पेड़ बचाओ अभियान” के तहत एक भव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, जल संकट, वृक्षों की अंधाधुंध कटाई और जैव विविधता पर बढ़ते खतरे जैसे गंभीर विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी सुरेश सिंह कुशवाहा ने की।
आने वाली पीढ़ियों पर संकट
गोष्ठी को संबोधित करते हुए अभियान के संयोजक पवन कुमार सिंह ने कहा कि प्रकृति का संतुलन बनाए रखने के लिए जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में लगातार बढ़ता प्रदूषण, जल स्रोतों का सूखना और पेड़ों की कटाई पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। यदि समय रहते पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को भारी संकट का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि जैव विविधता केवल पेड़-पौधों और वन्य जीवों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सम्पूर्ण मानव जीवन और पृथ्वी के अस्तित्व से जुड़ा विषय है। प्राकृतिक संसाधनों का संतुलन बिगड़ने से मौसम चक्र, खेती, जलवायु और मानव स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
बड़ी संख्या में पहुंचे लोग
अभियान के सह-संयोजक विनीत श्रीवास्तव एडवोकेट ने कहा कि पेड़, जल स्रोत और वन्य जीव पर्यावरण की अमूल्य धरोहर हैं। इन्हें बचाना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने, जल संरक्षण अपनाने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज को पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक रूप से आगे आना होगा, तभी भविष्य सुरक्षित रह सकेगा।
कार्यक्रम का संचालन कामता प्रसाद यादव एडवोकेट ने किया। गोष्ठी में राजेंद्र कुमार यादव, विजय बहादुर सिंह, विमल प्रसाद सिंह, टीटू प्रसाद गुप्ता, दीप नारायण पटेल, आदर्श देव पांडेय, राजेश कुमार, नवीन कुमार पांडेय और संतोष चतुर्वेदी सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
गोष्ठी के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण, जल बचाने और अधिक से अधिक पेड़ लगाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि प्रकृति की रक्षा करना ही मानव जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
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