5 लाख तक मुफ्त इलाज की गारंटी, 2,000 प्रक्रियाएं शामिल; AI से मजबूत हुआ आयुष्मान का फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम
खबर सार :-
आयुष्मान भारत PM-JAY के तहत 13 करोड़ से ज्यादा लोगों का इलाज हो चुका है और 48 करोड़ से अधिक कार्ड बनाए गए हैं। योजना में 5 लाख रुपये तक का कवर, करीब 2,000 प्रक्रियाएं और AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन शामिल है।
खबर विस्तार : -
Ayushman Bharat Scheme: आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) के तहत देश में अब तक 13 करोड़ से ज्यादा लोगों का इलाज किया जा चुका है। वहीं, योजना के तहत 48 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के सीईओ सुनील कुमार बरनवाल ने योजना की प्रगति और इसके तहत इलाज की प्रक्रिया से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
सुनील कुमार बरनवाल के मुताबिक, पिछले आठ वर्षों में आयुष्मान भारत योजना के तहत 13 करोड़ से अधिक लोगों को इलाज की सुविधा मिली है। इस दौरान योजना के तहत 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि खर्च हुई है। उन्होंने इसे गरीब परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
48 करोड़ से ज्यादा कार्ड, 5 लाख रुपये तक का कवर
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ ने बताया कि आयुष्मान कार्ड परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की गारंटी देता है। योजना में करीब 2,000 प्रक्रियाएं शामिल हैं। अधिक से अधिक पात्र लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए कार्ड बनाने की प्रक्रिया लगातार जारी है। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में लोगों को योजना के दायरे में लाने के लिए कार्ड बनाने का अभियान आगे भी जारी रहेगा। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सुरक्षा की गारंटी को ज्यादा से ज्यादा परिवारों तक पहुंचाना योजना का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
AI से संदिग्ध क्लेम की पहचान
योजना को मजबूत बनाने के लिए तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। बरनवाल ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम के साथ डिजिटल हेल्थ सुविधाओं को लगातार बेहतर किया जा रहा है। इसका उद्देश्य इलाज से जुड़े क्लेम की निगरानी और संदिग्ध मामलों की पहचान को अधिक प्रभावी बनाना है। इम्प्लांट से जुड़े क्लेम की प्रक्रिया के बारे में उन्होंने बताया कि अस्पतालों से इस्तेमाल किए गए इम्प्लांट की पूरी जानकारी ली जाती है। इम्प्लांट का बिल और बारकोड भी रिकॉर्ड में लिया जाता है। आईटी सिस्टम इस जानकारी की जांच करता है। यदि किसी मामले में एक से ज्यादा इम्प्लांट के इस्तेमाल का पता चलता है, तो सिस्टम उसे संदिग्ध मानकर आगे की जांच प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
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पैकेज में इलाज से जुड़े खर्च शामिल
बरनवाल ने स्पष्ट किया कि योजना के तहत पैकेज को बंडल पैकेज के रूप में तैयार किया गया है। इसमें संबंधित प्रक्रिया के साथ दवाएं और कंज्यूमेबल समेत इलाज से जुड़े खर्च शामिल होते हैं। अलग-अलग इस्तेमाल होने वाली चीजों के लिए सामान्य तौर पर अलग से भुगतान या अलग दर निर्धारित नहीं की जाती। उन्होंने भारत में निर्मित वस्तुओं की कीमत को लेकर भी कहा कि कम कीमत का अर्थ यह नहीं है कि उत्पाद की गुणवत्ता खराब है। उनके अनुसार, इलाज के दौरान इस्तेमाल किए गए इम्प्लांट की गुणवत्ता और उससे जुड़ी जानकारी की निगरानी के लिए क्लेम प्रक्रिया में जरूरी दस्तावेज और विवरण लिए जाते हैं।
गरीब परिवारों के खर्च पर असर
आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को अस्पताल में भर्ती होकर होने वाले बड़े इलाज के खर्च से आर्थिक सुरक्षा देना है। बरनवाल के अनुसार, पिछले आठ वर्षों में योजना के तहत 13 करोड़ से अधिक लोगों का इलाज और 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का व्यय इसके बड़े पैमाने को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में परिवारों को इलाज की सुविधा मिलने के साथ उनके स्वास्थ्य संबंधी खर्च का बोझ कम करने में योजना की भूमिका रही है। वहीं, नए कार्ड बनाने और डिजिटल निगरानी व्यवस्था को विस्तार देने का काम आगे भी जारी रहेगा। योजना के बढ़ते दायरे के साथ तकनीक आधारित निगरानी, क्लेम की जांच और इम्प्लांट से संबंधित रिकॉर्डिंग जैसी व्यवस्थाओं पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे योजना के तहत होने वाले उपचार और भुगतान से जुड़े डेटा की निगरानी को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
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FAQ (पूछे जाने वाले सवाल)...
1. आयुष्मान भारत योजना के तहत कितना मुफ्त इलाज मिलता है?
आयुष्मान भारत PM-JAY के तहत पात्र परिवारों को 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है।
2. आयुष्मान भारत योजना में कितनी प्रक्रियाएं शामिल हैं?
योजना के तहत करीब 2,000 उपचार प्रक्रियाएं शामिल हैं।
3. योजना में AI का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है?
AI आधारित सिस्टम का इस्तेमाल संदिग्ध क्लेम और संभावित फ्रॉड की पहचान के लिए किया जा रहा है।
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