सेना को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधान देगा एनएसयूटी विश्वविद्यालय
खबर सार :-
भारतीय सेना और एनएसयूटी के बीच हुआ यह समझौता रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक और नवाचार को नई दिशा देगा। छात्रों, शिक्षकों और सेना के बीच सीधा सहयोग न केवल तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करेगा, बल्कि भारत को आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार राष्ट्र बनाने में भी सहायक सिद्ध होगा।
खबर विस्तार : -
NSUT AI defence collaboration: भारतीय सेना और दिल्ली स्थित नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (एनएसयूटी) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) संपन्न हुआ है। इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना के लिए अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीकी समाधान विकसित करना है। यह पहल देश की रक्षा तैयारियों को स्वदेशी तकनीक के माध्यम से और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
स्वदेशी तकनीक से रक्षा को मजबूती
इस समझौते के तहत एनएसयूटी के छात्र और फैकल्टी भारतीय सेना की वास्तविक तकनीकी समस्याओं पर आधारित परियोजनाओं पर कार्य करेंगे। सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, सॉफ्टवेयर टूल्स और अन्य आधुनिक तकनीकों पर समाधान तैयार किए जाएंगे। इससे सेना को देश में ही विकसित भरोसेमंद तकनीकी विकल्प उपलब्ध होंगे।
छात्रों और फैकल्टी को मिलेगा व्यावहारिक अनुभव
इस सहयोग से विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों को वास्तविक स्तर की रक्षा चुनौतियों को समझने और उनके समाधान पर काम करने का अवसर मिलेगा। छात्रों को अत्याधुनिक तकनीकी समस्याओं से रूबरू होने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा, जिससे उनकी शोध और नवाचार क्षमताएं विकसित होंगी। फैकल्टी भी लाइव प्रोजेक्ट्स के माध्यम से अपने ज्ञान और कौशल को और समृद्ध कर सकेंगे।
प्रशिक्षण और अनुसंधान को बढ़ावा
एनएसयूटी द्वारा फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम और विशेष रूप से तैयार किए गए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र से जुड़े नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी दक्षता को बढ़ाना है। यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी अनुसंधान और विकास को नई गति देगी।
रक्षा विशेषज्ञों की राय
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भारतीय सेना की तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। युवाओं की भागीदारी से न केवल नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में भी मदद मिलेगी। साथ ही, यह अकादमिक संस्थानों और रक्षा बलों के बीच मजबूत सहयोग का उदाहरण बनेगा।
अकादमिक संस्थानों की भूमिका पर जोर
गौरतलब है कि हाल ही में भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने एक महत्वपूर्ण कॉन्क्लेव में अकादमिक संस्थानों की भूमिका को रेखांकित किया था। उन्होंने कहा था कि तेजी से बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक और तकनीकी परिवेश में शोध और नवाचार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने शिक्षकों और छात्रों से अनुसंधान में उत्कृष्टता हासिल करने और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्यों के अनुरूप योगदान देने का आह्वान किया था।
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