इस राज्य में टैटू बनवाने के नियम होंगे सख्त? स्वास्थ्य विभाग ने केंद्र को भेजी रिपोर्ट

खबर सार :-

कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग टैटू इंक और असुरक्षित टैटू प्रक्रिया से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए नए नियम बनाने की तैयारी में है। केंद्र को रिपोर्ट भेजी गई है।केंद्र और राज्य स्तर पर इस दिशा में नियम तैयार होते हैं तो टैटू स्टूडियो, टैटू आर्टिस्ट और इंक निर्माताओं के लिए गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़े मानक तय किए जा सकते हैं।
कर्नाटक सरकार ने केंद्र को भेजी रिपोर्ट, टैटू बनवाने के बनेंगे नियम

खबर विस्तार : -

बेंगलुरुः कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग टैटू बनवाने से जुड़े संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए इस क्षेत्र को रेगुलेट करने की तैयारी कर रहा है। विभाग राज्य में टैटू बनाने के काम के लिए नई गाइडलाइंस तैयार करने के साथ-साथ इस संबंध में नए कानून की संभावना पर भी विचार कर रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, देश में फिलहाल टैटू बनवाने की प्रक्रिया और इसमें इस्तेमाल होने वाली स्याही से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को नियंत्रित करने के लिए कोई विशेष कानून नहीं है।

इसी को देखते हुए कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर टैटू बनाने और टैटू इंक के इस्तेमाल के लिए स्पष्ट नियम बनाने की मांग की है। विभाग ने इस संबंध में उपलब्ध अध्ययनों का विश्लेषण करने के बाद केंद्र को एक रिपोर्ट भी भेजी है। सरकार का फोकस खास तौर पर टैटू इंक में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न रसायनों और धातुओं से जुड़े संभावित स्वास्थ्य जोखिमों पर है।

केंद्र को भेजी गई रिपोर्ट

कर्नाटक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के तहत खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के कमिश्नर के. श्रीनिवास ने बुधवार को बताया कि विभाग ने टैटू से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों का अध्ययन किया है। इसके लिए एक कमेटी बनाई गई और उपलब्ध स्टडीज का विश्लेषण किया गया।

श्रीनिवास के अनुसार, इन अध्ययनों के आधार पर केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपी गई है और टैटू बनवाने के लिए नियम बनाए जाने की जरूरत बताई गई है। विभाग का मानना है कि टैटू के बढ़ते चलन को देखते हुए इस क्षेत्र के लिए स्पष्ट सुरक्षा मानक तय करना जरूरी है। अधिकारियों का कहना है कि टैटू बनवाने की प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली स्याही की गुणवत्ता और उसमें मौजूद पदार्थों की जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है। यदि इंक में ऐसे रसायन या धातुएं मौजूद हैं जो शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं, तो लंबे समय में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा पैदा हो सकता है।

टैटू इंक में केमिकल और धातुओं पर चिंता

स्वास्थ्य विभाग ने टैटू इंक की संरचना को लेकर विशेष चिंता जताई है। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ टैटू स्याही में विभिन्न प्रकार के केमिकल और धातुएं मौजूद हो सकती हैं। टैटू बनाने के दौरान सुई के जरिए इंक को त्वचा के भीतर पहुंचाया जाता है। विभाग का कहना है कि इस प्रक्रिया के दौरान कुछ पदार्थों के शरीर में प्रवेश करने की संभावना रहती है।

के. श्रीनिवास ने कहा कि जब ऐसे केमिकल और धातुएं शरीर में प्रवेश करती हैं तो समय के साथ उनका प्रभाव स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। विभाग इसी संभावित जोखिम को देखते हुए टैटू इंक के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट मानक तय करने की जरूरत महसूस कर रहा है। हालांकि, किसी विशेष टैटू इंक या उसके किसी घटक से किसी व्यक्ति को बीमारी होने का निष्कर्ष केवल इन सामान्य चिंताओं के आधार पर नहीं निकाला जा सकता। प्रस्तावित विशेषज्ञ समिति का उद्देश्य उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों का विस्तृत आकलन करना होगा।

एक्सपर्ट कमेटी करेगी स्वास्थ्य जोखिमों का अध्ययन

कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग टैटू से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों का विस्तृत अध्ययन करने के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी गठित करने की प्रक्रिया में है। यह समिति टैटू बनवाने की प्रक्रिया, इस्तेमाल होने वाली स्याही और स्टूडियो में अपनाई जाने वाली सुरक्षा व्यवस्थाओं का अध्ययन करेगी।

उम्मीद है कि विशेषज्ञ समिति टैटू इंक के कंपोजिशन, उसकी गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और टैटू आर्टिस्ट के काम करने के तरीकों पर अपनी सिफारिश देगी। इसके अलावा टैटू स्टूडियो में साफ-सफाई और संक्रमण से बचाव के उपायों को लेकर भी सुझाव दिए जा सकते हैं। सरकार की कोशिश ऐसी व्यवस्था तैयार करने की है जिसमें टैटू बनाने वाले कलाकारों और स्टूडियो के लिए बुनियादी सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य हो। इससे ग्राहकों को भी टैटू बनवाने से पहले सुरक्षित प्रक्रिया और स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी मिल सकेगी।

संक्रमण से बचाव भी बड़ी चुनौती

स्वास्थ्य विभाग की चिंता केवल टैटू इंक में मौजूद रसायनों तक सीमित नहीं है। अधिकारियों ने टैटू बनाते समय साफ-सफाई और उपकरणों की उचित स्टेरलाइजेशन प्रक्रिया नहीं अपनाए जाने से संक्रमण के खतरे की ओर भी ध्यान दिलाया है।

यदि टैटू बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को सही तरीके से साफ और स्टेरलाइज नहीं किया जाए या एक ही उपकरण का असुरक्षित तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ सकती है। अधिकारियों ने ऐसे मामलों में हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी जैसी गंभीर बीमारियों के संक्रमण की आशंका जताई है। इसी वजह से प्रस्तावित नियमों में टैटू स्टूडियो की स्वच्छता, उपकरणों को स्टेरलाइज करने की व्यवस्था और सुरक्षित तरीके से टैटू बनाने की प्रक्रिया को शामिल किए जाने की संभावना है।

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