पुराने कॉन्सेप्ट पर आधारित हैं गुजरात के नेचुरल वेलनेस सेंटर, आयुर्वेद-पंचकर्म और योग से कम हो रहीं असाध्य बीमारियां
खबर सार :-
गांधीनगर: गुजरात के नेचुरल वैलनेस सेंटर में पुराने आयुर्वेद मॉडल को भी जगह मिल रही है। हेल्थ केंद्र में हर्बल आयुर्वेदिक उपचार से लेकर पंचकर्म एक्यूपंक्चर मेडिटेशन और योग के जरिए तमाम पुरानी बीमारियों पर अंकुश लगाया जाता है।
खबर विस्तार : -
गांधीनगरः गुजरात की पहचान अब देश दुनिया के प्रमुख आयुर्वेदिक पंचकर्म और वैलनेस हब के रूप में हो रही है। यह सिर्फ औद्योगिक रिलिजियस टूरिज्म और राज्य कल्चर के अलावा भी कई क्षेत्र में पहचान बना रहा है, वही हेल्थ में आयुर्वेद के अलावा योग पंचकर्म को भी स्थान दे रहा है। राज्य में कई नेचुरल वैलनेस सेंटर बनाए जा चुके हैं। इनमें देश विदेश के लोग आते हैं। यह प्रमुख स्थान कच्छ की पुनाडी पटिया गांव के पास 40 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला नवजीवन नेचर क्योर सेंटर महात्मा गांधी के नेचर की क्योर विचारों पर आधारित है।
पुरानी बीमारियों पर अंकुश लगाया जाता
यहां हेल्थ केंद्र में हर्बल आयुर्वेदिक उपचार से लेकर पंचकर्म एक्यूपंक्चर मेडिटेशन और योग के जरिए तमाम पुरानी बीमारियों पर अंकुश लगाया जाता है। नवजीवन नेचर क्योर सेंटर भी हल्थ क्षेत्र में प्रमुख स्थान रखता है। इसमें चिकित्सक गवनी शाह ने बताया कि यहां आने वाले मरीजों का ट्रीटमेंट उनकी इच्छा अनुसार किया जाता है। यहां यह तय कर लिया जाता है कि किस मरीज को किन चीजों की जरूरत होती है। अगर फिजियोथैरेपी का ट्रीटमेंट दिया जाता है तो इसके लिए सुबह से शाम तक का शेड्यूल बनाकर दे दिया जाता है। इससे सुबह उठकर वह मरीज खाने-पीने से लेकर योग करने और उपचार से संबंधित सावधानियां को समझ लेता है। वह अपने स्वास्थय पर पूरा ध्यान देता है। जामनगर की लखवाडा इलाके में आयुर्वेद की पढ़ाई और रिसर्च के लिए यह प्रसिद्ध स्थान है।
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गवनी शाह ने बताया जिस प्रकार की जरूरत होती है मरीज को वैसी व्यवस्था दी जाती है। अपने शेड्यूल के हिसाब से मरीज अपने आप को तैयार करता है। उसे सुबह कितने बजे उठना है, क्या पीना है, योग कब करना है, किस प्रकार के उपचार करना है? आदि बारीकियां पहले ही बता दी जाती हैं। इससे वह अपने स्वास्थय के प्रति जिम्मेदार बन जाता है। इसी प्रकार आयुर्वेद की पढ़ाई और रिसर्च के लिए जामनगर की लखवारा इलाका प्रसिद्ध है। यहां पर वेेदगर्भ बिहार वैलनेस रिजॉर्ट और इको विलेज लोक आयुर्वेद मॉडल पर आधारित है।
हजारों साल के इतिहास को जिंदा किया
इसमें 5000 साल पुरानी प्रीवेंटिव और प्रोमोटिव कॉन्सेप्ट सिखाए जाते हैं। यह पुरानी आयुर्वेद पद्धति को बढ़ावा देने में अग्रसर है। जामनगर के मैरीज पूरा डेरा ने बताया कि उसे प्रेगनेंसी के समय बहुत चिंता हो रही थी। बच्चों के संस्कार कैसे होंगे? कुछ संकट पैदा वाली चीज तो नहीं होगी? लेकिन उन्होंने वेदगर्भ विहार वैलनेस सेंटर से दवा ली और बच्चा उनका स्वास्थ है। रिसोर्ट के फाउंडर हितेश जानी कहते हैं कि उन्होंने एक रिजाल्ट खोला तो उसका नाम वेदगर्भ विहार यानी अरेस्ट एंड रीजेनरेट गर्भ संस्कार रखा। सेंटर की कई खूबियां भी हैं। यहां पर जन्म लेने वाला बच्चा सुंदर तेजस्वी बुद्धिमान सुंदर और हाई आइक्यू वाला होता है। इसके लिए हम पहले से तैयारी कर लेते हैं। हमने हजारों सालों के इतिहास को जिंदा किया है।
यह सब वस्तु में क्या मुमकिन है, इसके लिए वह कहते हैं कि आज की भाग दौड़ वाली जिंदगी में हर कोई प्राकृतिक वातावरण में नहीं रह पाता है, लेकिन अगर वह ऐसा कर ले तो स्वास्थय लाभ और मानसिक शांति जरूर मिलेगी। इसीलिए गुजरात की सरकार ने राज्य में लगातार पंचकर्म आयुर्वेद नेचुरोपैथी को बढ़ावा देकर हेल्थ टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर को भी डेवलप्ड कर रही है। यह सब सामान्य बात नहीं है असाधारण बीमारी बीमारियों के इलाज में ऑर्गेनिक जीवन पद्धति के साथ-साथ जड़ी बूटियां व पंच गव्य पर आधारित नेचुरल ट्रीटमेंट काफी लाभकारी होता है। बीमारी से मुक्ति पाने वाले लोगों को चाहिए जो अपनी बिजी जिंदगी से छुटकारा पा ले उनको चाहिए कि वह गुजरात के इन आयुर्वैदिक वैलनेस सेंटर में रहकर अपने शरीर और मां को स्थिर करके आनंद का अनुभव करेंं।
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