जब डॉक्टरों ने नहीं शुरू किया इलाज, बीमार मां को व्हीलचेयर पर लेकर विधायक के घर पहुंचा

खबर सार :-

विधायक से शिकायत करने के लिए एक तीमारदार बेटा व्हीलचेयर से अपनी बीमार मां को लेकर गया। वह करीब 2 किलोमीटर तक व्हीलचेयर पर मां को लेकर चला होगा।
अस्पताल में 5 घंटे इलाज का इंतजार, विधायक ने पांच मिनट में शुरू कराया

खबर विस्तार : -

हैदराबाद, जब बीमार मां को अस्पताल में 5 घंटे तक इलाज नहीं दिला पाया तो उसका बेटा 2 किलोमीटर व्हील चेयर खींचकर विधायक के घर पहुंचा। वहां पहुंचते ही अस्पताल का मैसेज पहुंच गया और अस्पताल में इलाज की व्यवस्था शुरू हो गई। अक्सर सरकारी अस्पतालों की बेहाली की खबरें अखबारों और टीवी में मिला करती हैं। एक ऐसी ही खबर में बीमार महिला अस्पताल के बाहर पड़ी रही।

डाक्टरों ने पांच घंटे तक उसका इलाज भी नहीं शुरू किया। जब उसके बेटे को लगने लगा कि अस्पताल उसको इलाज देना ही नहीं चाहता तो वह व्हीलचेयर पर लेकर स्थानीय विधायक के घर पहुंच गया। सरकारी अस्पताल की लापरवाही से नाराज बेटे ने विधायक के घर पहुंचकर पूरी जानकारी दी। यह घटना मंगलवार रात तेलंगाना के मंचेरियल जिले में हुई। 

महिला किडनी से जुड़ी बीमारी से है पीड़ित

जानकारी के मुताबिक, राज कुमार नाम के युवक ने अपनी 55 वर्षीय मां बुकिया बुज्जी को व्हीलचेयर पर दो किलोमीटर तक धकेलते हुए मंचेरियल के विधायक के. प्रेमसागर राव के घर तक ले गया। यह हिम्मत उसने तब दिखाई जब पूरी तरह से परेशान और हताश हो चुका था। बताया जा रहा है कि महिला किडनी से जुड़ी बीमारी से पीड़ित है। उसको इलाज दिलाने के लिए अस्पताल ले जाया गया। यह महिला मंडामर्री मंडल के पुलिमडुगु गांव की रहने वाली है।

अपने बेटे के साथ इलाज के लिए मंचेरियल के जिला सरकारी अस्पताल आई थी। अस्पताल से वह जब विधायक के आवास तक पहुंचा तो महिला के बेटे राज कुमार ने बताया कि अस्पताल के स्टाफ ने उसकी मां को पांच घंटे तक व्हीलचेयर पर ही इंतजार कराया। इतना समय बीत जाने के बाद भी कोई स्टाफ उनकी बीमार मां को देखने नहीं आया। जब वह परेशान हो गया तो अपनी मां को व्हीलचेयर पर धकेलते हुए दो किलोमीटर दूर स्थानीय विधायक के घर ले गया। वहां उसने विधायक के घर पर अपनी परेशानी बताई।

अस्पताल प्रशासन की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया

उसने दावा किया कि अस्पताल के स्टाफ से कई बार अपनी मां के लिए बेड की व्यवस्था करने के लिए गुहार की। इलाज शुरू करने के लिए हाथ जोड़े। इसके बाद भी किसी ने उसकी नहीं सुनी। इसी तरह पांच घंटे इंतजार करने में बीत गए। उसके बाद भी अस्पताल प्रशासन की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया।राज कुमार का कहना था कि उसने अपनी मां को किसी और अस्पताल रेफर करने के लिए भी कहा।

ये भी पढ़ेंः  INDIA ब्लॉक की बैठक के बाद चुनाव आयोग पर विपक्ष का हमला, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

उसने सुझाया था कि अस्पताल के अधिकारी कम से कम उसकी मां को करीमनगर के अस्पताल में रेफर कर दें। इस मांग पर उन्होंने मना कर दिया। आरोप है कि उससे कहा गया कि वह अपनी मां को प्राइवेट अस्पताल ले जाए। पीड़ित ने बताया कि वह गरीब आदमी प्राइवेट इलाज कहां से कराएगा? उसने बताया कि यह आखिरी विकल्प था। उसके पास अपनी मां को विधायक के घर व्हीलचेयर पर ले जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। वही अस्पताल में इलाज दिला सकते हैं। उसकी पीड़ा

सुनकर वहां मौजूद लोगों ने अस्पताल पर नाराजगी जताई। मामले की जानकारी मिलने पर जिला अस्पताल के रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर विधायक आवास पहुंचे। उसके बाद महिला को अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल कर्मियों ने उचित देखभाल का आश्वासन दिया। इसके बाद महिला को अस्पताल ले जाकर इलाज शुरू कराया। 

ये भी पढ़ेंः यूपी के आंगनवाड़ी केंद्रों को योगी सरकार देगी आधुनिक खेल सुविधाओं की सौगात, 87.60 करोड़ रुपये मंजूर

अन्य प्रमुख खबरें