अमेरिकी बॉन्ड यील्ड नरम, शेयर बाजार में लौटी रौनक; सेंसेक्स 558 अंक उछला, निफ्टी 24,200 के पार
खबर सार :-
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी, मजबूत वैश्विक संकेत और एफआईआई-डीआईआई की खरीदारी से भारतीय शेयर बाजार को राहत मिली है। सात सत्रों की गिरावट के बाद सेंसेक्स और निफ्टी की वापसी निवेशकों के भरोसे का संकेत है। हालांकि निफ्टी के लिए 24,200-24,260 का क्षेत्र निर्णायक रहेगा। इसके ऊपर टिकाव बाजार में आगे तेजी का रास्ता खोल सकता है, जबकि 24,060 के नीचे कमजोरी बढ़ सकती है।
खबर विस्तार : -
Stock Market Surge: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को रौनक लौट आई। लगातार सात कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद घरेलू बाजार ने मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की। निवेशकों की खरीदारी से सेंसेक्स 558 अंक से ज्यादा चढ़ा, जबकि निफ्टी 50 फिर से 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के आसपास पहुंच गया।
बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 76,909.68 से 0.72 प्रतिशत यानी 558.77 अंक की बढ़त के साथ 77,468.45 पर खुला। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 77,494.79 का उच्चतम और 77,375.75 का न्यूनतम स्तर छुआ। खबर लिखे जाने तक सूचकांक 532.60 अंक यानी 0.69 प्रतिशत की तेजी के साथ 77,442.28 पर कारोबार कर रहा था। इसी तरह एनएसई निफ्टी 50 पिछले बंद 24,078.30 के मुकाबले 147.15 अंक यानी 0.61 प्रतिशत ऊपर 24,225.45 पर खुला। शुरुआती कारोबार में यह 24,225.45 के उच्चतम और 24,184.55 के निचले स्तर तक गया। खबर लिखे जाने तक निफ्टी 121.10 अंक यानी 0.50 प्रतिशत की मजबूती के साथ 24,199.40 पर था।
व्यापक बाजार में भी खरीदारी
बाजार की तेजी केवल दिग्गज शेयरों तक सीमित नहीं रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.56 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.83 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इससे संकेत मिला कि निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में सुधार हुआ है और बाजार में व्यापक स्तर पर खरीदारी देखने को मिली। सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी के लगभग सभी प्रमुख सूचकांक हरे निशान में रहे। निफ्टी आईटी, प्राइवेट बैंक, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मीडिया, रियल्टी और एफएमसीजी में खास मजबूती दिखाई दी। इसके अलावा मिडस्मॉल आईटी और टेलीकॉम तथा मेटल शेयरों में भी निवेशकों ने खरीदारी की।
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तकनीकी संकेतकों से रिकवरी की उम्मीद
विश्लेषकों के मुताबिक पिछले 12 कारोबारी सत्रों से दबाव झेल रहे बाजार में अब अल्पकालिक सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। बेहतर वैश्विक संकेतों के साथ शॉर्ट कवरिंग ने भी बाजार की तेजी को सहारा दिया। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार निफ्टी ने 24,060 के महत्वपूर्ण समर्थन स्तर से मजबूती से वापसी की है। चार घंटे के चार्ट पर तेजी का संकेत देने वाला पैटर्न बनने से रिकवरी की उम्मीद बढ़ी है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि निफ्टी 24,200 से 24,260 के दायरे के ऊपर टिकता है, तो आगे 24,380 से 24,540 तक की तेजी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर, 24,060 का स्तर अहम समर्थन बना हुआ है। इसके नीचे फिसलने पर निफ्टी में कमजोरी बढ़ सकती है और सूचकांक 23,575 तक जा सकता है।
एफआईआई-डीआईआई की खरीदारी से बढ़ा भरोसा
निवेशकों के रुख में भी सकारात्मक बदलाव दिखाई दिया। अस्थायी आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई ने लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में खरीदारी की। बुधवार को एफआईआई ने भारतीय शेयर बाजार में 407 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। घरेलू संस्थागत निवेशक यानी डीआईआई लगातार सातवें सत्र खरीदार रहे और उन्होंने 3,973 करोड़ रुपये का निवेश किया। घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी ने बाजार को मजबूत आधार दिया।
वैश्विक बाजारों से मिला सपोर्ट
भारतीय बाजार की तेजी को अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम से भी समर्थन मिला। रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका लंबी अवधि की ट्रेजरी प्रतिभूतियों की पुनर्खरीद पर विचार कर रहा है। इससे उधारी लागत कम करने की संभावना बनी है। इस खबर के बाद वैश्विक बॉन्ड बाजार और इक्विटी बाजारों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला। एशियाई शेयर बाजारों में भी मजबूती रही। अमेरिकी बाजार बुधवार को बढ़त के साथ बंद हुए। एसएंडपी 500 में 0.21 प्रतिशत और नैस्डैक में 0.16 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। वैश्विक बाजारों की इस मजबूती ने भारतीय निवेशकों के सेंटीमेंट को सहारा दिया।
कच्चा तेल और भू-राजनीतिक तनाव अब भी चिंता
हालांकि बाजार के सामने कुछ जोखिम बरकरार हैं। अमेरिका-ईरान तनाव के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिलहाल अपेक्षाकृत स्थिर रहीं। ब्रेंट क्रूड करीब 92 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई करीब 84.52 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया। ऊंची तेल कीमतें भारत के लिए चिंता का विषय बनी रह सकती हैं, क्योंकि इससे आयात लागत और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक बॉन्ड यील्ड में नरमी बनी रहती है और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है, तो भारतीय शेयर बाजार में निकट अवधि में और सुधार की गुंजाइश है। हालांकि निवेशकों को कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति और निफ्टी के अहम तकनीकी स्तरों पर नजर रखनी होगी।
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