मध्य प्रदेश में श्वेत क्रांति से बदल रही गांवों की तस्वीर, ग्रामीण आय का मजबूत जरिया बन रहा दुग्ध उत्पादन
खबर सार :-
मध्य प्रदेश में रोजाना 2 करोड़ लीटर से ज्यादा दूध का उत्पादन होता है। दूध को संगठित बाजार तक पहुंचाने के लिए सरकार कोऑपरेटिव नेटवर्क का विस्तार कर रही है।
खबर विस्तार : -
भोपाल: मध्य प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक बड़ा बदलाव आ रहा है। यहां की मुख्य ताकत अब सिर्फ खेतों की फसलें नहीं, बल्कि गांवों में पाले जाने वाले पशु और उनसे मिलने वाला दूध है। पशुपालक अब सिर्फ घर की जरूरतें पूरी करने के लिए दूध नहीं बेच रहे हैं; बल्कि पारंपरिक खेती के साथ-साथ यह नियमित कमाई का जरिया भी बन रहा है।
पूरे मध्य प्रदेश में इस बदलाव को बड़े पैमाने पर लागू करने की तैयारी चल रही है। राज्य सरकार का लक्ष्य दूध उत्पादन को सिर्फ पशुपालन की गतिविधि से आगे ले जाकर ग्रामीण आय का एक मजबूत आधार बनाना है। सहकारी समितियों के विस्तार, नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य देखभाल, बेहतर पोषण और दूध इकट्ठा करने से लेकर प्रोसेसिंग तक की व्यापक प्रणालियों के जरिए राज्य में 'श्वेत क्रांति' का एक नया अध्याय शुरू हो रहा है।
दूध उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल
मध्य प्रदेश पहले से ही दूध उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। वित्त वर्ष 2024-25 में राज्य में 225.95 लाख टन दूध का उत्पादन हुआ, जो 2023-24 के 213.26 लाख टन उत्पादन की तुलना में लगभग 5.95 प्रतिशत ज्यादा है। देश के कुल दूध उत्पादन में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 9.12 प्रतिशत रही और इसने उत्तर प्रदेश व राजस्थान के बाद तीसरा स्थान हासिल किया।
2024-25 में 225.95 लाख टन हुआ दूध उत्पादन
राज्य में दूध उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, उत्पादन 2020-21 में लगभग 179.99 लाख टन था, जो 2021-22 में बढ़कर 190.04 लाख टन, 2022-23 में 201.22 लाख टन, 2023-24 में 213.26 लाख टन और 2024-25 में 225.95 लाख टन हो गया। यह चार वर्षों में लगभग 45.96 लाख टन की वृद्धि को दर्शाता है। दूध की उपलब्धता के मामले में भी मध्य प्रदेश की स्थिति मजबूत है। साल 2024-25 में, राज्य में प्रति व्यक्ति रोजाना दूध की उपलब्धता 707 ग्राम थी, जबकि राष्ट्रीय औसत 485 ग्राम है। 2018-19 में यह आंकड़ा 538 ग्राम था; यानी छह सालों में इसमें रोजाना 169 ग्राम की बढ़ोतरी हुई है।
ग्रामीण आय का बन रहा मजबूत आधार
यह आंकड़ा इसलिए अहम है क्योंकि लंबे समय तक मध्य प्रदेश की पहचान मुख्य रूप से खेती पर आधारित राज्य के तौर पर रही है। अब खेती के साथ-साथ पशुपालन भी ग्रामीण आय के दूसरे मजबूत आधार के रूप में उभर रहा है। 'श्वेत क्रांति' का असली मकसद सिर्फ दूध का उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों के दूध को संगठित बाजारों से जोड़ना है। मध्य प्रदेश इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार अपनी सहकारी दुग्ध समितियों का नेटवर्क बढ़ा रहा है। अभी इन सहकारी समितियों के जरिए रोजाना लगभग 12 लाख लीटर दूध इकट्ठा किया जाता है, और इसे बढ़ाकर 50 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है।
असली चुनौती: उत्पादन से लेकर कलेक्शन तक
यहां एक खास आंकड़े पर ध्यान देना जरूरी है। जहां राज्य में रोजाना 2 करोड़ लीटर से ज्यादा दूध का उत्पादन होता है, वहीं अभी सिर्फ 12 लाख लीटर दूध ही कोऑपरेटिव सोसायटियों के जरिए इकट्ठा किया जाता है। अब इस संगठित कलेक्शन को बढ़ाकर 50 लाख लीटर रोजाना करने का लक्ष्य रखा गया है। असल में, चुनौती दूध के उत्पादन में नहीं, बल्कि उस दूध को संगठित बाजार तक पहुंचाने में है। इस अंतर को कम करने के लिए राज्य में कोऑपरेटिव नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है।
ये भी पढ़ें:- अनाज उत्पादन में देश का ‘फूड बास्केट’ बना मध्य प्रदेश, विदेशों में बढ़ी ‘शरबती’ और ‘ड्यूरम’ गेहूं की मांग
डेयरी फेडरेशन से जुड़े 3,38,156 सदस्य
मध्य प्रदेश राज्य कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन अभी 7,145 दूध कोऑपरेटिव सोसायटियों को चलाता है, जिनसे 3,38,156 सदस्य जुड़े हुए हैं। गांवों से डेयरी तक दूध पहुंचाने के लिए मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर में 603 बल्क मिल्क कूलर, 59 मिल्क चिलिंग सेंटर, छह बड़े डेयरी प्लांट और 10 छोटे डेयरी प्लांट शामिल हैं। यह सिस्टम किसान और बाजार के बीच की दूरी को प्रभावी ढंग से कम करता है। गांवों में उत्पादित दूध को स्थानीय स्तर पर इकट्ठा किया जाता है और जांच और चिलिंग के बाद यह डेयरी नेटवर्क में पहुंच जाता है। इससे किसान की खुले बाजार में दूध बेचने की मजबूरी कम होती है और संगठित बाजार से जुड़ने का रास्ता बनता है।
महिलाओं को सशक्त बनाने में मदद
डेयरी सेक्टर की एक बड़ी सामाजिक ताकत यह है कि परिवार के दूसरे सदस्यों खासकर महिलाओं की भागीदारी सीधे तौर पर आय में बदल सकती है। पशुओं को चारा खिलाना, दूध निकालना, पशुओं की देखभाल और कलेक्शन सेंटर तक दूध पहुंचाना ग्रामीण परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा है। अगर दूध का पेमेंट सीधे और पारदर्शी तरीके से उत्पादक तक पहुंचे, तो पशुपालन से होने वाली आय परिवार के नियमित खर्चों को संभालने में अहम भूमिका निभा सकती है। इसीलिए कोऑपरेटिव डेयरी मॉडल को ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण से जोड़ा जा रहा है। केंद्र सरकार की 'श्वेत क्रांति 2.0' पहल का मकसद भी डेयरी कोऑपरेटिव के जरिए दूध के उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाना और ग्रामीण दूध उत्पादकों को संगठित बाजार से जोड़ना है।
'दुग्ध समृद्धि' अभियान हर गांव तक पहुंचेगा
साल 2026 को 'किसान कल्याण वर्ष' के तौर पर मनाते हुए, राज्य सरकार ने दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए गांव-गांव में एक अभियान शुरू किया है। 'दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान' के जरिए पशुपालक किसानों को नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य और पोषण के बारे में जानकारी देने पर जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा, राज्य में 'क्षीरधारा ग्राम योजना' भी शुरू की गई है। पहले चरण के लिए 5,000 से ज्यादा गांवों को चुना गया है। पशुपालन की स्थिति, प्रगतिशील पशुपालक किसानों की मौजूदगी, नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और टैगिंग जैसे पैमानों के आधार पर गांवों को अलग-अलग श्रेणियों में बाँटकर दूध उत्पादन बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं।
मध्य प्रदेश के सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग का कहना है कि पिछले साल NDDB के साथ हुए समझौते के बाद राज्य में दूध उत्पादन और कलेक्शन में काफ़ी बढ़ोतरी हुई है। दूध उत्पादकों को समय पर पेमेंट करने और उनकी आय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। नए डेयरी प्लांट लगने से दूध कलेक्शन की क्षमता बढ़ रही है।
राज्य में 80 लाख से ज्यादा पशुपालक
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि मध्य प्रदेश एक नई 'श्वेत क्रांति' (दुग्ध क्रांति) की ओर बढ़ रहा है। हमारा लक्ष्य बिल्कुल साफ है: यह पक्का करना कि देश में सबसे ज्यादा दूध उत्पादन मध्य प्रदेश की धरती पर हो। राज्य में 80 लाख से ज्यादा पशुपालकों का एक बड़ा और समृद्ध समुदाय है। हमारी सरकार ने किसानों की समृद्धि और उनकी आय बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर कोशिशें शुरू की हैं। दूध उत्पादन किसानों की आय का एक बड़ा जरिया है। हम राज्य के हर गांव और शहर में दूध सहकारी समितियों को और मजबूत करने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहे हैं।
ये भी पढ़ें:- मध्य प्रदेश में धान, ज्वार और बाजरा खरीद के लिए 1,100 से ज्यादा रजिस्ट्रेशन सेंटर, 10 अक्टूबर तक करें पंजीयन
अन्य प्रमुख खबरें
-
मप्र में MSP पर धान खरीद के लिए 3 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन
2026-10-05
-
फसल चक्र अपनाना छोड़ा, इसलिए कम हुई मिट्टी की ताकत
2026-10-05
-
मिट्टी की ताकत है खरपतवार, आना चाहिए उचित प्रबंधन
2026-10-03
-
मप्रः 10 अक्टूबर तक किसान करा सकेंगे पंजीयन: खाद्य मंत्री राजपूत
2026-10-01
-
CCFI की 63वीं AGM में टिकाऊ कृषि, रसायनों के संतुलित इस्तेमाल और निर्यात पर जोर
2026-10-01
-
प्लास्टिक हमारे लिए अभिशाप, यूपी में बांस उद्योग के लिए सरकार प्रतिबद्ध: ब्रजेश पाठक
2026-09-30
-
एमएसपी पर दालों और तिलहनों की खरीद को मंजूरी, यूपी, कर्नाटक और तेलंगाना को मिलेगा लाभ
2026-09-30
-
खेतों की मिट्टी की जांच कर खाद का पैमाना देंगे वैज्ञानिक, विदेश माल भेज सकेंगे किसान
2026-09-30
-
यूपी में फल-फूल रहा मशरूम का उत्पादन, किसानों में बढ़ी लोकप्रियता
2026-09-29
-
प्रदेश के हर नागरिक के सुख-दुख में ढाल बनकर खड़ी है योगी सरकारः कृषि मंत्री
2026-09-27
-
शिमला में हुए तीन करार, पहाड़ों की खेती से कमाएंगे वैद्य और किसान
2026-09-26
-
धान की फसल में बालियां निकलने का समय, जरूरी है उचित फसल प्रबंधनः एनआईबीएसएम
2026-09-26
-
सीड पार्क रोड के लिए काटे जाएंगे वृक्ष, निश्चित सीमा में ही उर्वरक पाएंगे किसान
2026-09-26
-
लखनऊ समेत कई जिलों में हो रही बारिश, 27 तक मौसम खराब रहने के आसार
2026-09-25
-
कभी हल्की धूप तो कभी फुहार, हथिया नक्षत्र का यही प्रभाव
2026-09-24