अनाज उत्पादन में देश का ‘फूड बास्केट’ बना मध्य प्रदेश, विदेशों में बढ़ी ‘शरबती’ और ‘ड्यूरम’ गेहूं की मांग

खबर सार :-

कृषि के क्षेत्र में मध्य प्रदेश अपनी एक अलग पहचान बना रहा है। गेहूं उत्पादन के मामले में पंजाब और हरियाणा को पीछे छोड़ते हुए मध्य प्रदेश देश में सबसे आगे है।
कृषि समृद्धि में MP का डंका, खाद्यान्न उत्पादन में रच रहा नए कीर्तिमान

खबर विस्तार : -

भोपाल: संसाधनों की कमी, सिंचाई के संकट और धीमी विकास दर के कारण कभी 'बीमारू' राज्य कहे जाने वाले मध्य प्रदेश ने आज आत्मनिर्भरता, कृषि समृद्धि और तेज आर्थिक प्रगति के मामले में अपनी एक अलग पहचान बना ली है। राज्य सरकार के दूरदर्शी नेतृत्व और किसानों की अथक मेहनत से राज्य ने न केवल 24 प्रतिशत की विकास दर हासिल की है, बल्कि अनाज उत्पादन में नए रिकॉर्ड बनाकर देश के 'फूड बास्केट' (अन्न भंडार) के रूप में भी अपनी नई पहचान बनाई है।

राज्य सरकार साल 2026 को 'किसान कल्याण वर्ष' और 'रोजगार-उन्मुख कृषि-उद्योग विकास वर्ष' के रूप में मना रही है। इसका एकमात्र मकसद तकनीक, इनोवेशन और वैज्ञानिक तरीकों से किसानों की आय को लगातार बढ़ाना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और गांवों की आत्मा किसानों में; राज्य तभी समृद्धि के शिखर पर पहुंचता है जब किसान सशक्त होता है। मध्य प्रदेश में विकास का यह सफर अब पूरे देश के लिए एक मिसाल बन गया है।

किसानों का सशक्तिकरण विकास की नींव

राज्य के कृषि मंत्री अदल सिंह कंसाना ने कहा है कि किसानों का सशक्तिकरण ही राज्य के सर्वांगीण विकास की नींव है। इसी संकल्प के साथ, राज्य सरकार ने 2026 को 'किसान कल्याण वर्ष' के रूप में मनाने का फैसला किया है। इस साल के लिए कृषि विकास का एक बहुआयामी मॉडल तैयार किया गया है, जिसका लक्ष्य 'समृद्ध किसान – समृद्ध राज्य' है और इसमें कई तरह की बहुउद्देशीय गतिविधियां शामिल हैं। मंत्री कंसाना ने आगे कहा कि कृषि विभाग किसानों के कल्याण के लिए समर्पित कई योजनाएं और गतिविधियां लागू कर रहा है।

अनाज उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर

अनाज उत्पादन के मामले में मध्य प्रदेश अब देश में दूसरे स्थान पर आ गया है। पंजाब और हरियाणा जैसे पारंपरिक रूप से कृषि में समृद्ध राज्यों को पीछे छोड़ते हुए यह राज्य देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक बन गया है। इस साल गेहूं का उत्पादन बढ़कर 365.11 लाख मीट्रिक टन हो गया है और उत्पादकता 3,780 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है। देश के कुल गेहूं उत्पादन में मध्य प्रदेश का योगदान 18 प्रतिशत है। इस राज्य से होने वाला गेहूं अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अहम भूमिका निभाता है और भारत के कुल गेहूं निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 35 से 40 प्रतिशत है। जर्मनी, अमेरिका, ब्रिटेन, इटली, दुबई और सऊदी अरब जैसे देशों में प्राकृतिक रूप से मीठी 'शरबती' और ड्यूरम गेहूं की किस्मों की लगातार मांग बनी रहती है। इसके अलावा, मध्य प्रदेश प्रमाणित बीजों का देश का सबसे बड़ा उत्पादक है, जहां 3 लाख से अधिक किसान बीज उत्पादन कंपनियों से जुड़े हुए हैं।

आधुनिक तकनीक से फसल प्रबंधन

कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को शामिल करके फसल प्रबंधन को अधिक सटीक, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा रहा है। राज्य सरकार के 'सारा' (Sara) और 'उन्नति' (Unnati) एग्री-जीआईएस (Agri-GIS) सिस्टम के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का उपयोग करके सैटेलाइट इमेज, ड्रोन सर्वे और खेतों की वास्तविक तस्वीरों का विश्लेषण किया जा रहा है। इससे फसल की निगरानी और उत्पादन के आकलन के लिए एक वैज्ञानिक आधार मिला है। 'उन्नति' प्लेटफॉर्म और 'सारा' एप्लिकेशन का उपयोग करके 3 करोड़ से अधिक भूमि के टुकड़ों (land parcels) पर बोई गई फसलों की डिजिटल मैपिंग की गई है। हाल के रबी और खरीफ मौसमों के दौरान, इस सिस्टम ने 5.37 करोड़ से अधिक खेतों की तस्वीरों का विश्लेषण किया, जिससे फसलों की वास्तविक समय (real-time) में पहचान संभव हो सकी। इस तकनीकी पहल की बदौलत, फसल की पहचान की सटीकता 2022 में 66 प्रतिशत से बढ़कर 2025 तक लगभग 85 प्रतिशत हो गई है। यह सिस्टम प्राकृतिक आपदाओं के दौरान फसल के नुकसान का सटीक आकलन करने और किसानों को तुरंत मुआवजा दिलाने में भी बेहद प्रभावी साबित हो रहा है।

केमिकल-फ्री खेती पर जोर

पर्यावरण के अनुकूल और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ते हुए, राज्य सरकार केमिकल-फ्री खेती को बढ़ावा दे रही है। मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर है और देश के कुल ऑर्गेनिक खेती उत्पादन में 27 प्रतिशत से ज़्यादा का योगदान देता है। 'नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग' के तहत, राज्य में 1,513 क्लस्टर में 1.89 लाख किसानों को शामिल किया गया है। साथ ही, प्राकृतिक खेती करने वाले और देसी मवेशी पालने वाले किसानों के लिए ₹900 की मासिक सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। इसका एक बेहतरीन उदाहरण खरगोन के ऑर्गेनिक खेती विशेषज्ञ अविनाश डांगी हैं; वे 40 मवेशियों के साथ 54 एकड़ जमीन पर ऑर्गेनिक खेती करते हैं और उनकी उपज देश भर के 13 राज्यों में सप्लाई की जाती है। इसी तरह, सफेद मूसली की खेती करने वाले अनिल वर्मा जैसे किसानो,ने राज्य सरकार के सहयोग से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है।

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कृषि क्षेत्र में नई ऊंचाइयां

मध्य प्रदेश बागवानी और फसल विविधीकरण (crop diversification) में भी नई ऊंचाइयां छू रहा है। राज्य टमाटर, धनिया और लहसुन के उत्पादन में राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान पर है। राज्य में 1.27 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर टमाटर की खेती होती है और इसकी अनुमानित पैदावार 36.94 लाख मीट्रिक टन है। अकेले अनूपपुर जिले में, 15,000 किसानों ने 1.40 लाख मीट्रिक टन टमाटर की रिकॉर्ड पैदावार हासिल की है। इसके अलावा, 'रानी दुर्गावती श्री-अन्न प्रोत्साहन योजना' के तहत, कोदो-कुटकी (छोटे मोटे अनाज/मिलेट्स) की खेती करने वाले आदिवासी किसानों को तय कीमत के अलावा ₹1,000 प्रति क्विंटल का प्रोत्साहन सीधे 'डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर' (DBT) सिस्टम के जरिए मिलता है। राज्य देश के कुल मोटे अनाज (मिलेट्स) उत्पादन में 12.17 प्रतिशत का योगदान देता है और मिलेट उत्पादन में राष्ट्रीय स्तर पर तीसरे स्थान पर है।

पारदर्शी और किसान-हितैषी सिस्टम लागू

राज्य सरकार ने हर स्तर पर किसानों को सहायता देने के लिए पारदर्शी और किसान-हितैषी सिस्टम लागू किए हैं। खाद वितरण में लंबी लाइनों, कालाबाजारी और बिचौलियों की भूमिका को खत्म करने के लिए पूरे राज्य में डिजिटल 'ई-विकास' सिस्टम लागू किया गया है। सोयाबीन उगाने वाले किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ दिलाने के लिए 'भावान्तर भुगतान योजना' के तहत 9 लाख से ज्यादा किसानों का रजिस्ट्रेशन किया गया है। इस साल, 7.62 लाख से ज्यादा किसानों से 51.75 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है और ₹9,485 करोड़ से ज्यादा का भुगतान भी किया जा चुका है। इसके अलावा, फसल अवशेष प्रबंधन (stubble management) को आसान बनाने के लिए 7,000 कृषि उपकरणों—जैसे रीपर, बेलर और हैप्पी सीडर पर सब्सिडी दी जा रही है  और मध्य प्रदेश सॉइल हेल्थ कार्ड (मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड) बांटने में भी देश में सबसे आगे है।

किसानों से सीधे बातचीत कर रहे मुख्यमंत्री

गौरतलब है कि 15 जुलाई से 13 नवंबर, 2026 तक आयोजित 'बलराम कृषि महोत्सव' के जरिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अलग-अलग जिलों के किसानों से सीधे बातचीत कर रहे हैं और आधुनिक कृषि मशीनों, ड्रोन टेक्नोलॉजी और जल संरक्षण के बारे में जागरूकता फैला रहे हैं। लगातार सात बार 'कृषि कर्मण पुरस्कार' जीतने वाला मध्य प्रदेश आज पारंपरिक खेती की सीमाओं से आगे बढ़कर तेजी से हाई-टेक, वैज्ञानिक और निर्यात-उन्मुख खेती की ओर बढ़ रहा है।

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