खेतों में न भरने दें पानी, वैज्ञानिकों की सलाह पर करें घनी फसल की निगरानी
खबर सार :-
किसान वैज्ञानिकों ने बारिश की हायतौबा को लेकर अपनी सलाह भी शुरू कर दी है। यदि खेतों में पानी भर रहा है तो उसके निकालने का बंदोबस्त करें। साथ ही धान की फसल वालों को सलाह है कि घनी फसल में परामर्श के आधार पर दवाओं का छिड़काव करें।
खबर विस्तार : -
रायपुर: ब्लास्ट रोग पत्तियों में गर्दन और बालियों तक है पहुंच सकता है। बारिश के दौरान या फिर बारिश के तुरंत बाद कई ऐसी विषम परिस्थितियां फसल को बर्बाद कर सकती हैं। इसलिए वैज्ञानिकों की सलाह पर गौर कर लेने मात्र से काफी परेशानी दूर हो सकती है।
देश के कई राज्यों में घनघोर बारिश हो रही है। छत्तीसगढ़ के रायपुर में भी किसानों के खेतों में पानी भरने लगा है। इन खेतों में धान की फसल लहलहा रही है। जिन खेतों में फसल बालियां निकलने की अवस्था में है, उसे देख किसान परेशान हैं। कुछ किसान वैज्ञानिकों ने उनकी परेशानी को देखते हुए जरूरी सुझाव दिए हैं। इनका पालन कर लेने से किसानों की बड़ी परेशानियां दूर हो सकती है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस समय धान की फसल में बालियां निकलने लगती हैं। यह प्रारंभिक चरण है और इसमें इनके प्रजनन अवस्था का समय भी होता है। धान की फसल के लिए यह बड़े महत्व का दौर होता है। इसमें बालियों का विकास और दानों का बढ़ना यह पूरी फसल चरण को लाभ हानि से जोड़ता है। दाना बनने और अंतिम उपज पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
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पानी भर जाने से फसल को ज्यादा नुकसान
बरसात के समय खेतों में आद्रता बढ़ जाती है। इसका भी फसलों से सीधा संबंध होता है, इसीलिए राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान रायपुर ने किसानों को जरूरी टिप्स दिए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि खेतों में पानी भर जाने से फसल को ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए उनकी निगरानी करनी जरूरी है। पानी निकाल देने के बाद भी कीट और रोगों की स्थिति को देखना चाहिए। किसान इन बातों पर ध्यान दें और वैज्ञानिक एवं अनुशंसित प्रबंधन उपाय को अपनाएं।
संस्थान के संयुक्त निदेशक पंकज शर्मा ने सुझाव दिया है की फसलों पर रोग लगने वाली स्थिति को शुरुआती चरण में ही पहचानने की कोशिश करें। यही स्थिति घनी फसल और अधिक आद्रता से ही उत्पन्न होने लग जाती है। इनमें शीथ ब्लाइट एवं ब्लास्ट जैसे रोग तेजी से फैल सकते हैं। उनके बचाव के लिए उचित प्रबंध तभी आप कर पाएंगे, जब शुरुआती चरण में ही रोगों की पहचान कर ले जाएं।
नियमित निगरानी ही बचाव की जानकारी
रोगों के लक्षण जानने के लिए अपनी फसल पर निगरानी बनाए रखना जरूरी है। शीथ ब्लाइट में पत्ती के आवरण का आकार अंडाकार होता है। इनकी पत्तियों में अनियमित धब्बे भी दिखाई पड़ने लगते हैं, जबकि ब्लास्ट रोग पत्तियों में गांठ और कलर को प्रभावित कर आगे गर्दन और बालियों तक पहुंच सकता है। इन रोगों से फसल को बचाने के लिए फफूंदनाशक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इस दवा का उपयोग तभी कर सकते हैं, जब यह स्पष्ट हो जाए कि संबंधित रोग ही फसल को अपनी चपेट में ले चुका है।
फसल का बढ़ना जरूरी होता है। पौधों में वृद्धि से प्रजनन अवस्था बढ़ती है और पौधों के ऊपरी हिस्से में बालियां आनी शुरू हो जाती हैं। वैसे भी बारिश का समय है और खेतों में पर्याप्त नमी रहती है, लेकिन खेतों में पानी का भरा होना नुकसानदायक होता है। उचित जल निकासी के लिए प्रबंध कर लेना चाहिए। यदि इसमें तनिक भी लापरवाही हुई तो फसल प्रभावित हो सकती है।
बिना आवश्यकता के न डालें कीटनाशक
संस्थान के निदेशक डॉक्टर पी के राय ने बताया है कि फसल प्रबंधन इस बात को उचित मानता है, जिसमें ऐसी सूचनाओं दी जाती है की फसल में बालियां निकलने लगी हैं। इनके विकास के लिए या दाना बनने के लिए इनमें किसी प्रकार के रोग या जलजमाव नहीं होना चाहिए। पर्याप्त नमी, खेत की निगरानी, संतुलित पोषक तत्व और बिना आवश्यकता के रसायन नहीं देना चाहिए।
इस पर भी ध्यान देना चाहिए, जब पौधों की बढ़वार होने लगे और बालियां निकलने की अवस्था बनने लगे, उसी समय तना छेदक ब्राउन प्लांट हॉपर आदि उपद्रव करने लगते हैं। इसलिए इनके प्रकोप से बालियां सफेद पड़ सकती हैं। ब्राउन प्लांट हांपर पौधे से निचले हिस्से का रस चूसकर गोलाकार रूप में फसल के सूखने की स्थिति पैदा होने लगती है। इन दोनों परिस्थितियों से निपटने के लिए आवश्यकता अनुसार फेरोमोन ट्राप का उपयोग प्रारंभिक पहचान के समय ही कर देना चाहिए।
क्या है अनुशंसित वैज्ञानिक उपाय
किसानों के लिए अनुसंचित वैज्ञानिक उपाय करने की सलाह दी जाती है। इसमें कीटनाशकों एवं फफूंदनाशकों का उपयोग निर्धारित मात्रा पर करने की सलाह दी जाती है। वह भी उन परिस्थितियों में जब यह स्पष्ट हो जाए कि संबंधित रोग ही फसल पर लगा है या संबंधित कीट ही हमला कर रहे हैं। स्वीकृति लेवल निर्देशों के अनुसार, इनका उपयोग करना चाहिए।
वैज्ञानिकों का कहना है कि नाइट्रोजन की अधिक मात्रा अनावश्यक कीटनाशक मिश्रण तथा एक ही रसायन के बार-बार प्रयोग से फसल को नुकसान पहुंच सकता है। फसल की निगरानी नियमित होनी चाहिए और संतुलित पोषण तत्व फसल को मिलना चाहिए। जरूरी समय पर ही किसी प्रकार का रसायन प्रयोग करें अन्यथा खड़ी फसल भी सूख जाती है।
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