उन्नतशील खेती के लिए कवायद, देश के प्रमुख कृषि संस्थानों में अधिकारियों का प्रस्थान

खबर सार :-

उत्तर प्रदेश की खेती को कितनी जल्दी और ज्यादा लाभकारी बनाया जाए, इनमें श्री अन्य वाली फसलों को प्रमुख स्थान दिया जाए। इस संबंध में देश के प्रमुख संस्थानों से सीख लेने के लिए यूपी कृषि विभाग के अधिकारियों को अनुभव लेने के लिए भेजा गया है।
सीड पार्क रोड के लिए काटे जाएंगे वृक्ष, निश्चित सीमा में ही उर्वरक पाएंगे किसान

खबर विस्तार : -

लखनऊः उत्तर प्रदेश का कृषि मंत्रालय इन दिनों प्रदेश की खेती को बेहतर बनाने एवं श्रीअन्य को महत्व पूर्ण अनाजों में शामिल करने के लिए प्रोत्साहन योजना चला रही है। इसमें मिलेट्स पुनरुद्धार के लिए सुझाए गए प्रयासों पर काम शुरू किया गया है। मिलेट्स पुनरूद्धार कार्यक्रम को गति देने के लिए राज्य स्तरीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के एक्सपोजर विजिट दल बनाए गए हैं। यह महत्वपूर्ण दल देश के विभिन्न कृषि संस्थाओं का दौरा करेंगे। कृषि क्षेत्र में तकनीकी परिवर्तन करके माइल्स का पुनरुद्धार करना इनका उद्देश्य है।

दौरे में शामिल किए जाने वाले क्षेत्रों में किस फसल से कितनी आय होती है? आदि विषयों का भी यह अध्ययन करेंगे। प्रमुख सचिव कृषि डॉ. एम.के.एस. सुन्दरम के निर्देशों पर यह है अपनी लक्ष्य के लिए प्रस्थान भी कर चुके हैं। इस अध्ययन दल को कृषि विज्ञान केंद्र आधारताल (जबलपुर, मध्य प्रदेश), केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान (नागपुर, महाराष्ट्र) एवं केंद्रीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान (हैदराबाद, तेलंगाना) पहुंचना है।

उन्नतशील तकनीकी की जानकारी लेंगे अधिकारी

अपना दौरा पूरा करने के बाद एक्सपोजर विजिट यूपी आकर प्रदेश के अधिकारियों व कर्मचारियों को विभिन्न संस्थानों में अपनाई जा रही उन्नत तकनीकों, उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों एवं नवाचारों का प्रत्यक्ष अनुभव बताएंगे। अध्ययन करने वाले संस्थान का चयन उनकी सफलता के आधार पर ही किया गया है। इसलिए विजिट के लोग उनके सफल प्रयोगों से सीख लेकर आएंगे और प्रदेश में उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर काम करने की पद्धति पर अपनी तरकीब सुझायेंगे।

इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रमुख सचिव कृषि डॉ. एम.के.एस. सुन्दरम भी लखनऊ स्थित राजकीय कृषि प्रक्षेत्र, अटारी में स्थापित किए जा रहे भारत रत्न चौधरी चरण सिंह सीड पार्क तथा काकोरी विकासखंड अंतर्गत साधन सहकारी समिति, पहिया आजमपुर में किये जा रहे उनके प्रयासों की सच्चाई को परखने पहुंचे। उनके दौरे के दौरान कुछ खामियां नजर आईं, जिनके बारे में सावधानी बरतने के लिए कहा गया है। इसके अलावा भी कार्य में शिथिलता पाई गई। इसलिए उन्होंने सीड पार्क के निर्माण कार्योंद की गति बढ़ाने के निर्देश दिए।

 वैसे तो प्रदेश के बड़े अधिकारियों में अपने कार्यशैली के अनुसार ही काम करने की पद्धति रहती है, लेकिन यह योजनाएं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों पर चलाई जा रही हैं, इसलिए इनकी समीक्षा करनी होती है। साथ ही कृषि विभाग के लक्ष्य की पूर्ति करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल कर दिया जाता है। लापरवाही करने वाली  सीड पार्क का विकास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद देख सकते हैं। इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में जाकर सीखेंगे खेती

सीड पार्क के अधिकारियों की ओर से कार्यों की गति में आ रहे व्यवधानों का जिक्र किया गया। इन व्यवधानों में आवागमन संचालन में मार्ग का ना होना एवं पेड़ की डालें बाधक बन रही हैं। इनका समाधान भी उन्हीं अधिकारियों ने बताया है। प्रगति कार्यों में आ रही बाधाओं के अंतर्गत परिसर में वृक्षों के कटान के लिए वन विभाग की अनुमति ज्यादा जरूरी है।  यहां पर आवागमन बनाने के लिए अप्रोचरोड, आंतरिक मार्ग व मध्य में आने वाले खेत के अधिग्रहण की प्रक्रिया लंबित है। इसके पूरा करने के बाद ही समस्या का निस्तारण करने की दिशा में काम शुरू हो पाएगा।

प्रमुख सचिव ने विकास कार्यों में आ रही रुकावटों को गंभीरता से सुना और निर्देश भी दिए की प्रभागीय वनाधिकारी, अवध प्रभाग से समन्वय स्थापित कर आज ही संबंधित रूकावटों को निस्तारित करें। इसी बैठक के दौरान उन्होंने जॉइंट मजिस्ट्रेट मलिहाबाद को भी निर्देश देते हुए कहा कि सीड पार्क से संबंधित भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाएं। जल्दी से जल्दी इस समस्या का निदान कराएं। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट मलिहाबाद की ओर से यह प्रक्रिया पूर्ण कराए जाने के बाद यूपीडा की भूमिका भी कृषि विभाग की महत्वपूर्ण योजनाओं के साथ जुड़ जाएगी। इसके साथ ही यहां के अधिकारियों को भी फील्ड में उतरकर सड़क और प्लांट्स का सीमांकन करना होगा।

यह भी पढ़ेंः झारखंड में आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश की चेतावनी, रांची में 26 सितंबर को केजी से कक्षा-12 तक सभी स्कूल बंद

अधिकारियों को कहा गया है कि वृक्षों से संबंधित समस्याओं का निस्तारण होते ही निर्माण कार्य प्रारंभ करा देंगे। प्रदेश के प्रमुख  कृषि संस्थानों में किसानों की समस्याओं को दूर करने के लिए एक लंबी लिस्ट बनाई गई है। इसमें खाद्य, पानी, बुवाई के अलावा कृषि क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं के निदान करने की जिम्मेदारी है। इसके अलावा श्री अन्य के प्रति प्रोत्साहित करना सरकार की योजनाओं को जन जन तक पहुंचाना और विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत दिए जाने वाले लाभ को पहुंचाना इनके कार्यक्षेत्र में शामिल है।

प्रदेश के किसानों को बताएंगे श्रीअन्न के लाभ

 कृषि साधन सहकारी समिति पहिया आजमपुर में यूरिया, डीएपी एवं एनपीके उर्वरक के भौतिक स्टॉक, पीओएस मशीन व वितरण रजिस्टरों का गहन मिलान आदि को वैधानिक तरीके से सही रखना है। किसानों को उनकी जोतबही एवं फार्म रजिस्ट्री के आधार पर निर्धारित मूल्य पर ही अधिकतम प्रति हेक्टेयर सात बोरी यूरिया तथा पांच बोरी डीएपी उपलब्ध करने की जिम्मेदारी में यह लोग लापरवाही नहीं कर सकते हैं।

इनकी रिपोर्ट कृषि विभाग के पास जाएगी, और मुख्यमंत्री उनसे सीधे संबंध स्थापित कर जवाब तलब कर लेंगे। इसलिए साफ चेतावनी है कि किसी प्रकार की लापरवाही ना बऱती जाए। यही कारण है कि प्रदेश स्तर के बड़े अधिकारी केंद्रो का दौरा भी कर रहे हैं। अभी हाल ही में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बैठक कर निर्देश दिया था कि अधिकारियों को किसानों से सीधा संबंध स्थापित करना है। इसके लिए उनको किसानों के पास जाना होगा एवं खेतों का दौरा भी करना पड़ेगा।

उन्होंने कहा था कि कागजों से उतर कर अनुसंधान को जमीन पर दिखाना है। इसीलिए अनुदानित उर्वरकों के साथ किसी भी गैर-अनुदानित उत्पाद की टैगिंग चेक करने के लिए अधिकारी ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच रहे है। किसानों को संतुलित उर्वरक प्रयोग के लिए निरंतर जागरूक व प्रोत्साहित करने की प्रयास चल रहे हैं। जिन अधिकारियों को बड़ी ड्यूटी दी गई है, उनमें कृषि निदेशक टी.एम. त्रिपाठी, सीमा रहमानखेड़ा के निदेशक डॉ. रमेश मौर्या, अपर कृषि निदेशक (बीज एवं प्रक्षेत्र) डॉ. योगेश प्रताप सिंह, संयुक्त कृषि निदेशक लखनऊ मंडल डॉ. अजय कृष्णा आदि शामिल है।

यह भी पढ़ेंः हैदराबाद में गणेश विसर्जन जुलूस को लेकर चप्पे-चप्पे पर पुलिसकर्मी, 10 हजार से ज्यादा CCTV और 24 ड्रोन से निगरानी

अन्य प्रमुख खबरें