गुजरात में पौधे की नई किस्म की खोज, Rungia repens की मिली सफेद फूल वाली वैरायटी
खबर सार :-
गुजरात की जैव विविधता में वृद्धि हुई है। GEER फाउंडेशन के शोधकर्ताओं ने ‘रूंगिया रेपेन्स’ पौधे की एक नई वैरायटी की खोज की है। इस पौधे में फूल फरवरी से अप्रैल तक आते हैं।
खबर विस्तार : -
गांधीनगर: गुजरात इकोलॉजिकल एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन (GEER फाउंडेशन) के रिसर्चर्स ने 'रुंगिया रेपेन्स' की एक नई सफेद फूल वाली वैरायटी खोजी है, जिससे गुजरात के पेड़-पौधों में एक नया पौधा जुड़ गया है।
वन और पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा, "इस नई पहचानी गई पौधे की किस्म का नाम ‘रुंजिया रिपेंस वैरायटी अल्बा’ रखा गया है, जिसमें 'अल्बा' का मतलब पौधे के सफेद फूलों से है। यह नई किस्म छोटा उदेपुर जिले के नर्मदा नहर कमांड क्षेत्र में जैव विविधता अध्ययन के दौरान देखी गई थी। मैं इस अध्ययन के लिए GEER फाउंडेशन के रिसर्चर्स को बधाई देता हूं।" मोढवाडिया ने आगे कहा, "यह अध्ययन मध्य और दक्षिण गुजरात के कुछ हिस्सों में 'पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र (जैव विविधता, मिट्टी और पानी की गुणवत्ता) पर नर्मदा नहर प्रणाली का प्रभाव' नामक प्रोजेक्ट के तहत किया गया था।"
पर्यावरण राज्य मंत्री ने दी जानकारी
गुजरात के वन और पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने कहा, "मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य के वन विभाग ने हमारी अमूल्य वनस्पति के संरक्षण के लिए कई रिसर्च पहल और उपाय किए हैं। इस तरह की रिसर्च हमारे राज्य में मौजूद जैव विविधता की समृद्धि को उजागर करती है और इसके भविष्य के संरक्षण के लिए एक नई दिशा प्रदान करती है।"
छोटा उदेपुर जिले में मिले नई किस्म के पौधे
गौरतलब है कि GEER फाउंडेशन गुजरात सरकार के वन और पर्यावरण विभाग द्वारा स्थापित एक स्वायत्त निकाय है। GEER फाउंडेशन के निदेशक बी.पी. पाटी (IFS) ने कहा, "जैव विविधता अध्ययन के दौरान, हमारे रिसर्चर्स ने छोटा उदेपुर जिले में इस नई किस्म के तीन परिपक्व पौधों को दर्ज किया। पौधे का एक नमूना एकत्र किया गया, सुखाया गया और GEER फाउंडेशन हर्बेरियम (GEERF) में जमा किया गया।"
गुजरात की जैव विविधता को बढ़ावा
गुजरात के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) डॉ. जयपाल सिंह ने कहा, "रुंजिया रिपेंस वैरायटी अल्बा की पहचान गुजरात की जैव विविधता को बढ़ाती है और नर्मदा नहर प्रणाली से जुड़े क्षेत्रों में निरंतर पारिस्थितिक सर्वेक्षण के महत्व को रेखांकित करती है।" रिसर्च टीम में GEER फाउंडेशन के डॉ. राजकुमार यादव, नमन नायक, विनेश गमित, अमित कुमार नायक (IFS) और बी.पी. पाटी (IFS) शामिल हैं।
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फरवरी से अप्रैल तक इस पौधे में आते हैं फूल
इस रिसर्च से जुड़े डॉ. राजकुमार यादव ने कहा, "यह नई किस्म आम तौर पर पाए जाने वाले Rungia repens से अलग है, जिसमें नीले और बैंगनी रंग के फूल होते हैं। इस नई किस्म में पूरी तरह से सफेद कोरोला (फूल की पंखुड़ियां), मध्यम आकार के फूलों के स्पाइक (फूलों का गुच्छा) और छोटे ब्रैक्ट्स (पत्ती जैसी संरचनाएं) होते हैं, जो हरे रंग के होते हैं और उनके सिरे सफेद और नुकीले होते हैं।" डॉ. यादव ने आगे कहा, "इस रिसर्च को फॉरेस्ट्री (वानिकी) पर सबसे पुराने इंटरनेशनल जर्नल, The Indian Forester में पब्लिकेशन के लिए स्वीकार कर लिया गया है।" इस पौधे में फूल आने का समय फरवरी से अप्रैल तक दर्ज किया गया है, और इसके बाद मई से जून तक फल लगते हैं। यह इसे आम Rungia repens से अलग करता है, जिसमें अगस्त और जनवरी के बीच फूल आते हैं।
एक नई किस्म के रूप में की गई पौधे की पहचान
GEER फाउंडेशन के डिप्टी डायरेक्टर अमित कुमार नायक (IFS) ने कहा, "Rungia repens के मौजूदा नमूनों के साथ तुलना और विस्तृत मॉर्फोलॉजिकल (शारीरिक संरचना संबंधी) जांच के बाद इस पौधे की पहचान एक नई किस्म के रूप में की गई। रिसर्चर्स ने सफेद फूलों वाले पौधों और आम तौर पर देखे जाने वाले नीले फूलों वाली किस्म के बीच खास मॉर्फोलॉजिकल अंतर देखे।" गीर फाउंडेशन के निदेशक बीपी पति (आईएफएस) ने कहा, “हाल ही में, गीर फाउंडेशन हर्बेरियम को द न्यूयॉर्क बॉटनिकल गार्डन (एनवाईबीजी) द्वारा होस्ट और प्रकाशित किए गए ‘इंडेक्स हर्बेरियोरम’ द्वारा आधिकारिक एक्रोनिम दिया गया है। यह रजिस्ट्री दुनियाभर के शोधकर्ताओं को फाउंडेशन के संग्रह को आसानी से खोजने, संदर्भ देने और उद्धृत करने में सक्षम बनाती है।” हर्बेरियम नई वनस्पति खोजों के दस्तावेजीकरण में और देशभर के विद्यार्थियों, वैज्ञानिकों और शोधार्थियों के लिए अपने संग्रह को सुव्यवस्थित बनाने में निर्णायक भूमिका निभाता है।
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