गोमती नदी का जल स्वच्छ और किनारे किए जाएंगे सुंदर, ड्रोन सर्वे में दिखे 12 नए नाले
खबर सार :-
गोमती नदी में 45 नालों का गंदा-साफ पानी गिर रहा है। यह नगर निगम लखनऊ की सीमा का है। नगर निगम के सीवेज प्लान में केवल 33 नाले शामिल थे। बाकी 12 नालों की जानकारी उसे थी ही नहीं। इसकी जानकारी एक सर्वे में हुई। अब इनके सीवेज के बारे में काम शुरू किया जाना है।
खबर विस्तार : -
लखनऊः जिस गोमती नदी को साफ और सुंदर बनाने का दम भरा जा रहा है, उसके बारे में संबंधित विभागों को जानकारी ही नहीं है। ड्रोन सर्वे के जरिए पता किया गया है की गोमती नदी में 45 नाले गिर रहे हैं। यह एरिया 33 किलोमीटर का है। इस दूरी में गिरने वाले नालों की संख्या नगर निगम ने 33 बताई थी, जबकि इस दूरी में कूल 45 नाले गिर रहे हैं। यानी 12 नालों की जानकारी विभागों को नहीं है। ऐसे में किसकी बात सही मानी जाए। या तो नाले का सीवेज वाटर गोमती मेें गिरता रहा है, और नदी को साफ करने के नाम पर लाखों रूपये खर्च कर दिए जाते हैं। बहरहाल अब अधिकारी कह रहे हैं कि गोमती नदी का जल स्वच्छ और किनारो को सुंदर बनाने के लिए कवायद शुरू है।
33 किलोमीटर की दूरी में 33 नालों का उल्लेख
नगर निगम ने जो रिकॉर्ड तैयार किया था, उसमें लखनऊ के 33 किलोमीटर की दूरी में 33 नालों का उल्लेख था। लेकिन ड्रोन सर्वे के बाद एक नई जानकारी यह है कि 12 नए नाले नगर निगम के रिकॉर्ड अब दर्ज किए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में गोमती नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए नमामि गंगे कार्यक्रम को बड़े स्तर पर चलने के निर्देष दिए है। इस योजना को परवान चढ़ाने के लिए शहर के नालों की टैपिंग करनी होगी। जब तक नाले का गंदा नदी में गिरेगा, तब तक गोमती को स्वच्छ नहीं किया जा सकता है।
सीवेज को सीधे गोमती में नहीं गिरने दिया जाएगा
योजनानुसार लखनऊ से निकलने वाले सीवेज को सीधे गोमती में नहीं गिरने दिया जाएगा। नालों का डायवर्जन, एसटीपी की क्षमता और नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। ड्रोन सर्वे में जिन नालों की पहचान हुई, उनके सीवेज को शोधित करने के लिए अलग-अलग एसटीपी से जोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है। राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक जोगिंदर सिंह ने जानकारी दी है कि नदियों को स्वच्छ बनाने के लिए विभाग ने नए नालों की पहचान की है।
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जल्दी इनको शोधित करने के लिए काम किया जाएगा। इससे शहर के बड़े हिस्से से गुजरने वाली गोमती का स्वरूप भी बदलेगा। लखनऊ शहर में गोमती नदी में 45 नालों में से 15 एमएलडी डिस्चार्ज टैप किया जा चुका है। 28 नालों का डिस्चार्ज लगभग 260 एमएलडी है। यद्यपि जो नए नाले मिले हैं, उनको प्रस्तावित कार्यों के क्रियान्वयन के बाद पूरा किया जाएगा। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन नई दिल्ली को लिस्ट भेजी गई है। उत्तर प्रदेश सरकार में प्रवक्ता ने बताया की गोमती नदी के समेकित पुनरुद्धार की इस कार्य योजना की रिपोर्ट 6 मई 2026 को तैयार की गई थी।
लखनऊ में हर साल बढ़ती है आबादी
साल 2026 में शहर की अनुमानित आबादी 45ण्56 लाख के करीब है। इस शहर में कुल 10 वार्ड हैं। इनमें 7.52 लाख घर हैं। 53.32 फ़ीसदी घर शिवरेज नेटवर्क से जुड़े हैं। इस नेटवर्क को विस्तार देकर ही गोमती का जल साफ कर सकते हैं। नाले के जरिए गोमती नदी में पहुंच रहे प्रदूषित पानी को रोक पाना बड़ी चुनौती होगी। अभी तक कुल आबादी के लिए 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट सीवरेज शोधन के लिए लगे हैं, लेकिन इनकी कुल क्षमता 629.5 एमएलडी है। यानी कि अंतर काफी है। ऐसे में गोमती में सीधे पहुंचने वाले सीवेज को रोकने के साथ ही उनके शोधन क्षमता को बढ़ाना जरूरी हो गया है।
भरवारा और दौलतगंज में मरम्मत किया जा रहा
अन्यथा आधा सीवेज गोमती में गिर रहा है। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत 39 एमएलडी एसटीपी का निर्माण कार्य नवंबर 2024 को पूरा किया गया था। एक और नाले पर अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। लोनिया पूर्व एसटीपी में काम चल रहा है और जून 2027 में इसे पूरा कर लेना है। हालांकि गोमती नदी में काफी समय से कम किया जा रहा है। कुकरेल नदी को पुनरुद्धार करने के लिए नए सिरे से पेड़ पौधे आदि का काम चल रहा है। यहां से गोमती में साफ पानी पहुंच रहा है। गोमती को पुनरुद्धार करने की तैयारी फीजिबिलिटी रिपोर्ट पीएचआर में नाले को अलग-अलग एसटीपी से जोड़ना है। बसंत कुंज, वजीरगंज, जिया मऊ, पिपरा घाट आदि स्थान पर कार्य चल रहा है। साथ ही भरवारा और दौलतगंज में मरम्मत किया जा रहा है।
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