हस्तशिल्प, दवा और पर्यावरण संरक्षण में भी मददगार है बांस, विश्व बांस दिवस पर जानें इसकी उपयोगिता
खबर सार :-
बांस के प्रति दुनियाभर में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर साल 18 सितंबर को विश्व बांस दिवस मनाया जाता है। इस साल के लिए तय की गई थीम ‘बैम्बू बियॉन्ड बॉर्डर्स’ है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: बांस का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में होता है, जैसे घर बनाने और सजाने से लेकर हस्तशिल्प, दवा और पर्यावरण संरक्षण तक। इस लचीले, टिकाऊ और अद्भुत प्राकृतिक संसाधन की बड़ी क्षमता को पहचानने और इसके बारे में दुनियाभर में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 18 सितंबर को 'विश्व बांस दिवस' मनाया जाता है।
इस अहम पहल की शुरुआत आधिकारिक तौर पर 'वर्ल्ड बैम्बू ऑर्गनाइजेशन' ने 18 सितंबर, 2009 को बैंकॉक, थाईलैंड में आयोजित 8वें 'वर्ल्ड बैम्बू कांग्रेस' के दौरान की थी। समय के साथ इस दिन का महत्व बढ़ता गया है। 2026 के लिए तय की गई आधिकारिक थीम 'बैम्बू बियॉन्ड बॉर्डर्स' (सीमाओं से परे बांस) है, जो इसकी वैश्विक अहमियत को दिखाती है जो सीमाओं से परे है; वहीं, 2025 की थीम 'नेक्स्ट जेनरेशन बैम्बू: सॉल्यूशन, इनोवेशन, एंड डिजाइन' थी, जिसमें आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए बांस के इस्तेमाल में इनोवेशन की भूमिका पर जोर दिया गया था।
असाधारण मजबूती की वजह से जाना जाता है बांस
बांस 'पोएसी' परिवार (जिसे 'ग्रामिनी' भी कहा जाता है) से जुड़ी एक घास है और सभी घासों में सबसे लंबी और लकड़ी जैसी मजबूत होती है। आम घास जैसी दिखने के बावजूद, इस पौधे में असाधारण मजबूती होती है। अपनी खास संरचनात्मक खूबियों के कारण, इसे अक्सर 21वीं सदी का 'ग्रीन स्टील' कहा जाता है। इसकी खिंचाव सहने की क्षमता (टेन्साइल स्ट्रेंथ) इतनी जबरदस्त है कि यह निर्माण उद्योग में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले 'माइल्ड स्टील' को टक्कर देता है और कई मामलों में उससे बेहतर साबित होता है।
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वैश्विक व्यापार में सबसे आगे चीन
वैश्विक अर्थव्यवस्था में बांस की भूमिका को कम करके नहीं आंका जा सकता। 'इंटरनेशनल बैम्बू एंड बेंत ऑर्गनाइजेशन' (INBAR) और बाजार से जुड़ी कई रिसर्च स्टडीज़ के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में वैश्विक बांस बाजार की कीमत लगभग $70–$76 बिलियन थी। अनुमान है कि 2033 तक यह $113.8 बिलियन के बड़े आंकड़े को पार कर जाएगा। चीन इस बड़े वैश्विक व्यापार में सबसे आगे है, जहां सालाना 30 मिलियन टन उत्पादन होता है और निर्यात मूल्य $2 बिलियन से ज्यादा है; इसके ठीक बाद भारत का नंबर आता है, जो 20 मिलियन टन उत्पादन के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र है।
पर्यावरण को साफ रखता है बांस
पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ चल रही वैश्विक लड़ाई में बांस एक बेहद शक्तिशाली प्राकृतिक हथियार है। तेजी से बढ़ने की अपनी क्षमता के कारण, बांस के जंगल का एक हेक्टेयर हिस्सा सालाना लगभग 12,000 से 17,000 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड सोखने की क्षमता रखता है। इसके अलावा, यह आम पेड़ों की तुलना में बहुत तेजी से पर्यावरण में ऑक्सीजन छोड़ता है और अपने तनों, पत्तियों और जड़ों में भारी मात्रा में कार्बन जमा करता है। पर्यावरण को साफ करने में इसकी भूमिका सिर्फ हवा तक ही सीमित नहीं है; यह 'फाइटोरेमेडिएशन' (phytoremediation) की प्रक्रिया से भारी धातुओं से दूषित मिट्टी को भी फिर से उपजाऊ बनाता है। अध्ययनों से साबित हुआ है कि 'मोसो बांस' (Moso bamboo) जैसी प्रजातियां मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को फिर से बढ़ाने में बहुत असरदार हैं। ये अपनी जड़ों के जरिए जहरीले तत्वों जैसे जिंक और क्रोमियम और यहां तक कि कच्चे तेल के रिसाव को भी सोख लेती हैं।
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