तमिलनाडु में बाघ का हमला, दो की मौत, 48 घंटे बंद, सौ वनकर्मी देख रहे 130 कैमरे
खबर सार :-
तमिलनाडु में बाघ के हमले से दो लोगों की मौत हो गई। इसके विरोध और खौफ में गुडालूर इलाके की दस हजार दुकानें बंद हैं। इसको पकड़ने के लिए सर्च अभियान चलाया गया है। इसमें सौ वनकर्मी 130 कैमरों की निगरानी कर रहे हैं।
खबर विस्तार : -
नीलगिरि : तमिलनाडु के गुडालुर में दो लोगों की जान लेने वाले बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग के साथ पुलिस-प्रशासन की टीम खेतों और जंगलों में सर्च अभियान चला रही है। दो लोगों की जान जाने के बाद पूरे इलाके में दहशत है। कई किलोमीटर दूर से ही बाघ की दस्तक वाले एरिया में जाने से लोग डर रहे हैं। स्थानीय दुकानदारों एवं क्षेत्रीय लोगों ने मांग की है कि बाघ को पकड़ा जाए। अन्यथा दुकानें बंद रखी जाएंगी। बाघ को पकड़ने की मांग कर व्यापारियों और स्थानीय संगठनों ने 48 घंटे का बंद बुलाया है। इस बंद के आवाहन पर गुरुवार को करीब 10,000 दुकानों के शटर नहीं उठाए गए।
स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा और डर
गुडालुर में दो लोगों पर अलग अलग स्थानों पर हमले हुए हैं। इनमें दोनों की मौत हो गई। उसके बाद स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा और डर है। बाजार, स्कूल, स्टेशन और अस्पताल जैसे सार्वजनिक स्थानों पर भी बाघ से डर बना हुआ है। जिन लोगों को बाघ ने अपना शिकार बनाया, उनकी पहचान बालकृष्णन और रविचंद्रन के तौर पर हुई है। आक्रोश और डर चारों ओर दिख रहा है। व्यापारी, राजनीतिक पार्टियां और स्थानीय संगठन आदमघोर बाघ को पकड़ने की मांग कर रहे हैं, वहीं स्कूल और कालेज भी ज्यादातर बंद रहे। बताया गया कि व्यापारी और स्थानीय संगठनों का यह बंद शुक्रवार को भी जारी रहेगा। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि जान है तो जहान है।
मुआवजे की राशि 50 लाख रुपए करें
जंगलों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष पर चर्चा करने के लिए कोटागिरी में व्यापारियों, एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक बैठक की। इसमें अध्यक्षता सीपीआई (एम) के तालुक सचिव मणिकंदन ने की। बैठक में जंगली जानवरों के कारण होने वाली मौतों पर दुख जताया गया है। इसके लिए मुआवजे की राशि 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 50 लाख रुपए करने की मांग हुई। साथ ही प्रत्येक पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी की मांग वाले प्रस्तावों को भी पारित किया गया।
कोयंबटूर से लाया गया पिंजरा भी लगा
उधर, व्यापारियों और स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी बढ रही है। इसे देख वन विभाग के कर्मचारियों ने बाघ को पकड़ने के प्रयास तेज किए हैं। वन्य जीव को न पकड़े जाने से तमाम दिक्कतें आ रही हैं। यह सभी मामले बैठक का हिस्सा बने। तमिलनाडु के मुख्य वन्यजीव वार्डन राकेश कुमार डोगरा के निर्देशों पर बाघ को पकड़ने का अभियान तेज किया गया। यहां गुडालुर के जिला वन अधिकारी देवराज ने एक टीम बनाई है। इसमें वह अगुवा रहेंगे। टीम में 100 से अधिक वन कर्मियों को जिम्मेदारी दी गई है। टीम के पास किसी प्रकार की कमी नहीं है। इनके साथ ऑपरेशन में तीन थर्मल-इमेजिंग ड्रोन, 130 ऑटोमैटिक कैमरे और 12 पिंजरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
कम विजिबिलिटी बन रही मुसीबत
जो टीम बनाई गई है, उनके अधिकारियों ने सभी 130 कैमरों की फुटेज देखी। इनमें वह किसी में नहीं है। इसका मतलब है कि जानवर की हरकत रिकॉर्ड नहीं हुई। लगातार बारिश, धुंध और कम विजिबिलिटी की वजह से निगरानी में और दिक्कतें आईं। टीम ने जो इंतजाम किए हैं, वह कम हैं। बाघ तलाशी टीमों की नजर से बचता रहा है। वाघ वन्य जीव है। इसे आदमखोर घोषित करने के बाद भी आसानी से मारा नहीं जा सकता। इसके बचाव में सामाजिक संस्थाएं सामने आ जाती हैं।
बाघ पकड़ना तो दूर की बात...
बाघ को लेकर चारों ओर दहशत है। जो लोग दुकान खांेल रहे है, वह जल्द ही बंद भी कर रहे हैं। कोयंबटूर के अलावा दूसरे डिवीजनों से भी वन कर्मियों को भी बुलाया गया है। बच्चों की पढ़ाई व किसी की कमाई न रुके, इसके निए टीमें चौबीसों घंटे गश्त कर रही हैं। यद्यपि वन क्षेत्रों की निगरानी के लिए थर्मल ड्रोन का भी उपयोग किया जा रहा है। वन विभाग ने बाघों की संभावित आवाजाही वाले कुछ क्षेत्र चिह्नित किए हैं। इन इलाकों में आम लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंधित कर दी है।
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