बाघ के संरक्षण की सबसे बड़ी जिम्मेदारी भारत पर ; डॉ. खैरा

खबर सार :-

राष्ट्रीय पशु दिवस के अवसर पर दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की ओर से स्कूली विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए भारत का राष्ट्रीय पशु बंगाल टाइगर का संरक्षण और हमारी जिम्मेदारी विषय पर विशेष शैक्षिक एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
बाघ के संरक्षण की सबसे बड़ी जिम्मेदारी भारत पर ; डॉ. खैरा

खबर विस्तार : -

देहरादून/भोपाल ; राष्ट्रीय पशु दिवस के अवसर पर दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की ओर से स्कूली विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए भारत का राष्ट्रीय पशु बंगाल टाइगर का संरक्षण और हमारी जिम्मेदारी विषय पर विशेष शैक्षिक एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। दूसरी ओर मध्यप्रदेष के भोपाल में भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश बाघ संरक्षण के क्षेत्र में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। वर्ष 2022 की गणना के अनुसार प्रदेश में 785 बाघ थे। यह संख्या एक हजार के करीब पहुंचने की संभावना है।

बाघ वन पारिस्थितिकी तंत्र का शीर्ष शिकारी

 देहरादून में कार्यक्रम के मुख्य वक्ता भूगोलवेत्ता डॉ. सुरजीत सिंह खैरा ने कहा कि बंगाल टाइगर केवल भारत का राष्ट्रीय पशु नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक समृद्धि, शक्ति और गौरव का प्रतीक है। सिंधु घाटी सभ्यता से प्राप्त पुरावशेषों में भी बाघ की के रूप मिलते हैं, जो भारतीय संस्कृति से उसके प्राचीन संबंधों को दर्शाती हैं। डॉ. खैरा ने कहा कि बाघ वन पारिस्थितिकी तंत्र का शीर्ष शिकारी है। उन्होंने बताया कि विश्व के आधे से अधिक जंगली बाघ भारत में पाए जाते हैं, इसलिए उनके संरक्षण की सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी भारत पर है। इन प्रयासों का परिणाम है कि आज भारत में बाघों की संख्या बढ़कर 3,682 तक पहुँच चुकी है, जो विश्व स्तर पर संरक्षण की उल्लेखनीय सफलता मानी जाती है। इनकी संख्या पर प्रयास भी किए गए।

1973 में प्रोजेक्ट टाइगर प्रारम्भ किया गया था

डॉ. खैरा ने विद्यार्थियों से कहा कि आज भी बाघों के सामने अवैध शिकार, वनों का विनाश, प्राकृतिक आवासों का सिकुड़ना, मानव-वन्यजीव संघर्ष तथा अवैध वन्यजीव व्यापार आदि ेक अलावा गंभीर चुनौतियाँ मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1972 में बाघों की संख्या घटी थी। कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि आज के समय में केवल पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए। ज्यादा प्रतिस्पर्धा है। विद्यार्थियों को प्रकृति, पर्यावरण, जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन तथा वन्यजीव संरक्षण जैसे समसामयिक विषयों की व्यावहारिक की जानकारी जरूरी है। दून पुस्तकालय इसी उद्देश्य से विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों एवं विषय विशेषज्ञों को विद्यार्थियों के बीच आमंत्रित कर उन्हें प्रत्यक्ष संवाद का अवसर उपलब्ध कराता है। उनकी जिज्ञासा का समाधान हो सके और उनका ज्ञान अधिक व्यापक एवं व्यवहारिक बन सके।

शोध केन्द्र ने सभी प्रतिभागियों का आभार जताया

दो हजार रह जाने के बाद भारत सरकार ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 लागू किया था। वर्ष 1973 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में प्रोजेक्ट टाइगर प्रारम्भ किया गया था। माना जा रहा है कि यदि वन सुरक्षित रहेंगे तो बाघ सुरक्षित रहेंगे। यदि बाघ सुरक्षित रहेंगे तो संपूर्ण वन पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता तथा जल स्रोत भी सुरक्षित रहेंगे। कार्यक्रम के समापन पर दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र ने सभी प्रतिभागियों का आभार जताया। स्कूली विद्यार्थियों के लिए इसी प्रकार के ज्ञानवर्धक, शोधपरक एवं जागरूकता आधारित कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाते रहेंगे। नई पीढ़ी ज्ञान, संवेदनशीलता और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के साथ देश के सतत विकास में सार्थक भूमिका निभा सके। राजकीय बालिका इण्टर कालेज की छात्राएं तथा गुरुनानक एकेडमी स्कूल के छात्र छात्राएं व उनकी अध्यापिकाएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।

यह संख्या एक हजार के करीब 

उधर भोपाल में देश में सर्वाधिक बाघों वाले राज्य मध्य प्रदेश ने अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर वन्यजीव संरक्षण की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को नए संकल्प के साथ दोहराया गया। भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में राज्यस्तरीय समारोह हुआ। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश बाघ संरक्षण के क्षेत्र में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। वर्ष 2022 की गणना के अनुसार प्रदेश में 785 बाघ थे और आगामी गणना में यह संख्या एक हजार के करीब पहुंचने की संभावना है।

पेंच एडवांस्ड वॉर्निंग सिस्टम का शुभारंभ

डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश आज देश में बाघ संरक्षण का सबसे मजबूत केंद्र है। प्रदेश की वन संपदा, संरक्षित क्षेत्र और वन विभाग के समर्पित प्रयासों ने बाघों के लिए सुरक्षित वातावरण भारत में है। उन्होंने इसे वन विभाग, स्थानीय समुदायों और जनभागीदारी की बड़ी उपलब्धि बताया है। जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण पर आधारित पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया गया। सक्रिय वन्यजीव प्रबंधन से जुड़े वृत्तचित्रों के टीजर जारी कर संरक्षण अभियानों को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया गया। समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण गतिविधियों पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इसमंे संरक्षण कार्यों के लिए उपलब्ध कराए गए विशेष वाहनों का लोकार्पण किया। इस दारान रातापानी टाइगर रिजर्व के आधिकारिक लोगो का अनावरण किया तथा पेंच एडवांस्ड वॉर्निंग सिस्टम का शुभारंभ किया। वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पेड़ों में जीवन होने का विचार भारतीय ज्ञान परंपरा में बहुत पहले से स्वीकार किया गया था। न का हिस्सा है।

वन विभाग के साथ काम करने में उन्हें संतोष 

मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि पृथ्वी पर यदि कहीं बाघ मानव आबादी के सबसे निकट सुरक्षित रूप से निवास करते हैं तो वह भोपाल और उसके आसपास का क्षेत्र है। प्रदेश सरकार बाघों के साथ-साथ नदियों में घड़ियालों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रही है। प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण की यही भावना आज भी हमारी सांस्कृतिक पहंचा । पहले प्रदेश में छोड़े गए घड़ियाल दूसरे राज्यों की ओर चले जाते थे। अब ऐसी व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं जिससे उनका सुरक्षित संरक्षण मध्य प्रदेश में ही सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री ने ओरछा स्थित माता महालक्ष्मी मंदिर की भव्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि शासन के सभी विभाग महत्वपूर्ण हैं, फिर भी वन विभाग के साथ काम करने में उन्हें विशेष संतोष मिलता है। हाथियों की आवाजाही से होने वाली जनहानि को रोकने के लिए किए गए प्रयासों के भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। समारोह में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वन कर्मियों, वन सुरक्षा समितियों, ईको विकास समितियों, ग्राम वन समितियों तथा विशिष्ट विभूतियों को सम्मानित किया गया।

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